क्या पीएम मोदी ने ईटानगर से बेंगलुरु तक युवाओं की स्वच्छता की अनूठी पहल को सराहा?

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क्या पीएम मोदी ने ईटानगर से बेंगलुरु तक युवाओं की स्वच्छता की अनूठी पहल को सराहा?

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में युवाओं द्वारा स्वच्छता के प्रति की जा रही अनूठी पहलों की सराहना की। उन्होंने ईटानगर और बेंगलुरु में सफाई के प्रयासों का उल्लेख किया, जो दर्शाते हैं कि स्वच्छता की भावना समाज में कैसे फैल रही है। क्या यह पहल हमारे समाज के लिए एक नया उदाहरण बनेगी?

Key Takeaways

  • युवाओं ने सफाई के प्रति जागरूकता बढ़ाई है।
  • ईटानगर में ११ लाख किलो कचरा हटाया गया।
  • स्वच्छता केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है।
  • हर नागरिक को स्वच्छता में योगदान देना चाहिए।
  • बेंगलुरु और चेन्नई में भी सफाई प्रयास चल रहे हैं।

नई दिल्ली, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' के १३०वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छता सदैव हमारे कार्यक्रम और जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि देश के युवा अपने आसपास की सफाई के प्रति कितने सजग हैं और अपने शहरों और गांवों को साफ-सुथरा बनाने में कितनी मेहनत कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर का उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि यह वह स्थान है जहां सबसे पहले सूर्य की किरणें पहुंचती हैं और वहां के लोग 'जय हिंद' कहकर एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं।

उन्होंने बताया कि ईटानगर में कुछ युवाओं ने साफ-सफाई के लिए एकजुट होकर काम शुरू किया, विशेषकर उन क्षेत्रों में जिन्हें अधिक ध्यान की आवश्यकता थी। धीरे-धीरे उनका अभियान नाहरलागुन, दोईमुख, सेप्पा, पालिन और पासीघाट तक फैल गया। इन युवाओं ने लगभग ११ लाख किलो कचरे की सफाई की है। यह सच में एक प्रेरणादायक प्रयास है।

प्रधानमंत्री ने असम के नागांव का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि वहां के लोग अपनी पुरानी गलियों के प्रति भावनात्मक रूप से जुड़े हैं। कुछ लोगों ने अपनी गलियों को साफ रखने का संकल्प लिया और धीरे-धीरे अन्य लोग भी जुड़ गए। इस प्रकार एक टीम बन गई, जिसने अपने इलाके से भारी मात्रा में कचरा हटाया और स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने का काम किया।

बेंगलुरु में भी ऐसे प्रयास हो रहे हैं। वहां सोफावेस्ट, यानी पुराने और बड़े फर्नीचर का कचरा, एक बड़ी समस्या बन गई थी। कुछ पेशेवरों ने मिलकर इसे सही तरीके से निपटाने का काम शुरू किया। इसी तरह, विभिन्न शहरों में टीमें लैंडफिल वेस्ट की रीसाइक्लिंग और सफाई में जुटी हैं। चेन्नई में भी एक टीम ने उत्कृष्ट कार्य किया है, जो दर्शाता है कि स्वच्छता हर जगह आवश्यक है और हर प्रयास का महत्व है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हम सभी को व्यक्तिगत रूप से या टीम बनाकर इसमें योगदान देना होगा। छोटे-छोटे प्रयास, चाहे गलियों की सफाई हो, सार्वजनिक स्थानों की सफाई हो या कचरे की रीसाइक्लिंग, सभी मिलकर हमारे शहरों और गांवों को बेहतर बनाते हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत का सपना तभी पूरा होगा जब हर नागरिक अपने हिस्से का योगदान देगा।

Point of View

यह महत्वपूर्ण है कि हम देखे कि स्वच्छता के प्रति यह जागरूकता केवल सरकारी पहल की नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग का योगदान है। यह युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वे अपने आसपास की सफाई को लेकर सजग रहें और इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
NationPress
09/02/2026

Frequently Asked Questions

ईटानगर में स्वच्छता अभियान कब शुरू हुआ?
ईटानगर में स्वच्छता अभियान हाल ही में शुरू हुआ, जब कुछ युवाओं ने मिलकर सफाई के लिए काम करना शुरू किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने किस शहर का उदाहरण दिया?
प्रधानमंत्री मोदी ने ईटानगर और असम के नागांव का उदाहरण दिया।
स्वच्छता का अभियान किस तरह से फैल रहा है?
स्वच्छता का अभियान धीरे-धीरे अन्य शहरों जैसे बेंगलुरु और चेन्नई में भी फैल रहा है।
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