ज्वालामुखी: पृथ्वी से अन्य ग्रहों तक — कैसे बनते हैं, क्यों फटते हैं और क्यों हैं खतरनाक
सारांश
Key Takeaways
ज्वालामुखी प्रकृति के सर्वाधिक शक्तिशाली और विनाशकारी स्वरूपों में से एक है। भू-वैज्ञानिक दृष्टि से, यह पृथ्वी या किसी ग्रह की सतह पर स्थित वह मुख या द्वार होता है जिससे आंतरिक भाग में मौजूद लावा बाहर निकलता है। जब तप्त मैग्मा और गैसें तीव्र दबाव के साथ धरातल पर आती हैं, तो इस प्रक्रिया को ज्वालामुखी विस्फोट कहा जाता है।
ज्वालामुखी के प्रकार
ज्वालामुखी वाले क्षेत्र आमतौर पर पहाड़ का रूप ले लेते हैं और चट्टानों, राख तथा अन्य पदार्थों की कई परतों से बनते हैं। विस्फोट कभी अत्यंत जोरदार होता है तो कभी अपेक्षाकृत शांत। भू-वैज्ञानिक ज्वालामुखियों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत करते हैं।
सक्रिय ज्वालामुखी वे हैं जो हाल ही में फटे हों या जिनके शीघ्र फटने की आशंका हो। सुप्त ज्वालामुखी अभी शांत हैं, किंतु भविष्य में सक्रिय हो सकते हैं। विलुप्त ज्वालामुखी वे हैं जिनके दोबारा फटने की कोई संभावना नहीं मानी जाती।
ज्वालामुखी कैसे बनते हैं
पृथ्वी पर ज्वालामुखी मुख्यतः तीन कारणों से बनते हैं। पहला कारण टेक्टोनिक प्लेट्स का अलग होना है — जब प्लेट्स दूर जाती हैं तो उनके बीच रिक्त स्थान बनता है, जिसमें मैग्मा ऊपर आ जाता है। यह प्रक्रिया प्रायः समुद्र के भीतर ज्वालामुखी का निर्माण करती है।
दूसरा कारण टेक्टोनिक प्लेट्स का आपस में टकराना है। जब एक प्लेट दूसरी के नीचे दब जाती है, तो भारी गर्मी और दबाव से चट्टानें पिघलकर मैग्मा बन जाती हैं और ऊपर की ओर बढ़ती हैं। तीसरा कारण हॉट स्पॉट है — पृथ्वी के भीतर कुछ स्थान असाधारण रूप से गर्म होते हैं, जो मैग्मा को हल्का बनाकर सतह की ओर धकेलते हैं।
जब मैग्मा पृथ्वी की सतह पर पहुँचता है, तो उसे लावा कहते हैं। विस्फोट के साथ राख, गैसें और पत्थर भी बाहर निकलते हैं। कभी-कभी यह इतना जोरदार होता है कि राख आसमान में अत्यधिक ऊँचाई तक पहुँच जाती है।
सौर मंडल के अन्य ग्रहों पर ज्वालामुखी
ज्वालामुखी केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं हैं। हमारे सौर मंडल में अनेक ग्रहों और चंद्रमाओं पर भी ज्वालामुखी की उपस्थिति दर्ज की गई है। शुक्र और मंगल ग्रह पुराने ज्वालामुखियों से भरे पड़े हैं। बृहस्पति, शनि और नेपच्यून के कुछ चंद्रमाओं पर अभी भी सक्रिय ज्वालामुखी फट रहे हैं।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के अंतरिक्ष यानों ने इन ज्वालामुखियों की तस्वीरें खींची हैं, जो इस बात की पुष्टि करती हैं कि ज्वालामुखीय गतिविधि एक सार्वभौमिक भू-वैज्ञानिक प्रक्रिया है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैज्ञानिक अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावना तलाश रहे हैं।
ज्वालामुखी के खतरे और फायदे
ज्वालामुखी विस्फोट अत्यंत खतरनाक होते हैं। ये आसपास के इलाकों को राख से ढक देते हैं, फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं और जान-माल की भारी हानि का कारण बन सकते हैं। गौरतलब है कि इतिहास में कई बड़े ज्वालामुखी विस्फोटों ने वैश्विक जलवायु को भी प्रभावित किया है।
हालाँकि इसके कुछ सकारात्मक पहलू भी हैं। ज्वालामुखी की राख से मिट्टी अत्यंत उपजाऊ बनती है और नए भू-भागों का निर्माण होता है। वैज्ञानिक लगातार ज्वालामुखियों पर निगरानी रखते हैं ताकि समय रहते चेतावनी दी जा सके और जनहानि को न्यूनतम किया जा सके।
वैज्ञानिक निगरानी और भविष्य
आधुनिक तकनीक और उपग्रह-आधारित निगरानी प्रणालियों की मदद से वैज्ञानिक आज ज्वालामुखीय गतिविधियों का पूर्वानुमान लगाने में अधिक सक्षम हो गए हैं। नासा और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियाँ न केवल पृथ्वी पर बल्कि अन्य ग्रहों पर भी ज्वालामुखीय बदलावों का अध्ययन कर रही हैं। आने वाले दशकों में यह शोध हमें ग्रहों की आंतरिक संरचना और विकास को और बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।