प्रतुल शाहदेव ने ममता बनर्जी के राष्ट्रपति अपमान पर कड़ी आलोचना की
सारांश
Key Takeaways
- ममता बनर्जी की टिप्पणी पर प्रतुल शाहदेव की कड़ी प्रतिक्रिया।
- राष्ट्रपति का पश्चिम बंगाल में अपमान।
- आदिवासी समाज का अपमान करने का आरोप।
- निशांत कुमार का जदयू में शामिल होना।
- हेमंत सोरेन का भ्रष्टाचार में संलिप्तता।
रांची, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा नेता प्रतुल शाहदेव ने ममता बनर्जी द्वारा राष्ट्रपति पर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ममता ने बेशर्मी की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। जिस तरह से राष्ट्रपति का पश्चिम बंगाल में अपमान हुआ, वह पहले कभी नहीं देखा गया। आदिवासी समाज की बेटी, जो देश के सर्वोच्च पद पर हैं, एक आदिवासियों के सम्मेलन में शामिल होने गई थीं। ममता बनर्जी की सरकार ने इतनी हिम्मत कैसे की कि राष्ट्रपति की अनुमति के बिना सभा स्थल को एक छोटी जगह में बदल दिया गया, जहां पहुंचने के लिए संकीर्ण गलियां थीं।
प्रतुल शाहदेव ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ने स्वयं दुख जताया और कहा कि ममता बनर्जी से ऐसी उम्मीद नहीं थी। उनका बड़प्पन यह है कि उन्होंने कहा कि ममता मेरी बहन की तरह हैं, लेकिन उनके इस व्यवहार की उन्होंने कल्पना नहीं की थी। अगर यह पुराना समय होता, तो कई सरकारें बर्खास्त हो जातीं। पश्चिम बंगाल में पूरी संवैधानिक प्रणाली का ब्रेकडाउन हो गया है, और ममता बनर्जी को इसके लिए तैयार रहना चाहिए।
प्रतुल ने आगे कहा कि ममता का यह कहना कि भाजपा के कहने पर राष्ट्रपति बयान दे रही हैं, यह पूरे आदिवासी समाज और देश का अपमान है। क्या आदिवासी की बेटी का अपना विवेक नहीं होता? ममता ने जिस तरह से राष्ट्रपति को बेइज्जत किया, उसके बावजूद वह आपको बहन बताती हैं और आप कहती हैं कि भाजपा उन्हें बुलवा रही है। आपने सभी आदिवासी समाज और देश की महिलाओं का अपमान किया है। आपको इसके परिणाम भुगतने होंगे।
जेएमएस के संदर्भ में उन्होंने कहा कि जेएमएम की कथनी और करनी में कितना अंतर है। मुख्यमंत्री, जो खुद को आदिवासी का बेटा बताते हैं, कहते हैं कि यह गरीबों की सरकार है। वहीं, हेमंत सोरेन अपने लिए 100 करोड़ रुपये का शीश महल बना रहे हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार में अरविंद केजरीवाल को भी पीछे छोड़ दिया है। बंगाल में आदिवासी समाज की बेटी का अपमान होता है, लेकिन इसके बाद भी उनकी चुप्पी है। केवल अपनी सत्ता बचाने के लिए हेमंत ने सारी सीमाएं तोड़ दी हैं। उन्होंने आदिवासी अस्मिता को गिरवी रख दिया है।
नीतीश कुमार के बेटे निशांत के जदयू में शामिल होने पर प्रतुल ने कहा कि निशांत को भाजपा की तरफ से शुभकामनाएं। नीतीश ने दिखा दिया कि उनके यहां वंशवाद नहीं है। निशांत ने साधारण जीवन व्यतीत किया। अब जब नीतीश राज्यसभा जा रहे हैं, तो उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं की मांग उचित है कि निशांत को राजनीति में आना चाहिए। यह उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत है और उन्हें मेरी शुभकामनाएं।