पटना में ड्रग तस्करी का भंडाफोड़: 158 ग्राम स्मैक और प्रतिबंधित 500 के 90 नोट सहित तीन गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- पटना के रूपसपुर में 23 अप्रैल को पुलिस छापे में 158 ग्राम स्मैक बरामद, तीन तस्कर गिरफ्तार।
- गिरफ्तार आरोपी: अभिमन्यु सिंह, राज नारायण चौबे और सुरेश कुमार सिंह।
- भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित 500 रुपये के 90 पुराने नोट भी जब्त — नोटबंदी के बाद से अवैध।
- चार मोबाइल फोन, चार एटीएम कार्ड और 9,000 रुपये नकद भी बरामद।
- पिछले तीन महीनों में पटना पुलिस ने 45 करोड़ रुपये से अधिक के नशीले पदार्थ जब्त किए।
- 6 अप्रैल को हुई कार्रवाई में 9,370 यूनिट नशीले इंजेक्शन और 5,537 यूनिट कोडीन कफ सिरप भी पकड़े गए थे।
पटना, 23 अप्रैल — बिहार की राजधानी पटना के रूपसपुर थाना क्षेत्र में बुधवार को पुलिस ने एक बड़े ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश किया। न्यू शिवाजी नगर, दीघा-खगौल नहर रोड स्थित एक मकान पर छापा मारकर पुलिस ने 158 ग्राम स्मैक, भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित 500 रुपये के 90 नोट और तीन तस्करों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई शहर में तेजी से पसरते नशे के कारोबार पर पुलिस का सीधा प्रहार मानी जा रही है।
छापेमारी का पूरा घटनाक्रम
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि रूपसपुर थाना अंतर्गत एक आवासीय मकान में नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त का अवैध कारोबार चल रहा है। सूचना की पुष्टि होते ही पुलिस दल ने मकान की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया।
नगर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) भानु प्रताप सिंह ने बताया कि छापेमारी में 158 ग्राम स्मैक, चार मोबाइल फोन, चार एटीएम कार्ड और 9,000 रुपये नकद बरामद किए गए। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा नवंबर 2016 में विमुद्रीकरण के बाद प्रतिबंधित घोषित किए गए 500 रुपये के 90 पुराने नोट भी जब्त किए गए, जो इस गिरोह की संदिग्ध गतिविधियों की एक और परत उजागर करते हैं।
गिरफ्तार तस्करों की पहचान
मौके से गिरफ्तार तीनों आरोपियों की पहचान अभिमन्यु सिंह, राज नारायण चौबे और सुरेश कुमार सिंह के रूप में हुई है। तीनों के विरुद्ध रूपसपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
पुलिस इन तीनों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह स्मैक कहां से आती थी, इसकी आपूर्ति-श्रृंखला कितनी बड़ी है और इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं।
पटना में नशा विरोधी अभियान की व्यापक तस्वीर
पटना पुलिस का दावा है कि पिछले तीन महीनों में नशा विरोधी अभियान के तहत 45 करोड़ रुपये से अधिक के नशीले पदार्थ जब्त किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि राजधानी में ड्रग तस्करी का जाल कितना गहरा है।
6 अप्रैल को भी गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई में पुलिस ने 9,370 यूनिट नशीले इंजेक्शन और 5,537 यूनिट कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद किए थे। उस खेप में एंटीबायोटिक और एंटी-वेनम दवाएं भी शामिल थीं, जो दर्शाती हैं कि तस्कर अब दवाइयों की आड़ में भी नशे का कारोबार चला रहे हैं।
प्रतिबंधित नोटों की बरामदगी — छिपा हुआ पहलू
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य 500 रुपये के 90 पुराने प्रतिबंधित नोटों की बरामदगी है। नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद इन नोटों को कानूनी निविदा से बाहर कर दिया गया था। इतने वर्षों बाद भी इन नोटों का तस्करों के पास मिलना यह संकेत देता है कि यह गिरोह काले धन के पुराने भंडार से जुड़ा हो सकता है या अवैध लेनदेन में इन्हें चलाने की कोशिश कर रहा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंधित नोटों और नशीले पदार्थों का एक साथ मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि यह महज स्थानीय तस्करी नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक ढांचे का हिस्सा हो सकता है।
आगे की जांच और संभावित दिशा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन और एटीएम कार्ड की फोरेंसिक जांच से नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। यह भी जांचा जा रहा है कि क्या इस गिरोह के तार बिहार के बाहर किसी बड़े तस्करी नेटवर्क से जुड़े हैं।
पटना पुलिस का नशा विरोधी अभियान जारी रहेगा और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।