प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: 11 वर्षों में लाखों लोगों का भविष्य बदला, उद्यमिता की नई दिशा
सारांश
Key Takeaways
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने 11 वर्षों में लाखों लोगों को आत्मनिर्भर बनाया है।
- इस योजना के तहत बिना गारंटी लोन प्रदान किया जाता है।
- महिलाओं को इस योजना का लगभग 70 प्रतिशत लाभ मिलता है।
- युवाओं को उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करने में यह योजना महत्वपूर्ण है।
- सैकड़ों छोटे व्यवसाय इस योजना के माध्यम से स्थापित हुए हैं।
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार ने 8 अप्रैल 2015 को मुद्रा योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य देश के बेरोजगारों, युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। 8 अप्रैल 2026 को इस योजना का 11 साल पूरा होगा। यह योजना बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को जॉब सीकर्स के बजाए जॉब क्रिएटर्स बनाने में बेहद सफल रही है। पिछले 11 वर्षों में इस योजना ने देश में करोड़ों युवा उद्यमियों का निर्माण किया है। इस अवधि में कुल 52.37 करोड़ खाते खोले गए और लगभग 33.65 लाख करोड़ रुपये का बिना गारंटी लोन प्रदान किया गया है। महिलाओं और वंचित वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण में यह योजना एक मील का पत्थर साबित हुई है। इस योजना के लगभग 70 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं, जबकि कुल लाभार्थियों में 50 प्रतिशत एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोग हैं।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के अंतर्गत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उठाए गए कदम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। ग्वालियर में एक ऐसी महिला व्यवसायी हैं, जो पहले घर के कामों के लिए नौकरी करती थीं, लेकिन अब उन्होंने स्वयं मुद्रा योजना से लोन लेकर एक बुटीक का व्यवसाय शुरू कर एक सफल उद्यमी बन गई हैं। इसके साथ ही, वह अन्य महिलाओं को भी रोजगार प्रदान कर रही हैं।
ग्वालियर के कंपू क्षेत्र की विनीता तोमर ने कुछ वर्षों तक नौकरी की, लेकिन उनका सपना आत्मनिर्भर होना था। आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें रुकावटों का सामना करना पड़ा। अंततः उन्होंने सेंट्रल बैंक से मुद्रा योजना के तहत लोन लेने का निर्णय लिया और आवेदन कर दिया।
विनीता कहती हैं, "बैंक से लोन लेने में कोई कठिनाई नहीं हुई। आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद, उनके दस लाख रुपये का लोन स्वीकृत हो गया। इसके बाद उन्होंने एक मॉल में अपना बुटीक शुरू किया, जो अब तीन वर्षों में पूरी तरह से स्थापित हो चुका है। वह अन्य महिलाओं को भी नौकरी दे रही हैं।"
विनिता ने आगे कहा, "प्रधानमंत्री मोदी द्वारा महिलाओं के लिए कई अच्छी योजनाएं शुरू की गई हैं, और उनमें से एक मुद्रा योजना है, जिसने उनके आत्मनिर्भर बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।"
इसी तरह, कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर में एक युवा ने मुद्रा लोन लेकर न केवल अपना व्यवसाय शुरू किया, बल्कि कई लोगों को भी रोजगार दिया है। बीर बहादुर धामी ने बताया, "10 महीने पहले मुद्रा योजना के तहत 1.95 लाख रुपये का लोन लेकर एक रेस्टोरेंट शुरू किया। सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने अपने जुनून और मेहनत से इसे सफल बना दिया।" उनका रेस्टोरेंट अब 10 लोगों को रोजगार दे रहा है।
इसके अलावा, झारखंड के गिरिडीह में भी छोटे कारोबारियों के लिए मुद्रा योजना एक सहारा बनी है। बिना गारंटी के मिले लोन से जिले में सैकड़ों दुकानें, सिलाई यूनिट्स, मिनरल वाटर प्लांट इत्यादि स्थापित हुए हैं। महिलाएं इस योजना के तहत अपने व्यवसाय को बढ़ाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
देवघर के आश्रम रोड की निवासी मुन्नी कुमारी ने प्रधानमंत्री के रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमजीईपी) और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत एक मिनरल वाटर प्लांट की शुरुआत की है। इस व्यवसाय से उन्हें अच्छी कमाई हो रही है और वह अन्य लोगों को भी रोजगार दे रही हैं।
बैंक ऑफ इंडिया के गिरिडीह शाखा प्रबंधक सर्वोत्तम कुमार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हजारों लोगों को मुद्रा लोन मिला है, जिसमें महिलाओं की संख्या भी अच्छी है। झारखंड में बैंक ऑफ इंडिया ने लगभग 2370 करोड़ का लोन दिया है, जिससे लोगों को स्वरोजगार मिल रहा है। इस लोन के माध्यम से कई लोगों की ज़िंदगी में बदलाव आया है।