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क्या पीएम मोदी का लेख आने वाली पीढ़ियों में जागरूकता और गर्व का संचार करेगा?: स्वामी अवधेशानंद गिरि

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क्या पीएम मोदी का लेख आने वाली पीढ़ियों में जागरूकता और गर्व का संचार करेगा?: स्वामी अवधेशानंद गिरि

सारांश

स्वामी अवधेशानंद गिरि ने पीएम मोदी के लेख को सराहा है, जो सोमनाथ के 1,000 वर्ष के स्मरण में लिखा गया है। यह लेख न केवल इतिहास की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्र के गौरव को भी जागृत करता है। जानिए इस लेख में क्या कहा गया है।

मुख्य बातें

सोमनाथ का इतिहास भारत की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।
पीएम मोदी का लेख आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
स्वामी अवधेशानंद गिरि ने लेख की सराहना की है।

नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने सोमवार को सोमनाथ के विध्वंस के 1,000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पीएम मोदी के लेख पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह लेख आने वाली पीढ़ियों में इतिहास-बोध और राष्ट्र-गौरव के जागरण का एक शक्तिशाली साधन बनेगा।

स्वामी अवधेशानंद गिरि ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "प्रधानमंत्री, आपका यह आलेख हमें स्मरण कराता है कि सोमनाथ केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का प्रतीक है।" उन्होंने कहा कि समय-समय पर आने वाले आक्रमणों के बावजूद, उस श्रद्धा और समर्पण ने इसे पुनर्जीवित किया, जो हमारी सभ्यता की अदम्य शक्ति का प्रतीक है।

उन्होंने यह भी कहा कि एक हजार साल पहले गजनी के महमूद ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था। यह आक्रमण हमारे मंदिर पर नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति पर था। तब से लेकर आज तक मंदिर के पुनर्निर्माण के कई प्रयास हुए हैं। लगभग 75 वर्ष पहले इसका पुनर्निर्माण संभव हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लेख हमारे गौरवशाली अतीत की याद दिलाता है।

प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और पद्म भूषण से सम्मानित श्री एम ने कहा कि सोमनाथ का ज्योतिर्लिंग शुद्ध प्रकाश से निर्मित है और इसे कोई भी नष्ट नहीं कर सकता। महमूद गजनी ने सोमनाथ को तोड़ा, लेकिन क्या इसे, जो स्वयं एक ज्योति है, नष्ट किया जा सकता है? हम आज भी गुजरात में सोम के भगवान को श्रद्धा के साथ नमन करते हैं। मैं प्रधानमंत्री मोदी के विचारों से सहमत हूं।

1299 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति अलाफ खान ने भी मंदिर को नष्ट किया और मूर्तियों के टुकड़े दिल्ली ले गए। कुछ वर्षों बाद हिंदू शासकों ने इसे पुनः स्थापित किया। 1394 में गुजरात के गवर्नर मुजफ्फर खान ने मंदिर को तोड़ा, और 1459 में महमूद बेगड़ा ने भी सोमनाथ को अपवित्र किया। इसके बावजूद, मंदिर किसी न किसी रूप में विद्यमान रहा।

ज्ञातव्य है कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाने के लिए गुजरात के सोमनाथ मंदिर में पूरे वर्ष कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि 8 से 11 जनवरी तक मंदिर परिसर में कई आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम होंगे। प्रधानमंत्री मोदी 11 जनवरी को इस कार्यक्रम में भाग लेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह लेख न केवल एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना को दर्शाता है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन सकता है। सोमनाथ का इतिहास भारत की संस्कृति और धरोहर का अभिन्न हिस्सा है, जो हमें अपने अतीत से जोड़ता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोमनाथ का महत्व क्या है?
सोमनाथ केवल एक तीर्थ स्थल नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा का प्रतीक है।
पीएम मोदी के लेख में क्या कहा गया है?
पीएम मोदी के लेख में सोमनाथ के इतिहास और उसकी पुनः स्थापना के प्रयासों का उल्लेख है।
स्वामी अवधेशानंद गिरि ने क्या कहा?
उन्होंने पीएम मोदी के लेख को आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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