13 अक्टूबर 2026
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पीएम गतिशक्ति के 5 साल: ₹20.23 लाख करोड़ की 421 परियोजनाओं का मूल्यांकन, 1,800 से अधिक डेटा लेयर जुड़ीं

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पीएम गतिशक्ति के 5 साल: ₹20.23 लाख करोड़ की 421 परियोजनाओं का मूल्यांकन, 1,800 से अधिक डेटा लेयर जुड़ीं

सारांश

पाँच वर्षों में पीएम गतिशक्ति एक डिजिटल मानचित्र से आगे निकलकर ₹20.23 लाख करोड़ की 421 परियोजनाओं के मूल्यांकन का राष्ट्रीय ढाँचा बन गया है — 58 मंत्रालय, 36 राज्य और 1,800 डेटा लेयर एक प्लेटफॉर्म पर।

मुख्य बातें

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान ने 13 अक्टूबर 2026 को अपने पाँच वर्ष पूरे किए।
नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप ने अब तक ₹20.23 लाख करोड़ मूल्य की 421 बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का मूल्यांकन किया।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 1,800 से अधिक डेटा लेयर , 58 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एकीकृत किया गया।
65 से अधिक सॉफ्टवेयर टूल और 100 से अधिक मोबाइल/वेब एप्लिकेशन विकसित एवं एकीकृत।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एकीकृत परिवहन और संचालन प्राधिकरण को मंज़ूरी दी।
फरवरी 2026 तक 352 परियोजनाएँ मूल्यांकित; वर्ष 2026 के अंत तक संख्या 421 पहुँची।

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PMGS-NMP) ने 13 अक्टूबर 2026 को अपने पाँच वर्ष पूरे किए। अक्टूबर 2021 में लॉन्च की गई इस महत्वाकांक्षी बुनियादी ढाँचा नियोजन पहल के तहत अब तक ₹20.23 लाख करोड़ मूल्य की 421 बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जा चुका है। यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को दी।

पाँच वर्षों में क्या हासिल हुआ

PMGS-NMP के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब तक 1,800 से अधिक डेटा लेयर एकीकृत की जा चुकी हैं, जिसमें 58 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त, 65 से अधिक सॉफ्टवेयर मॉड्यूल/टूल और 100 से अधिक मोबाइल तथा वेब एप्लिकेशन विकसित एवं एकीकृत किए गए हैं, जिनसे पूरे देश में डेटा-आधारित बुनियादी ढाँचा नियोजन को मज़बूती मिली है।

नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप की भूमिका

नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) ने PMGS-NMP के सिद्धांतों के आधार पर ₹20.23 लाख करोड़ की 400 से अधिक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का मूल्यांकन किया है। इस मूल्यांकन ढाँचे में बहु-माध्यमीय बुनियादी ढाँचे की एकीकृत योजना, आर्थिक एवं सामाजिक केंद्रों तक अंतिम छोर की संपर्क सुविधा, अंतर-माध्यमीय संपर्क, संचालन दक्षता में सुधार और परियोजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया है। यह ढाँचा सरकार के समग्र दृष्टिकोण को संस्थागत रूप देने का काम करता है।

वर्षवार प्रगति

मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2022-23 में बुनियादी ढाँचे से जुड़े आठ प्रमुख मंत्रालयों को इस योजना में शामिल किया गया और 71 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया। वर्ष 2023-24 में 1,463 डेटा लेयर और सभी 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जोड़ते हुए सामाजिक क्षेत्र का एकीकरण किया गया।

वर्ष 2024-25 में आर्थिक क्षेत्र का एकीकरण हुआ, जिला मास्टर प्लान की शुरुआत की गई और 121 परियोजनाओं का मूल्यांकन संपन्न हुआ। वर्ष 2025-26 में PMGS पब्लिक प्लेटफॉर्म, यूजीआई, केएमएस, डीयूएमएस और डैशबोर्ड सेवाएँ शुरू की गईं, और फरवरी 2026 तक 352 परियोजनाओं का मूल्यांकन पूरा हो चुका था।

डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार

वर्ष 2026 तक पहुँचते-पहुँचते PMGS-NMP ने एकीकृत राष्ट्रीय नियोजन ढाँचे से आगे बढ़कर बुनियादी ढाँचे और क्षेत्रीय विकास के लिए एक व्यापक भू-स्थानिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर लिया है। गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एकीकृत परिवहन और संचालन प्राधिकरण को भी मंज़ूरी दे दी है — जो डेटा-आधारित नियोजन के संस्थागतकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आगे की राह

डेटा एकीकरण, संस्थागत समन्वय, परियोजनाओं के मूल्यांकन और जिला स्तर पर नियोजन के माध्यम से यह पहल बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए एक और अधिक एकीकृत दृष्टिकोण को निरंतर समर्थन देती रहेगी। आने वाले वर्षों में जिला मास्टर प्लान के विस्तार और नए डिजिटल टूल के एकीकरण के साथ इस प्लेटफॉर्म की पहुँच और गहरी होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि मूल्यांकित ₹20.23 लाख करोड़ की परियोजनाओं में से कितनी समय पर पूरी हुईं और उनसे नागरिकों को वास्तविक संपर्क सुविधा मिली। डेटा लेयर और डिजिटल टूल की बढ़ती संख्या नियोजन को बेहतर बना सकती है, लेकिन भारत में बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में देरी और लागत-वृद्धि की पुरानी समस्या बनी रहती है। एकीकृत परिवहन प्राधिकरण की मंज़ूरी एक सकारात्मक संस्थागत कदम है, परंतु इसके क्रियान्वयन का खाका सार्वजनिक नहीं हुआ है। बिना पारदर्शी परिणाम-रिपोर्टिंग के, यह मंच नियोजन का उपकरण तो बनेगा, लेकिन जवाबदेही का नहीं।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान क्या है?
पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान अक्टूबर 2021 में लॉन्च की गई केंद्र सरकार की एक डिजिटल बुनियादी ढाँचा नियोजन पहल है, जो सभी मंत्रालयों और राज्यों के बुनियादी ढाँचा डेटा को एक साझा प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करती है। इसका उद्देश्य परियोजनाओं की एकीकृत योजना, समन्वय और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।
पाँच वर्षों में पीएम गतिशक्ति ने कितनी परियोजनाओं का मूल्यांकन किया?
13 अक्टूबर 2026 तक पीएम गतिशक्ति के तहत ₹20.23 लाख करोड़ मूल्य की 421 बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जा चुका है। इनमें सड़क, रेल, बंदरगाह, ऊर्जा और सामाजिक क्षेत्र की परियोजनाएँ शामिल हैं।
पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म पर कितने राज्य और मंत्रालय जुड़े हैं?
अब तक 58 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इसके साथ 1,800 से अधिक डेटा लेयर, 65 से अधिक सॉफ्टवेयर टूल और 100 से अधिक मोबाइल व वेब एप्लिकेशन एकीकृत हैं।
नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की पीएम गतिशक्ति में क्या भूमिका है?
नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप पीएम गतिशक्ति के सिद्धांतों के आधार पर बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का मूल्यांकन करता है। यह बहु-माध्यमीय एकीकरण, अंतिम छोर की संपर्क सुविधा और परियोजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित करते हुए सरकार के समग्र नियोजन दृष्टिकोण को संस्थागत रूप देता है।
पीएम गतिशक्ति में जिला मास्टर प्लान कब शुरू हुआ?
जिला मास्टर प्लान वर्ष 2024-25 में आरंभ किया गया, जब आर्थिक क्षेत्र का एकीकरण भी किया गया था। इस चरण में 121 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया और नियोजन को ज़िला स्तर तक विस्तारित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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