क्या प्रयागराज माघ मेला में श्रद्धालुओं ने 'हर हर गंगे' के साथ आस्था की डुबकी लगाई?
सारांश
Key Takeaways
- माघ मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा।
- श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई।
- प्रशासन की व्यवस्थाएं सराहनीय हैं।
- भक्तों का उत्साह और आस्था अद्भुत है।
- माघ मेला आस्था और संस्कृति का प्रतीक है।
प्रयागराज, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के तीसरे दिन सोमवार की सुबह से संगम घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। देश के विभिन्न कोनों से आए श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई।
आस्था की डुबकी लगाकर श्रद्धालु बेहद गदगद नजर आए। एक श्रद्धालु ने बताया, “हम हैदराबाद से आए हैं। पहले महाकुंभ में भी आए थे और अब माघ मेले में डुबकी लगाई है। स्नान के बाद गंगा, यमुना और सरस्वती के आशीर्वाद से आज रात काशी विश्वनाथ मंदिर जाएंगे। इसके बाद अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन करेंगे और फिर हैदराबाद लौट जाएंगे। योगी सरकार ने बहुत अच्छे इंतजाम किए हैं, हर-हर गंगे।”
श्रद्धालुओं ने प्रशासन की तारीफ की। एक भक्त ने कहा, “सरकार ने यहां भीड़ को बहुत अच्छे से मैनेज किया है। ट्रैफिक और पार्किंग के इंतजाम तारीफ के काबिल हैं। मैं लोगों को यहां आने के लिए प्रोत्साहित करना चाहूंगा। कोई दिक्कत नहीं होगी, सभी व्यवस्थाएं बढ़िया हैं।”
एक अन्य श्रद्धालु ने बताया, “माघ मेले का अपना अलग आकर्षण है। यहां आकर बहुत अच्छा लगता है। पिछली बार भी प्रशासन ने अच्छे इंतजाम किए थे और इस साल भी वैसा ही है। यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। सरकार के इंतजाम तारीफ के काबिल हैं। पुलिस हर समय मौजूद है और श्रद्धालुओं की मदद के लिए तैयार रहती है। युवाओं में आस्था की भावना बहुत ज्यादा है। कुल मिलाकर इंतजाम बहुत अच्छे हैं। कई सुविधाएं उपलब्ध हैं और साफ-सुथरे चेंजिंग रूम भी दिए गए हैं।”
माघ मेला 2026 की शुरुआत 3 जनवरी से हुई है और यह 15 फरवरी तक चलेगा। पहले दिन लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान किया था और अब भी रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने सुरक्षा, स्वच्छता, ट्रैफिक और पार्किंग के पुख्ता इंतजाम किए हैं। ठंडी हवाओं और कोहरे के बीच भी भक्तों का उत्साह कम नहीं है।
बता दें, माघ मेला आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। यहां कल्पवास करने वाले श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में हैं। संगम घाटों पर स्नान के साथ भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचन भी हो रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि संगम स्नान से पापों का नाश होता है और मन को शांति मिलती है।