पीएम मोदी की अगुवाई में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के लिए 28,840 करोड़ रुपए की मंजूरी

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पीएम मोदी की अगुवाई में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के लिए 28,840 करोड़ रुपए की मंजूरी

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संशोधित उड़ान योजना को मंजूरी दी, जिससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में एयर कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी। यह योजना रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगी।

Key Takeaways

  • प्रधानमंत्री मोदी की योजना से क्षेत्रीय हवाई संपर्क में वृद्धि होगी।
  • 28,840 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया गया।
  • टियर-2 और टियर-3 शहरों में नए हवाईअड्डे बनेंगे।
  • आत्मनिर्भर भारत को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • 100 नए हवाई अड्डों का विकास होगा।

नई दिल्ली, 25 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना- संशोधित उड़ान को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक दस वर्षों के लिए 28,840 करोड़ रुपए के कुल बजट के साथ अनुमोदित किया। यह राशि भारत सरकार के बजटीय सहयोग से उपलब्ध होगी। इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य उन क्षेत्रों में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को सुदृढ़ करना है जो कम सेवा प्राप्त करते हैं या जिनमें हवाई संपर्क नहीं है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "हमारी सरकार देशभर में एयर कनेक्टिविटी के तेज विस्तार के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में आज मॉडिफाइड उड़ान योजना को मंजूरी दी गई है। इसके तहत टियर-2 और टियर-3 शहरों में नए हवाई अड्डे और हेलीपैड विकसित किए जाएंगे। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रोजगार, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।"

योजना के महत्वपूर्ण प्रभावों में टियर-2 और टियर-3 शहरों में आर्थिक विकास, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा, आम नागरिकों के लिए सस्ती हवाई यात्रा, और दूरस्थ एवं पहाड़ी क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं तक बेहतर पहुंच शामिल हैं। इसके साथ ही क्षेत्रीय हवाई अड्डों की व्यवहार्यता बढ़ेगी और आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी एयरोस्पेस क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा। यह विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संशोधित उड़ान योजना के अंतर्गत हवाई अड्डों का विकास किया जाएगा। मौजूदा अनुपयोगी हवाई पट्टियों से 100 नए हवाई अड्डे विकसित किए जाएंगे। इसके लिए अगले आठ वर्षों में 12,159 करोड़ रुपए का पूंजीगत व्यय प्रस्तावित है। इससे भारत को विश्वस्तरीय विमानन इकोसिस्टम बनाने में सहायता मिलेगी।

हवाई अड्डों का संचालन एवं रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा। क्षेत्रीय हवाई अड्डों के निरंतर संचालन के लिए तीन वर्षों तक प्रति हवाई अड्डे 3.06 करोड़ रुपए प्रति वर्ष और प्रति हेलीपोर्ट 0.90 करोड़ रुपए प्रति वर्ष की सहायता प्रदान की जाएगी। कुल 441 हवाई अड्डों के लिए लगभग 2,577 करोड़ रुपए का प्रावधान है।

आधुनिक हेलीपैडों का विकास भी किया जाएगा। पहाड़ी, दूरस्थ, द्वीपीय और विकासशील क्षेत्रों में 200 आधुनिक हेलीपैड स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक हेलीपैड की लागत 15 करोड़ रुपए के हिसाब से कुल 3,661 करोड़ रुपए (मुद्रास्फीति समायोजित) खर्च होंगे। यह अंतिम-मील कनेक्टिविटी और आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ करेगा।

व्यवहार्यता गैप फंडिंग (वीजीएफ) का प्रावधान भी होगा। एयरलाइन संचालकों को 10 वर्षों में 10,043 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी ताकि क्षेत्रीय मार्गों का संचालन लाभदायक हो सके।

आत्मनिर्भर भारत के तहत विमान अधिग्रहण किया जाएगा। योजना के अंतर्गत पवन हंस के लिए दो एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर और एलायंस एयर के लिए दो एचएएल डोर्नियर विमान खरीदे जाएंगे। इससे छोटे विमानों की कमी दूर होगी और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

Point of View

जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
NationPress
25/03/2026

Frequently Asked Questions

संशोधित उड़ान योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य कम सेवा प्राप्त और सेवा से वंचित क्षेत्रों में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करना है।
इस योजना में कितनी राशि का प्रावधान किया गया है?
इस योजना के लिए 28,840 करोड़ रुपए का कुल बजट अनुमोदित किया गया है।
कब तक यह योजना लागू होगी?
यह योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू होगी।
इस योजना से क्या लाभ होगा?
इससे रोजगार, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, और सामान्य नागरिकों के लिए सस्ती हवाई यात्रा उपलब्ध होगी।
कितने नए हवाई अड्डे विकसित किए जाएंगे?
इस योजना के तहत 100 नए हवाई अड्डे विकसित किए जाएंगे।
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