पाकिस्तान की भूमिका तय होगी शांति वार्ता की सफलता पर: मौलाना सैय्यद मोहसिन तकवी
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान की भूमिका शांति वार्ता की सफलता पर निर्भर करेगी।
- नोबल पुरस्कार की चर्चा में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
- संभावित सीजफायर पर चर्चा जारी है।
- शांति वार्ता में ठोस भूमिका आवश्यक है।
- पाकिस्तान की राजनीतिक हस्तियां सक्रिय हैं।
नई दिल्ली, ११ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, पाकिस्तान में संभावित सीजफायर और शांति वार्ता पर चर्चा तेज हो गई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, शिया धर्मगुरु और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना सैय्यद मोहसिन तकवी ने कहा कि पाकिस्तान का कद तभी बढ़ेगा जब शांति वार्ता सफल हो और वह इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। उन्होंने कहा कि नोबल पुरस्कार की चर्चा करना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
सैय्यद मोहसिन तकवी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की भूमिका तब ही महत्वपूर्ण मानी जाएगी जब शांति वार्ता में वह कोई ठोस और प्रभावी योगदान दे सके। मौजूदा समय में यह कहना जल्दबाजी है कि पाकिस्तान का कद कैसे बढ़ेगा और इसका परिणाम क्या होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय शांति वार्ताओं में केवल मेज़बानी करना ही पर्याप्त नहीं है; असली भूमिका उस देश की होती है जो समाधान का मार्ग प्रशस्त करता है। वर्तमान में, पाकिस्तान की भूमिका सीमित नजर आ रही है और यह स्पष्ट नहीं है कि वह इस प्रक्रिया में कितना प्रभाव डाल पाएगा।
नोबेल पुरस्कार के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ऐसी चर्चाएं अभी समय से पहले हैं। उनके अनुसार, सबसे पहले शांति वार्ता का सफल होना आवश्यक है, इसके बाद ही किसी सम्मान या पुरस्कार पर विचार किया जा सकता है। मौलाना ने बताया कि पाकिस्तान की भूमिका फिलहाल केवल वार्ता के आयोजन स्थल तक सीमित है, हालाँकि वहां की राजनीतिक हस्तियां कुछ हद तक सक्रिय हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि नोबेल पुरस्कार जैसी प्रतिष्ठित मान्यता के लिए किसी देश की निर्णायक और प्रभावशाली भूमिका आवश्यक होती है, जो इस समय दिखाई नहीं दे रही है। इसलिये यह कहना कठिन है कि पाकिस्तान को इस पहल के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिलेगा या नहीं।