पीएम गतिशक्ति NMP के तहत ₹18.66 लाख करोड़ की 396 परियोजनाओं की निगरानी, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिली नई गति
सारांश
मुख्य बातें
पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (NMP) के अंतर्गत 11 अगस्त 2026 तक ₹18.66 लाख करोड़ के निवेश वाली 396 बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ शामिल की जा चुकी हैं। केंद्र सरकार द्वारा सोमवार को जारी फैक्टशीट के अनुसार, इनमें से 256 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है और 198 परियोजनाएँ अभी क्रियान्वयन के चरण में हैं।
योजना का डिजिटल आधार
पीएम गतिशक्ति की संस्थागत संरचना एक अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर टिकी है, जो योजनाकारों को भू-स्थानिक डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और विश्लेषणात्मक उपकरण उपलब्ध कराता है। यह प्लेटफॉर्म आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी अवसंरचना के साथ जोड़कर समेकित योजना निर्माण को सक्षम बनाता है।
12 अक्टूबर 2026 तक इस साझा GIS-आधारित प्लेटफॉर्म पर 23,493 से अधिक डेटा लेयर उपलब्ध हो चुकी हैं और 230 स्वीकृत डेटासेट सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध हैं। इनका उपयोग साइट चयन, कनेक्टिविटी मैपिंग, अलाइनमेंट प्लानिंग और अनुपालन जाँच के लिए किया जा सकता है।
आर्थिक क्षेत्रों को जोड़ने की रणनीति
राष्ट्रीय मास्टर प्लान आर्थिक क्षेत्रों, सामाजिक केंद्रों और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को एक मानचित्र पर एकीकृत रूप से प्रस्तुत करता है, जिससे उन कनेक्टिविटी कमियों की पहचान की जाती है जो लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही में बाधा बनती हैं। टेक्सटाइल क्लस्टर, फार्मास्यूटिकल हब, रक्षा गलियारे, इलेक्ट्रॉनिक्स पार्क, औद्योगिक गलियारे, मत्स्य क्लस्टर और कृषि क्षेत्र जैसे आर्थिक जोन भी इस एकीकृत योजना में सम्मिलित हैं।
उदाहरण के तौर पर, बिहार के खगड़िया-पूर्णिया कॉरिडोर को पाँच पीएम गतिशक्ति आर्थिक नोड्स — जिनमें टेक्सटाइल क्लस्टर, मेगा फूड पार्क और फिशिंग/सीफूड पार्क शामिल हैं — से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसके अतिरिक्त 11 लॉजिस्टिक्स नोड्स को भी इस कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा, जिससे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही में उल्लेखनीय तेज़ी आने की उम्मीद है।
छह सिद्धांत और सात इंफ्रास्ट्रक्चर इंजन
पीएम गतिशक्ति छह प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित है — एकीकृत विकास, मल्टीमॉडल अवसंरचना, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, भूमि अधिग्रहण में तेज़ी, न्यूनतम मंजूरियाँ और पर्यावरणीय प्रभाव में कमी। इस ढाँचे को संचालित करने वाले सात मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर इंजन हैं — सड़क, रेलवे, बंदरगाह, जलमार्ग, हवाई अड्डे, मास ट्रांजिट और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना।
गौरतलब है कि इस योजना की नींव 13 अक्टूबर 2021 को रखी गई थी — अर्थात् पाँच वर्षों में यह पहल एक देशव्यापी योजना ढाँचे के रूप में पूरी तरह विकसित हो चुकी है।
व्यापक भागीदारी और समन्वय
राष्ट्रीय मास्टर प्लान में 58 केंद्रीय मंत्रालय और विभाग तथा देश के सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। सरकार का तर्क है कि सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, जलमार्ग और उपयोगिता सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय से लागत और निर्माण समय दोनों में बचत होती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत इतिहास के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार कार्यक्रमों में से एक को क्रियान्वित कर रहा है।
आगे की राह
क्रियान्वयन के चरण में चल रही 198 परियोजनाओं की प्रगति और शेष परियोजनाओं की मंजूरी की गति यह तय करेगी कि यह महत्वाकांक्षी ढाँचा ज़मीन पर कितना प्रभावी साबित होता है। डेटा लेयर और डिजिटल उपकरणों का विस्तार जारी रहने से निर्णय प्रक्रिया अधिक साक्ष्य-आधारित होने की संभावना है।