पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर: दिलीप घोष का आरोप
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर है।
- दिलीप घोष ने ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- भाजपा का कहना है कि राज्य में माफिया गतिविधियाँ बढ़ी हैं।
- निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तारीखें घोषित की हैं।
- सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं।
खड़गपुर, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पूर्व राजनीतिक बयानबाजी में तेजी आई है। भाजपा के नेता दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
दिलीप घोष ने कहा कि ममता बनर्जी या उनके परिवार का कोई सदस्य स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग स्वतंत्रता संघर्ष में शामिल हुए, वे हमारे इतिहास का अभिन्न अंग हैं। भाजपा उस समय अस्तित्व में नहीं थी, इसलिए उसकी भूमिका पर संदेह करना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) उस समय सक्रिय था और इसके संस्थापक डॉ. हेडगेवार स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदार रहे, उन्हें भी जेल जाना पड़ा था।
इसके अलावा, दिलीप घोष ने राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई। उनका आरोप है कि बंगाल में बड़े पैमाने पर घुसपैठ हो रही है, सोने की तस्करी से लेकर मवेशी तस्करी तक, सभी गतिविधियाँ अपने चरम पर हैं। राज्य में माफिया गतिविधियों में काफी वृद्धि हुई है और कानून-व्यवस्था सदैव से एक बड़ी समस्या रही है।
दिलीप घोष ने यह भी बताया कि जब हाईवे का निर्माण हो रहा था, तब स्थानीय स्तर पर विरोध हुआ और कई कठिनाइयों के बाद यह परियोजना पूरी हो सकी। उन्होंने इसे राज्य में विकास कार्यों में बाधा डालने का एक उदाहरण बताया।
भाजपा नेता ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बंगाल में मंत्रियों और अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती। यहां तक कि केंद्रीय अधिकारियों को भी अपनी सुरक्षा के लिए बीएसएफ और सीआईएसएफ पर निर्भर रहना पड़ता है।
यह ध्यान देने योग्य है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जाएंगे। पहला चरण 23 अप्रैल को होगा, जिसमें 152 सीटों पर मतदान होगा, और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा, जिसमें 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे।
चुनाव आयोग ने 15 मार्च को इस कार्यक्रम की घोषणा की थी। दोनों चरणों के वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी।