क्या पटना की सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी मामले में आरोपियों को सजा सुनाई?

Click to start listening
क्या पटना की सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी मामले में आरोपियों को सजा सुनाई?

सारांश

पटना की सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी मामले में राणा अशोक और अनिल कुमार को सजा सुनाई। जानिए इस मामले की पूरी कहानी और अदालत के निर्णय के पीछे की बातें।

Key Takeaways

  • पटना की सीबीआई अदालत ने दो आरोपियों को सजा सुनाई।
  • राणा अशोक कुमार सिंह को 3 साल की सजा मिली।
  • अनिल कुमार श्रीवास्तव को 1.5 साल की सजा दी गई।
  • जुर्माना 7 लाख और 17,500 रुपए किया गया।
  • मामला 1996 से चल रहा था।

पटना, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। पटना की सीबीआई अदालत ने एक बैंक धोखाधड़ी मामले में दो आरोपियों, राणा अशोक कुमार सिंह और अनिल कुमार श्रीवास्तव, को सजा सुनाई है। अदालत ने एक आरोपी पर 7 लाख और दूसरे पर 17 हजार 500 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

सीबीआई के अनुसार, आरोपी राणा अशोक कुमार सिंह उर्फ दीना सिंह को तीन साल की सजा सुनाई गई है, जबकि उस पर 7 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। दूसरी ओर, अनिल कुमार श्रीवास्तव को डेढ़ साल की सजा और 17,500 रुपए का जुर्माना दिया गया है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 7 फरवरी 1996 को इलाहाबाद बैंक के प्रबंधक की शिकायत पर राणा अशोक कुमार सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने 1991 में 3,59,000 रुपए के जाली/नकली राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) गिरवी रखकर पटना के इलाहाबाद बैंक से 2,60,000 रुपए का लोन प्राप्त किया।

जांच में पता चला कि राणा अशोक कुमार सिंह ने कुछ अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर जाली एनएससी तैयार किए और इलाहाबाद बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक शशि भूषण पांडे की मिलीभगत से इन जाली एनएससी के आधार पर 2,60,000 रुपए का लोन हासिल किया।

अभियुक्तों ने एक प्रेस में कार्यरत कर्मचारी की मदद से जाली एनएससी तैयार किए थे। राणा अशोक कुमार के आवासीय परिसर से एक प्रिंटिंग मशीन भी बरामद की गई, जिसका इस्तेमाल एनएससी को विशिष्ट नंबर देने के लिए किया गया था। पटना के जोनल कार्यालय द्वारा कोलकाता मुख्यालय को भेजे गए लोन प्रस्ताव में पत्र धारक के कार्य को शीघ्र पूरा करने की सिफारिश की गई थी।

इसके बाद सीबीआई ने 30 अप्रैल 1998 को राणा अशोक कुमार सिंह उर्फ दीना सिंह, अनिल कुमार श्रीवास्तव, गंगा सागर, इलाहाबाद बैंक के शाखा प्रबंधक शशि भूषण पांडे और इलाहाबाद बैंक के अधिकारी बिंदेश्वरी सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने दो अभियुक्तों, गंगा सागर और बिंदेश्वरी सिंह (इलाहाबाद बैंक के अधिकारी), को इस आधार पर बरी कर दिया कि वे आपराधिक साजिश में शामिल नहीं थे और न ही उन्होंने बैंक के साथ धोखाधड़ी की, जबकि अन्य अभियुक्त शशि भूषण पांडे (शाखा प्रबंधक, इलाहाबाद बैंक पटना) का मुकदमे के दौरान निधन हो गया था।

सीबीआई अदालत ने अन्य दो अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।

Point of View

मैं यह मानता हूँ कि न्याय का यह निर्णय हमारे समाज में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि ऐसे मामलों में सख्त सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह के अपराध करने की सोच भी न सके।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

राणा अशोक कुमार सिंह को कितनी सजा मिली?
राणा अशोक कुमार सिंह को तीन साल की सजा सुनाई गई है।
अनिल कुमार श्रीवास्तव पर कितना जुर्माना लगाया गया?
अनिल कुमार श्रीवास्तव पर 17,500 रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
सीबीआई ने कब मामला दर्ज किया था?
सीबीआई ने 7 फरवरी 1996 को मामला दर्ज किया था।
इस मामले में अन्य आरोपी कौन हैं?
इस मामले में अन्य आरोपी हैं गंगा सागर, शशि भूषण पांडे और बिंदेश्वरी सिंह।
क्या अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराया?
नहीं, अदालत ने गंगा सागर और बिंदेश्वरी सिंह को बरी कर दिया।