पीएम किसान सम्मान निधि योजना 2030-31 तक बढ़ाई गई, हरियाणा के किसानों ने किया स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को 2030-31 तक जारी रखने का निर्णय लिया है, जिससे देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों को अगले कई वर्षों तक प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता मिलती रहेगी। हरियाणा के हांसी जिले के किसानों ने इस फैसले का खुलकर स्वागत किया है और इसे कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक कदम बताया है।
योजना की मुख्य विशेषताएँ
PM-KISAN योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की राशि तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। यह प्रक्रिया प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के माध्यम से संचालित होती है, जिससे किसी बिचौलिए की आवश्यकता नहीं पड़ती और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। यह राशि किसानों को बीज, खाद और अन्य कृषि आदानों की समय पर खरीद में सहायक होती है।
हरियाणा के किसानों की प्रतिक्रिया
हांसी के किसान रामफल ने कहा कि सरकार की यह योजना उनके जैसे किसानों के लिए बेहद उपयोगी है। उन्होंने बताया, 'हर साल मिलने वाली यह राशि खेती के छोटे-मोटे खर्च पूरे करने में मदद करती है। सरकार ने समय बढ़ाकर अच्छा काम किया है।'
किसान बेगा राम ने कहा, 'यह बहुत अच्छी बात है कि अन्नदाता को खेती करने के लिए जरूरत पर सरकार पैसा देती है। सरकार ने योजना की समयसीमा को बढ़ाकर किसानों के हित में फैसला किया है।' वहीं किसान राजीव ने भी योजना के विस्तार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी बताया।
एक अन्य किसान अजय ने कहा, 'सरकार ने PM किसान सम्मान निधि योजना की समयसीमा को 2030-31 तक बढ़ाया है — यह सराहनीय कदम है। इसके लिए हम केंद्र सरकार को धन्यवाद व्यक्त करते हैं।'
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, DBT-आधारित यह योजना ग्रामीण उपभोग को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। 2030-31 तक विस्तार से न केवल कृषि उत्पादकता को बल मिलने की उम्मीद है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता भी बनी रहेगी। गौरतलब है कि यह योजना 2019 में लागू हुई थी और तब से अब तक करोड़ों किसान इसका लाभ उठा चुके हैं।
आगे की राह
योजना के 2030-31 तक विस्तार के साथ सरकार से यह अपेक्षा की जा रही है कि पात्रता सत्यापन और DBT प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि वास्तविक लाभार्थियों तक सहायता निर्बाध रूप से पहुँचती रहे।