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पीएम-किसान योजना 2030-31 तक जारी: ₹3.15 लाख करोड़ की मंजूरी, बिहार के किसानों को बड़ा लाभ

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पीएम-किसान योजना 2030-31 तक जारी: ₹3.15 लाख करोड़ की मंजूरी, बिहार के किसानों को बड़ा लाभ

सारांश

केंद्र सरकार ने पीएम-किसान योजना को 2030-31 तक जारी रखने के लिए ₹3.15 लाख करोड़ की मंजूरी दी है। जेडीयू सांसद कौशलेंद्र कुमार ने इसे बिहार समेत देशभर के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने वाला अहम फैसला बताया और कहा कि यह योजना उन्नत खेती की प्रेरणा भी देती है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने पीएम-किसान योजना को वर्ष 2030-31 तक बढ़ाने के लिए ₹3.15 लाख करोड़ की स्वीकृति दी।
जेडीयू सांसद कौशलेंद्र कुमार ने 1 अगस्त को इस निर्णय का स्वागत किया और इसे किसानों के हित में बताया।
सांसद के अनुसार, योजना बिहार सहित देशभर के किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में सहायक है।
उन्होंने कहा कि यह योजना केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि आधुनिक और उन्नत कृषि अपनाने की प्रेरणा भी देती है।
संसद में पप्पू यादव के विरोध प्रदर्शन पर कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि सदन में जनहित के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, विवादों को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए।

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना को वर्ष 2030-31 तक विस्तारित करने के लिए ₹3.15 लाख करोड़ की स्वीकृति दी है। इस निर्णय को जनता दल (यूनाइटेड) के नालंदा सांसद कौशलेंद्र कुमार ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए स्वागत किया है। उनके अनुसार, यह योजना देशभर में — विशेषकर बिहार के किसानों की — आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में निर्णायक भूमिका निभा रही है।

योजना का विस्तार और वित्तीय प्रावधान

सरकार द्वारा अनुमोदित ₹3.15 लाख करोड़ का यह आवंटन पीएम-किसान योजना को अगले कई वर्षों तक निर्बाध रूप से चलाने की प्रतिबद्धता दर्शाता है। इस योजना के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे बीज, खाद और सिंचाई जैसी कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकते हैं।

कौशलेंद्र कुमार का पक्ष

कौशलेंद्र कुमार ने 1 अगस्त को कहा कि पीएम-किसान योजना पहले से ही किसानों के लिए एक अहम आर्थिक आधार रही है और इसे 2031 तक जारी रखने का निर्णय किसान समुदाय के व्यापक हित में है। उन्होंने कहा, 'इस योजना से किसानों को आर्थिक संबल मिलता है और उनमें बेहतर खेती करने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी पैदा होती है।'

उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब एक किसान उन्नत खेती कर आगे बढ़ता है, तो आसपास के किसान भी बेहतर उत्पादन के लिए प्रेरित होते हैं। उनके मुताबिक, यह योजना केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों को आधुनिक और उन्नत कृषि पद्धतियाँ अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित करती है।

बिहार और देश के किसानों पर असर

कौशलेंद्र कुमार ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि बिहार सहित पूरे देश के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में यह योजना सहायक सिद्ध होगी। उनका तर्क है कि बेहतर उत्पादन से किसानों की आमदनी बढ़ेगी, जिसका प्रत्यक्ष लाभ देश की समग्र कृषि व्यवस्था को मिलेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार आगे भी किसान-हितैषी निर्णय लेती रहेगी।

संसद में विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के भगवा वस्त्र पहनकर प्रदर्शन करने पर कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, परंतु जनहित के मुद्दों को दरकिनार कर इस प्रकार के प्रदर्शन उचित नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है, जहाँ किसानों, सूखे, बाढ़, रोज़गार और जनसामान्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी सांसद ने सदन की गरिमा अथवा धार्मिक भावनाओं का अपमान किया है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

जनता की जवाबदेही पर जोर

कौशलेंद्र कुमार ने अंत में कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है। जो जनप्रतिनिधि जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य नहीं करते या केवल विवादों के माध्यम से राजनीति करते हैं, उन्हें जनता समय आने पर उचित जवाब देती है। आने वाले समय में पीएम-किसान योजना के क्रियान्वयन की गुणवत्ता और लाभार्थियों की संख्या इस नीतिगत प्रतिबद्धता की असली कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण वास्तव में कृषि उत्पादकता बढ़ा रहा है या केवल तात्कालिक राहत दे रहा है। बिहार जैसे राज्यों में जहाँ जोत का आकार अत्यंत छोटा है, वहाँ वार्षिक सहायता की सीमित राशि संरचनात्मक कृषि संकट का समाधान करने में पर्याप्त नहीं मानी जाती। आलोचकों का कहना है कि सिंचाई, भंडारण और बाज़ार संपर्क जैसी बुनियादी ज़रूरतों में निवेश के बिना केवल नकद सहायता से किसानों की दीर्घकालिक आय में टिकाऊ वृद्धि संभव नहीं है। योजना के विस्तार का वास्तविक मूल्यांकन लाभार्थियों की संख्या और उनकी आय में मापनीय बदलाव से होगा, न कि केवल आवंटित राशि से।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-किसान योजना को 2031 तक बढ़ाने के लिए कितनी राशि मंजूर की गई है?
केंद्र सरकार ने पीएम-किसान योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने के लिए ₹3.15 लाख करोड़ की स्वीकृति दी है। यह निर्णय किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता की निरंतरता सुनिश्चित करता है।
जेडीयू सांसद कौशलेंद्र कुमार ने इस फैसले पर क्या कहा?
नालंदा से जेडीयू सांसद कौशलेंद्र कुमार ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह योजना किसानों को आर्थिक संबल देने के साथ-साथ उन्नत खेती अपनाने की प्रेरणा भी देती है। उनके अनुसार, बिहार समेत पूरे देश के किसानों की आर्थिक स्थिति इससे मजबूत होगी।
पीएम-किसान योजना से बिहार के किसानों को क्या फायदा होगा?
कौशलेंद्र कुमार के अनुसार, यह योजना बिहार के किसानों को सीधी आर्थिक मदद देकर उन्हें बेहतर उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करती है। जब एक किसान उन्नत खेती से आगे बढ़ता है, तो आसपास के किसान भी बेहतर उत्पादन के लिए प्रेरित होते हैं, जिससे क्षेत्र की कृषि व्यवस्था समग्र रूप से मजबूत होती है।
कौशलेंद्र कुमार ने संसद में पप्पू यादव के विरोध प्रदर्शन पर क्या टिप्पणी की?
कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन जनहित के मुद्दों को छोड़कर इस तरह के प्रदर्शन उचित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संसद में किसानों, सूखे, बाढ़ और रोज़गार जैसे विषयों पर चर्चा होनी चाहिए।
पीएम-किसान योजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
पीएम-किसान (प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि) एक केंद्रीय योजना है जिसके तहत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य किसानों को बीज, खाद और सिंचाई जैसी कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायता करना और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करना है।
राष्ट्र प्रेस
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