पीएम श्री योजना: 36 राज्यों में 13,092 स्कूल चयनित, 20 लाख से अधिक छात्रों को सीधा लाभ
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) योजना के तहत जुलाई 2026 तक देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13,092 स्कूलों का चयन किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत है। इस योजना से 20 लाख से अधिक छात्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के दृष्टिकोण को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
योजना की रूपरेखा और वित्तीय ढाँचा
7 सितंबर 2022 को शुरू की गई पीएम श्री योजना का लक्ष्य 14,500 से अधिक मॉडल स्कूलों को उत्कृष्ट संस्थानों के रूप में विकसित करना है। 2022-23 से 2026-27 तक चलने वाली इस पाँच वर्षीय योजना की कुल वित्तीय लागत ₹27,360 करोड़ है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा ₹18,128 करोड़ है।
परियोजना अनुमोदन बोर्ड (पीएबी) द्वारा स्वीकृत केंद्रीय व्यय 2023-24 में ₹2,520 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में ₹5,224 करोड़ हो गया है — यह लगभग 107 प्रतिशत की वृद्धि है, जो इस पहल में बढ़ते सरकारी निवेश को रेखांकित करती है।
चयन प्रक्रिया और स्कूलों का वर्गीकरण
स्कूलों का चयन निर्धारित गुणवत्ता मानकों के आधार पर तीन चरणों वाली 'चैलेंज मोड' प्रक्रिया के ज़रिए किया जाता है। चयनित 13,092 स्कूलों में 1,305 प्राथमिक, 3,102 उच्च प्राथमिक, 3,141 माध्यमिक और 5,544 उच्चतर माध्यमिक स्कूल शामिल हैं।
इस नेटवर्क में 913 केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) स्कूल, 620 नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) स्कूल, 80 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) और 4 राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के स्कूल भी शामिल हैं। गौरतलब है कि यह नेटवर्क 725 जिलों और 8,340 ब्लॉक/शहरी स्थानीय निकायों तक फैला हुआ है, जो योजना की व्यापक भौगोलिक पहुँच को दर्शाता है।
शिक्षा व्यवस्था पर व्यापक असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली में 14.71 लाख स्कूलों में 24.69 करोड़ से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं। पीएम श्री स्कूलों की परिकल्पना केवल बुनियादी ढाँचे के सुधार तक सीमित नहीं है — ये स्कूल आसपास के संस्थानों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाएँगे, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रसार व्यापक स्तर पर हो सके।
योजना के तहत छात्रों को 21वीं सदी के कौशल से लैस करने पर विशेष ज़ोर दिया गया है। इसमें सुरक्षित, उत्साहवर्धक और समावेशी शिक्षण वातावरण, आधुनिक अवसंरचना, विविध शिक्षण संसाधन और संवहनीय विकास को प्राथमिकता दी गई है।
एनईपी 2020 के साथ संरेखण
पीएम श्री पहल को एनईपी 2020 की संस्थागत अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है। यह योजना नीतिगत उद्देश्यों को व्यावहारिक स्कूली आचरण में बदलने का प्रयास करती है — समग्र, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में। आने वाले वर्षों में इन स्कूलों के सीखने के परिणाम यह तय करेंगे कि यह बड़ा निवेश वास्तव में शैक्षणिक रूपांतरण में तब्दील हो पाता है या नहीं।