क्या पोंजी स्कैम में ईडी ने 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की?
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
- पोंजी स्कीम के तहत 1,575 करोड़ रुपए की अवैध कमाई हुई।
- मुख्य आरोपी नीरज कुमार गुप्ता है।
- इस स्कीम के लिए कई सेमिनार आयोजित किए गए थे।
- ईडी ने अब तक 54.98 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की हैं।
शिलॉन्ग, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शिलॉन्ग सब-जोनल ऑफिस ने पर्लवाइन इंटरनेशनल से जुड़े पोंजी स्कैम मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में चार्जशीट प्रस्तुत की है। इनमें नीरज कुमार गुप्ता, उनकी संबंधित कंपनियां और सहयोगी नवीन कुमार गुप्ता, उमेश गर्ग और नितिन भारती शामिल हैं।
यह मामला 16 जनवरी 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत दर्ज किया गया था।
ईडी ने यह जांच सीआईडी, मेघालय पुलिस द्वारा दर्ज मामले के आधार पर शुरू की थी, जो आरबीआई, शिलॉन्ग की शिकायत और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दायर चार्जशीट पर आधारित थी। जांच में यह सामने आया कि आरोपियों ने ‘पर्लवाइन इंटरनेशनल’ नाम की एक पोंजी स्कीम चलाई, जिसे एक वेबसाइट के माध्यम से संचालित किया जाता था। इस स्कीम के तहत कम से कम 10 लाख रुपए की राशि एकत्र की गई, और 2250 रुपए की मेंबरशिप फीस लेकर वर्ष 2018 से मार्च 2023 तक यह पोंजी स्कीम देशभर में चलाई गई।
ईडी की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि पर्लवाइन इंटरनेशनल ने मेंबरशिप और उससे जुड़े कथित फायदों का प्रचार करने के लिए देशभर में कई सेमिनार आयोजित किए। वर्ष 2022 में कंपनी ने भारत और विदेशों में लगभग 80 लाख सदस्यों के होने का दावा किया था। जांच के अनुसार, पर्लवाइन इंटरनेशनल के नाम पर कुल 1,575 करोड़ रुपए की अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) की गई, जिसमें से कम से कम 395.35 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई थी।
सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में आरोप लगाया गया है कि नीरज कुमार गुप्ता इस पोंजी स्कीम का मास्टरमाइंड था। उसने 28 नवंबर 2015 को आरोपी परवेश सरोहा के माध्यम से पर्लवाइन की वेबसाइट का डोमेन खरीदा था और 2023 में इसके बंद होने तक इसे संचालित किया। जांच में यह भी सामने आया कि वेबसाइट के बैकएंड, यूजर क्रेडेंशियल्स और डिजिटल पॉइंट एलोकेशन पर नीरज कुमार गुप्ता का पूरा नियंत्रण था और देशभर के सदस्य उसके निर्देशों पर काम करते थे। उसने इस पोंजी स्कीम को बढ़ावा देने के लिए भारत और थाईलैंड में कई सेमिनार भी आयोजित किए थे।
ईडी के अनुसार, अपराध की अवधि के दौरान नीरज कुमार गुप्ता ने पोंजी स्कीम से अर्जित अवैध धन को अपनी नियंत्रित कंपनियों स्पीडवेल आईटी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, श्रीहंस आर्ट्स एंड क्रिएशन्स प्राइवेट लिमिटेड और श्रीहंस डेवलपमेंट्स एंड कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से लेयर किया। इस रकम से लगभग 60.88 करोड़ रुपए की कई चल और अचल संपत्तियां खरीदी गईं।
ईडी पहले ही 23 अक्टूबर 2024 को इस मामले में मुख्य प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल कर चुकी है, जिसमें परवेश सरोहा, सोनी चिरमंग और ख्रोबोरमे चिरमंग को आरोपी बनाया गया था। ये आरोपी मेघालय राज्य में पोंजी स्कीम को प्रमोट करते पाए गए थे और अदालत ने मामले में संज्ञान ले लिया है। फिलहाल, यह केस अंडर ट्रायल है।
अब तक ईडी ने इस मामले में कुल 54.98 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियां अटैच की हैं। अटैच की गई संपत्तियों में नीरज कुमार गुप्ता, उनकी सहयोगी कंपनियों और उनसे जुड़े लोगों नवीन कुमार गुप्ता, उमेश गर्ग, भावेश गर्ग, नितिन भारती, लोकेश शर्मा सहित अन्य की चल और अचल संपत्तियां शामिल हैं।