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PM किसान सम्मान निधि: चमोली के 48,275 किसानों को सालाना ₹6,000 की राहत, खेती की लागत हो रही कम

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PM किसान सम्मान निधि: चमोली के 48,275 किसानों को सालाना ₹6,000 की राहत, खेती की लागत हो रही कम

सारांश

उत्तराखंड के चमोली जिले में PM-KISAN योजना ने 48,275 किसानों को आर्थिक सहारा दिया है। सालाना ₹6,000 की तीन किस्तें सीधे खाते में — बीज, खाद और कृषि ज़रूरतों के लिए। पर्वतीय किसानों के लिए यह छोटी राशि बड़ी राहत बन रही है।

मुख्य बातें

उत्तराखंड के चमोली जनपद में 48,275 किसान PM-KISAN योजना से लाभान्वित हो रहे हैं।
पात्र किसानों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की सहायता राशि तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खाते में मिलती है।
लाभार्थी किसान मालती के अनुसार, यह राशि बीज और खाद जैसी कृषि ज़रूरतों की पूर्ति में सहायक है।
किसानों का कहना है कि योजना से खेती की लागत का बोझ कुछ हद तक कम हुआ है।
सीमांत और पर्वतीय क्षेत्रों में यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने में भूमिका निभा रही है।

उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक संबल बनकर उभरी है। जिले के 48,275 किसान इस योजना से जुड़े हुए हैं और प्रतिवर्ष ₹6,000 की सहायता राशि सीधे अपने बैंक खाते में प्राप्त कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस धनराशि से बीज, खाद और कृषि कार्यों में ज़रूरी सामग्री खरीदने में मदद मिल रही है।

योजना का लाभ और किसानों की प्रतिक्रिया

योजना की लाभार्थी मालती ने बताया कि उन्हें हर वर्ष तीन समान किस्तों में ₹6,000 की राशि सीधे खाते में मिलती है। उन्होंने कहा कि इस धनराशि से बीज और खाद जैसी कृषि ज़रूरतों की पूर्ति होती है, जिससे खेती करने में काफी सुविधा मिलती है। मालती ने यह भी जोड़ा कि यह योजना छोटे किसानों को खेती जारी रखने में सहायक है और इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया।

योजना की संरचना और उद्देश्य

केंद्र सरकार की PM-KISAN योजना के तहत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की सहायता राशि तीन समान किस्तों में प्रदान की जाती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में स्थानांतरित होती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है। गौरतलब है कि यह योजना किसानों को कृषि आदान जैसे बीज, उर्वरक और सिंचाई के लिए तात्कालिक आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।

चमोली में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

उत्तराखंड का चमोली जनपद पर्वतीय और सीमांत भौगोलिक स्थिति के कारण कृषि कार्यों में विशेष चुनौतियों का सामना करता है। यहाँ के किसानों के अनुसार, PM-KISAN की किस्त से खेती की लागत का बोझ कुछ हद तक कम हुआ है और कृषि कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने में सहायता मिल रही है। जिले के किसानों का मानना है कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को भी नई मज़बूती दे रही है।

आगे की राह

केंद्र सरकार की इस योजना से जुड़े किसान चाहते हैं कि सहायता राशि में और वृद्धि हो ताकि बढ़ती कृषि लागत का समुचित मुकाबला किया जा सके। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि उत्पादन पर जलवायु परिवर्तन का असर भी बढ़ रहा है। PM-KISAN जैसी योजनाओं की निरंतरता और विस्तार सीमांत किसानों की आजीविका सुरक्षा के लिए अहम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹6,000 प्रतिवर्ष यानी प्रतिदिन महज़ ₹16.40 — जो बढ़ती कृषि लागत, महँगे उर्वरक और जलवायु-जनित नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। चमोली जैसे पर्वतीय जिलों में, जहाँ खेती पहले से ही भौगोलिक बाधाओं से जूझती है, यह राशि एक प्रतीकात्मक सहायता से अधिक नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार इस राशि को वास्तविक कृषि लागत से जोड़कर समय-समय पर संशोधित करेगी — या यह योजना सिर्फ़ आँकड़ों में 'लाभार्थी' गिनने तक सीमित रहेगी।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM किसान सम्मान निधि योजना क्या है?
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसके तहत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खाते में दी जाती है। इसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को कृषि आदान खरीदने में मदद करना है।
चमोली जिले में PM-KISAN योजना से कितने किसान लाभान्वित हो रहे हैं?
उत्तराखंड के चमोली जनपद में 48,275 किसान PM-KISAN योजना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। ये किसान सालाना ₹6,000 की राशि बीज, खाद और अन्य कृषि ज़रूरतों के लिए उपयोग कर रहे हैं।
PM-KISAN की किस्त कितने समय पर मिलती है और राशि कितनी होती है?
PM-KISAN के तहत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की राशि तीन समान किस्तों में दी जाती है, यानी हर चार महीने पर ₹2,000 सीधे बैंक खाते में स्थानांतरित होते हैं। यह प्रक्रिया डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से होती है।
PM-KISAN योजना से किसानों को किस तरह की मदद मिल रही है?
किसानों के अनुसार, इस योजना से मिलने वाली राशि से बीज, उर्वरक और कृषि कार्यों में ज़रूरी सामग्री खरीदने में सुविधा होती है। चमोली की किसान मालती ने बताया कि इससे खेती की लागत का बोझ कुछ हद तक कम हुआ है और सीमांत क्षेत्रों में खेती जारी रखना आसान हुआ है।
PM-KISAN योजना का पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों पर क्या प्रभाव है?
चमोली जैसे पर्वतीय जिलों में, जहाँ भौगोलिक बाधाओं के कारण कृषि पहले से चुनौतीपूर्ण है, PM-KISAN की किस्त किसानों को आर्थिक सहारा देती है। किसानों का मानना है कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र दोनों को मज़बूती प्रदान कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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