पंजाब नशा संकट: परगट सिंह ने गृह मंत्री शाह से माँगा 13 साल का हिसाब
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता परगट सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे के बीच 20 अक्टूबर 2026 को तीखा हमला बोलते हुए पूछा कि भाजपा के 13 साल के केंद्रीय शासन में पंजाब और अन्य राज्यों में नशीली दवाओं का कारोबार रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए। उन्होंने सवाल किया कि क्या शाह इतने वर्षों से राज्य में बिगड़ती नशे की स्थिति से अनजान थे, और यदि नहीं, तो जवाबदेही किसकी है।
परगट सिंह का एक्स पर हमला
परगट सिंह ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि केंद्र में भाजपा के 13 वर्षों के शासन के बाद गृह मंत्री अमित शाह पंजाब और अन्य राज्यों में बढ़ते नशे के संकट की जवाबदेही से नहीं बच सकते। उनकी यह प्रतिक्रिया उस वक्त आई जब शाह राज्य में नशे से पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने के लिए दौरे पर थे।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य की राजनीति में नशे का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है और आम आदमी पार्टी (AAP), भाजपा तथा कांग्रेस — तीनों दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।
शाह का पंजाब दौरा: तीन पीड़ित परिवारों से मुलाकात
गृह मंत्री अमित शाह ने अपने एक दिवसीय पंजाब दौरे में तीन स्थानों पर नशे से पीड़ित परिवारों से भेंट की। मानसा में उन्होंने नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मुलाकात कर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। उन्होंने घोषणा की कि केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की एक टीम बुधवार दोपहर 12 बजे तक झोटा के घर पहुँचकर मामले की जाँच शुरू करेगी।
इससे पहले शाह ने गुरदासपुर जिले के मारी पन्नू गाँव में विक्रमजीत सिंह के परिवार से भी मुलाकात की। कथित तौर पर विक्रमजीत की हत्या नशा तस्करी से जुड़े लोगों ने की थी। परिवार ने इस दौरान गृह मंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा।
संगरूर जिले के तूर बंजारा गाँव में शाह ने गुलजार सिंह के परिजनों से मुलाकात की। गुलजार सिंह ने कथित तौर पर 'चिट्टे' के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली थी।
AAP सरकार की पलटवार
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार और अमित शाह पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि राज्य सरकार की बार-बार अपील के बावजूद भाजपा और कांग्रेस शासित राज्यों में नशीली दवाओं के निर्माण से जुड़ी फार्मा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब AAP सरकार ने नशे के स्रोत को अन्य राज्यों में दवा निर्माताओं से जोड़ने की कोशिश की है।
20 दिनों में शाह का दूसरा दौरा
यह अमित शाह का 20 दिनों के भीतर पंजाब का दूसरा दौरा है। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने पंजाब सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य में नशे का कारोबार नियंत्रण से बाहर हो गया है। आलोचकों का कहना है कि शाह के लगातार दौरे राज्य में बड़े राजनीतिक हस्तक्षेप के संकेत हैं, विशेषकर जब 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं।
पंजाब में नशे की समस्या दशकों पुरानी है और इस मुद्दे पर केंद्र व राज्य के बीच जिम्मेदारी को लेकर बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।