पीएम किसान योजना 2030-31 तक बढ़ी, ₹31 लाख करोड़ मंजूर; किसानों ने माँगी राशि में बढ़ोतरी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2026-27 से 2030-31 तक अगले पाँच वर्षों के लिए जारी रखने का निर्णय लिया है। इस विस्तार के लिए ₹31 लाख करोड़ के वित्तीय आवंटन को मंजूरी दी गई है। बिहार के किसानों ने इस फैसले का स्वागत किया है, साथ ही योजना को स्थायी दर्जा देने और प्रति किस्त राशि बढ़ाने की माँग भी उठाई है।
योजना का विस्तार: क्या बदला, क्या रहा
केंद्र सरकार के इस निर्णय के तहत लघु और सीमांत किसानों को प्रति वर्ष ₹6,000 (तीन समान किस्तों में ₹2,000 प्रत्येक) की सहायता राशि पूर्ववत जारी रहेगी। योजना की संरचना में कोई बदलाव नहीं किया गया है — केवल अवधि और कुल वित्तीय प्रतिबद्धता को बढ़ाया गया है। गौरतलब है कि यह योजना फरवरी 2019 में शुरू हुई थी और तब से करोड़ों किसान परिवारों को इसका लाभ मिलता आ रहा है।
किसानों की प्रतिक्रिया: स्वागत के साथ माँगें भी
सीतामढ़ी और आसपास के इलाकों के किसानों ने इस फैसले को सकारात्मक बताया। किसानों का कहना है कि इस राशि से वे खाद, बीज और अन्य कृषि आदानों की समय पर खरीद कर पाते हैं, जिससे खेती का चक्र सुचारु रहता है। एक किसान के अनुसार, 'इस योजना से हमें खेती करने में आसानी हुई है — खाद समय पर खरीद रहे हैं और इससे खेती समय पर हो पा रही है।'
हालाँकि, किसानों ने एकमत से यह भी कहा कि मौजूदा ₹2,000 प्रति किस्त की राशि बढ़ती महंगाई के सामने अपर्याप्त हो गई है। उनका तर्क है कि जिस तरह खाद, बीज और पेट्रोल के दाम बढ़ते हैं, उसी अनुपात में इस योजना की राशि भी बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि मध्यम वर्गीय किसान भी वास्तविक लाभ उठा सकें।
ज़मीनी असर: उत्पादकता और जीवनस्तर पर प्रभाव
किसानों का कहना है कि इस योजना ने छोटे किसानों की उत्पादकता और रहन-सहन दोनों पर सकारात्मक असर डाला है। एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के 92 प्रतिशत किसानों ने इस राशि का उपयोग सीधे कृषि कार्यों के लिए किया है — जो यह दर्शाता है कि योजना अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप काम कर रही है।
किसानों ने यह भी कहा कि इस योजना से एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी गया है — कि सरकार की प्राथमिकताओं में किसान शामिल हैं।
स्थायित्व की माँग
पाँच साल के विस्तार से उत्साहित किसानों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इस योजना को समय-सीमाबद्ध न रखकर स्थायी कर दिया जाए। उनका मानना है कि बार-बार नवीनीकरण की अनिश्चितता किसानों की दीर्घकालिक योजना को प्रभावित करती है।
आगे क्या
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद योजना का क्रियान्वयन 2026-27 से निर्बाध रूप से जारी रहेगा। किसान संगठनों और विपक्षी दलों की ओर से राशि वृद्धि की माँग अब नीतिगत बहस का हिस्सा बन सकती है, विशेषकर आगामी बजट सत्र में।