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पीएम किसान योजना 2030-31 तक बढ़ी, ₹31 लाख करोड़ मंजूर; किसानों ने माँगी राशि में बढ़ोतरी

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पीएम किसान योजना 2030-31 तक बढ़ी, ₹31 लाख करोड़ मंजूर; किसानों ने माँगी राशि में बढ़ोतरी

सारांश

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने PM-KISAN योजना को 2030-31 तक बढ़ाते हुए ₹31 लाख करोड़ मंजूर किए। बिहार के किसानों ने फैसले का स्वागत किया, लेकिन ₹2,000 की किस्त को महंगाई के मद्देनज़र अपर्याप्त बताते हुए राशि बढ़ाने और योजना को स्थायी करने की माँग की।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने PM-KISAN योजना को 2026-27 से 2030-31 तक पाँच वर्षों के लिए बढ़ाने को मंजूरी दी।
विस्तार के लिए ₹31 लाख करोड़ का वित्तीय आवंटन स्वीकृत किया गया।
बिहार के 92% किसानों ने इस राशि का उपयोग सीधे कृषि कार्यों में किया — एक रिपोर्ट के अनुसार।
किसानों ने ₹2,000 प्रति किस्त को महंगाई के सामने अपर्याप्त बताया और राशि बढ़ाने की माँग की।
किसानों ने योजना को समय-सीमाबद्ध न रखकर स्थायी दर्जा देने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2026-27 से 2030-31 तक अगले पाँच वर्षों के लिए जारी रखने का निर्णय लिया है। इस विस्तार के लिए ₹31 लाख करोड़ के वित्तीय आवंटन को मंजूरी दी गई है। बिहार के किसानों ने इस फैसले का स्वागत किया है, साथ ही योजना को स्थायी दर्जा देने और प्रति किस्त राशि बढ़ाने की माँग भी उठाई है।

योजना का विस्तार: क्या बदला, क्या रहा

केंद्र सरकार के इस निर्णय के तहत लघु और सीमांत किसानों को प्रति वर्ष ₹6,000 (तीन समान किस्तों में ₹2,000 प्रत्येक) की सहायता राशि पूर्ववत जारी रहेगी। योजना की संरचना में कोई बदलाव नहीं किया गया है — केवल अवधि और कुल वित्तीय प्रतिबद्धता को बढ़ाया गया है। गौरतलब है कि यह योजना फरवरी 2019 में शुरू हुई थी और तब से करोड़ों किसान परिवारों को इसका लाभ मिलता आ रहा है।

किसानों की प्रतिक्रिया: स्वागत के साथ माँगें भी

सीतामढ़ी और आसपास के इलाकों के किसानों ने इस फैसले को सकारात्मक बताया। किसानों का कहना है कि इस राशि से वे खाद, बीज और अन्य कृषि आदानों की समय पर खरीद कर पाते हैं, जिससे खेती का चक्र सुचारु रहता है। एक किसान के अनुसार, 'इस योजना से हमें खेती करने में आसानी हुई है — खाद समय पर खरीद रहे हैं और इससे खेती समय पर हो पा रही है।'

हालाँकि, किसानों ने एकमत से यह भी कहा कि मौजूदा ₹2,000 प्रति किस्त की राशि बढ़ती महंगाई के सामने अपर्याप्त हो गई है। उनका तर्क है कि जिस तरह खाद, बीज और पेट्रोल के दाम बढ़ते हैं, उसी अनुपात में इस योजना की राशि भी बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि मध्यम वर्गीय किसान भी वास्तविक लाभ उठा सकें।

ज़मीनी असर: उत्पादकता और जीवनस्तर पर प्रभाव

किसानों का कहना है कि इस योजना ने छोटे किसानों की उत्पादकता और रहन-सहन दोनों पर सकारात्मक असर डाला है। एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के 92 प्रतिशत किसानों ने इस राशि का उपयोग सीधे कृषि कार्यों के लिए किया है — जो यह दर्शाता है कि योजना अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप काम कर रही है।

किसानों ने यह भी कहा कि इस योजना से एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी गया है — कि सरकार की प्राथमिकताओं में किसान शामिल हैं।

स्थायित्व की माँग

पाँच साल के विस्तार से उत्साहित किसानों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इस योजना को समय-सीमाबद्ध न रखकर स्थायी कर दिया जाए। उनका मानना है कि बार-बार नवीनीकरण की अनिश्चितता किसानों की दीर्घकालिक योजना को प्रभावित करती है।

आगे क्या

केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद योजना का क्रियान्वयन 2026-27 से निर्बाध रूप से जारी रहेगा। किसान संगठनों और विपक्षी दलों की ओर से राशि वृद्धि की माँग अब नीतिगत बहस का हिस्सा बन सकती है, विशेषकर आगामी बजट सत्र में।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि प्रति किसान वार्षिक ₹6,000 की राशि — जो 2019 से अपरिवर्तित है — बढ़ती कृषि लागत के सामने कितनी कारगर है। जब खाद, बीज और डीज़ल के दाम हर साल बढ़ते हैं, तो एक स्थिर नकद हस्तांतरण का वास्तविक मूल्य घटता जाता है। सरकार ने विस्तार तो दिया, पर राशि वृद्धि पर चुप्पी साधे रखी — यह चुप्पी ही अगले बजट में सबसे बड़ा राजनीतिक दबाव बिंदु बन सकती है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM-KISAN योजना को कब तक बढ़ाया गया है?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने PM-KISAN योजना को 2026-27 से 2030-31 तक, यानी अगले पाँच वर्षों के लिए जारी रखने का निर्णय लिया है। इस विस्तार के लिए ₹31 लाख करोड़ का वित्तीय आवंटन मंजूर किया गया है।
PM-KISAN योजना के तहत किसानों को कितनी राशि मिलती है?
इस योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 की सहायता राशि तीन समान किस्तों में दी जाती है — यानी हर चार महीने पर ₹2,000। यह राशि 2019 में योजना की शुरुआत से अपरिवर्तित है।
किसान राशि बढ़ाने की माँग क्यों कर रहे हैं?
किसानों का कहना है कि ₹2,000 प्रति किस्त बढ़ती महंगाई और कृषि आदानों — खाद, बीज, पेट्रोल — की बढ़ती कीमतों के सामने अपर्याप्त हो गई है। उनका तर्क है कि राशि को महंगाई दर के अनुपात में बढ़ाया जाना चाहिए।
बिहार के किसानों पर इस योजना का क्या असर हुआ है?
एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के 92% किसानों ने PM-KISAN की राशि का उपयोग सीधे कृषि कार्यों के लिए किया है। किसानों ने बताया कि इससे उत्पादकता बढ़ी है और रहन-सहन में भी सुधार आया है।
किसान योजना को स्थायी क्यों बनाने की माँग कर रहे हैं?
किसानों का मानना है कि बार-बार पाँच-पाँच साल के नवीनीकरण से अनिश्चितता बनी रहती है, जिससे दीर्घकालिक कृषि योजना प्रभावित होती है। वे चाहते हैं कि सरकार इसे समय-सीमाबद्ध न रखकर स्थायी दर्जा दे।
राष्ट्र प्रेस
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