हाशिम मूसा के खात्मे पर पहलगाम पीड़ितों के परिवार बोले — 'सेना ने पितृपक्ष में दिया सच्चा तर्पण'
सारांश
मुख्य बातें
पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशन्या द्विवेदी और उनके पिता संजय द्विवेदी ने 30 सितंबर को कथित मास्टरमाइंड हाशिम मूसा के बडगाम में एनकाउंटर में मारे जाने की खबर का स्वागत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुरक्षा एजेंसियों को धन्यवाद देते हुए इसे पहलगाम के पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक अहम कदम बताया। पीड़ित संतोष जगदाले की बेटी आसावरी जगदाले ने भी इस ऑपरेशन पर अपनी भावनाएं साझा कीं।
ऐशन्या द्विवेदी की प्रतिक्रिया
ऐशन्या द्विवेदी ने कहा, 'मूसा पहलगाम का मास्टरमाइंड और बहुत लंबे समय से मोस्ट वांटेड रहा है। इसके खिलाफ पहले भी ऑपरेशन चलाया गया था, जिसमें वो भाग निकला था। अभी फिर से भारतीय सेना ने ऑपरेशन चलाया, जिसमें वो मारा गया।' उन्होंने जोड़ा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद से अब तक कथित तौर पर 25-26 आतंकी मारे जा चुके हैं।
ऐशन्या ने कहा कि यह नया भारत है जिसने स्पष्ट कर दिया है कि वह आतंकवाद बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों में राजनीति घुसाते हैं, उन्हें अपने भारतीय होने पर पुनर्विचार करना चाहिए।
पितृपक्ष के संदर्भ में ऐशन्या ने भावुक होते हुए कहा, 'हाशिम मूसा को मारना, सही मायने में हमारे पितरों को तर्पण देने जैसा है। शुभम और उन 26 लोगों को जो तर्पण देते हैं, ये सही मायने में वही हैं।' यह टिप्पणी उस पीड़ा की गहराई को उजागर करती है जो पहलगाम के परिवार आज भी झेल रहे हैं।
आसावरी जगदाले की भावनाएं
पीड़ित संतोष जगदाले की बेटी आसावरी जगदाले ने कहा, 'मेरे लिए ये खुशी का दिन है। सुबह-सुबह मुझे ये खबर मिली कि पहलगाम हमले का जो मास्टरमाइंड था, जो हैंडलर था, उसे मार गिराया गया है। हमारी भारतीय सेना और इंटेलिजेंस फोर्स ने मिलकर उसका खात्मा किया है।'
आसावरी ने यह भी बताया कि मंगलवार को उनके पिता का श्राद्ध था और उन्होंने पूरा दिन रोते हुए बिताया। उन्होंने कहा कि उनके पिता और उनके करीबी दोस्त दोनों की इस हमले में जान गई थी और हमलावरों ने उनसे धर्म पूछकर गोलियां चलाई थीं। 'इस घटना से हम कभी उबर नहीं पाएंगे — जब तक हम जिंदा हैं, तब तक ये हमारे साथ रहेगी,' उन्होंने कहा।
आसावरी ने सरकार, सेना और इंटेलिजेंस एजेंसियों से अपील की कि ऐसे ऑपरेशन तब तक जारी रहें जब तक आखिरी आतंकी का खात्मा न हो जाए, ताकि भविष्य में पहलगाम जैसी कोई घटना न दोहराई जाए।
पहलगाम हमले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें पर्यटक और स्थानीय नागरिक शामिल थे। हमलावरों ने कथित तौर पर पीड़ितों की धार्मिक पहचान के आधार पर उन्हें निशाना बनाया था। हाशिम मूसा को इस हमले का कथित मास्टरमाइंड और हैंडलर बताया जाता रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारतीय सुरक्षा बल कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी अभियानों को तेज़ गति से जारी रखे हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान कथित तौर पर दो दर्जन से अधिक आतंकी मारे जा चुके हैं।
आगे क्या
पहलगाम पीड़ितों के परिवार न्याय की उम्मीद लेकर जी रहे हैं और उनकी माँग है कि जाँच और सैन्य कार्रवाई दोनों मोर्चों पर सरकार सक्रिय रहे। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, एक बड़े नेटवर्क के सूत्रधार का खात्मा निश्चित रूप से आतंकी ढाँचे को कमज़ोर करता है, लेकिन पूर्ण उन्मूलन के लिए निरंतर खुफिया सहयोग अनिवार्य है।