पाकिस्तान सरकार आईएमएफ के राजस्व लक्ष्य को पूरा करने में विफल, टैक्स संग्रह में बड़ा अंतर
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान को IMF के राजस्व लक्ष्यों को पूरा करने में कठिनाइयाँ आ रही हैं।
- राजस्व संग्रह में कमी ने कर्ज की अगली किश्तों को प्रभावित किया है।
- आर्थिक सुधार के लिए कृषि और रियल एस्टेट में सुधार आवश्यक है।
- वैश्विक आर्थिक हालात का असर पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।
- विशेषज्ञों के अनुसार, चौथी तिमाही में राजस्व संग्रह की स्थिति पर निर्भर करेगी।
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान सरकार का राजस्व संग्रह का लक्ष्य पूरा न कर पाना अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) कार्यक्रम के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है। ये राजस्व लक्ष्य इस कार्यक्रम की आधारशिला हैं, जिनके माध्यम से पाकिस्तान को कर्ज की अगली किश्तें प्राप्त होनी हैं।
आईएमएफ के 7 अरब डॉलर के एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (ईएफएफ) के तहत पाकिस्तान को अपने कर संग्रह में तेजी लाने की आवश्यकता है। इसके लिए फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (एफबीआर) ने 13 ट्रिलियन रुपये से अधिक का संशोधित लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें टैक्स बढ़ोतरी, कृषि और रियल एस्टेट क्षेत्र में सुधार, एवं निगरानी बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं।
हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तीन तिमाहियों में एफबीआर का टैक्स कलेक्शन लक्ष्य से काफी पीछे रह गया है। जहां लक्ष्य 9,917 अरब रुपये था, वहीं वास्तविक संग्रह 9,307 अरब रुपये हुआ। इस प्रकार 610 अरब रुपये की कमी दर्ज की गई, जो संशोधित वार्षिक लक्ष्य 13,979 अरब रुपये का लगभग 4.4 प्रतिशत है। पहले यह लक्ष्य 14,131 अरब रुपये रखा गया था।
इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2025-26 में 19 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि दर आवश्यक है, जो वर्तमान में कठिनाई भरी लगती है।
इनकम टैक्स के लिए 6,967 अरब रुपये का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 20.3 प्रतिशत की वृद्धि दर अपेक्षित है। लेकिन अब तक केवल 4,636 अरब रुपये का संग्रह हुआ है, जिससे 235 अरब रुपये की कमी हुई है और वृद्धि दर केवल 12 प्रतिशत रही है।
सेल्स टैक्स के लिए 4,580 अरब रुपये का लक्ष्य है, जिसमें 17.4 प्रतिशत की वृद्धि दर की आवश्यकता है। पहली तीन तिमाहियों में 3,104 अरब रुपये का संग्रह हुआ, जिससे 313 अरब रुपये की कमी आई और वृद्धि दर केवल 9 प्रतिशत रही।
कस्टम ड्यूटी और एक्साइज ड्यूटी में लक्ष्य के मुकाबले ज्यादा अंतर नहीं देखा गया। कस्टम ड्यूटी में केवल 30 अरब रुपये की कमी रही, जबकि एक्साइज ड्यूटी में 5 अरब रुपये का लक्ष्य से अधिक संग्रह हुआ है। इन दोनों करों में 12 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर दर्ज की गई है।
आईएमएफ का अनुमान था कि जून 2026 तक पाकिस्तानी रुपये की कीमत में 12 प्रतिशत से अधिक गिरावट आएगी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है। इससे आयात आधारित करों पर भी असर पड़ा है।
इसके अलावा, मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति और होर्मुज स्ट्रेट में संभावित बाधाओं से आयात प्रभावित हो सकता है। हालांकि, तेल और अन्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से कर संग्रह पर प्रभाव किस दिशा में जाएगा, यह स्पष्ट नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चौथी तिमाही में राजस्व संग्रह की स्थिति काफी हद तक वैश्विक आर्थिक हालात और आयात पर निर्भर करेगी।