क्या पीएम मोदी के सत्ता संभालते ही मंदिरों की दशा बदली?
सारांश
Key Takeaways
- सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है।
- पीएम मोदी ने इसके विकास पर जोर दिया है।
- संत समाज ने इस विषय पर समर्थन किया है।
- मंदिरों की सुरक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
- भारत की संस्कृति में मंदिरों की विशेष भूमिका है।
प्रयागराज, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात का सोमनाथ, जो द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल है, केवल आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमारे देश का गौरव और आत्मा भी है। लाखों भक्त यहाँ बाबा भोलेनाथ की पूजा करते हैं, लेकिन 1,000 वर्ष पहले इस धार्मिक स्थल की अखंडता को खतरे में डालने का प्रयास किया गया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर को करोड़ों वीर सनातनियों के स्वाभिमान और साहस का प्रतीक बताया है। उनके इस बयान का समर्थन देश के सभी संत समाज ने किया है और इस पर अपनी राय भी साझा की है।
जगतगुरु स्वामी महेशाश्रम जी महाराज ने कहा कि गुजरात के सोमनाथ मंदिर या जगन्नाथ पुरी, चारों धाम के मंदिरों का निर्माण स्वयं विश्कर्मा जी ने किया है और कोई भी उन मंदिरों को तोड़ने का साहस नहीं कर सकता। महमूद गजनवी ने मंदिर को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की, लेकिन हमारी आस्था अडिग रही है और यह सृष्टि के अंत तक ऐसे ही रहेगी।
अयोध्या के साधु संतों ने भी सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले के 1,000 वर्ष पूरे होने और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस पर लिखे गए लेख के प्रति अपनी प्रतिक्रिया दी है।
महामंडलेश्वर विष्णु दास ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता संभालते ही देश के सभी मंदिरों और सनातन धर्म का विकास हुआ है। सोमनाथ मंदिर 100 करोड़ लोगों की आस्था का प्रतीक है, जहाँ बाबा भोलेनाथ की आराधना की जाती है। कुछ समय पहले कुछ लोगों ने सोमनाथ मंदिर को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे।
उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी भी संत समान हैं और उन्होंने देश के सभी मंदिरों के विकास पर जोर दिया है। उनके द्वारा सोमनाथ मंदिर के बारे में जो कुछ कहा गया है, हम सभी उसका समर्थन करते हैं।
साकेत भवन मंदिर के सीताराम दास ने कहा कि निश्चित रूप से अफगानी महमूद गजनवी और आतंकवादियों द्वारा सनातन धर्म पर जो आक्रमण हुआ, उसके 1,000 वर्ष पूरे हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे लोगों के सामने लाया है, जो कि अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारे द्वादश ज्योतिर्लिंग सोमनाथ को सुरक्षित रखने में कई वीरों ने अपनी आहुति दी है और आस्था को बनाए रखा है। यह मंदिर केवल आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि कई वीरों की अमर गाथा भी है। देश उनके पराक्रम को हमेशा याद रखेगा।