क्या प्रियांक खड़गे अव्वल दर्जे के बेवकूफ हैं? असम के युवाओं पर उनकी टिप्पणी पर सीएम हिमंत सरमा का पलटवार

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क्या प्रियांक खड़गे अव्वल दर्जे के बेवकूफ हैं? असम के युवाओं पर उनकी टिप्पणी पर सीएम हिमंत सरमा का पलटवार

सारांश

गुवाहाटी में प्रियांक खड़गे की विवादास्पद टिप्पणी ने असम में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने जवाबी हमला करते हुए खड़गे की मानसिकता पर सवाल उठाया है। जानिए इस चर्चा के पीछे की कहानी और असम के युवाओं की गरिमा का बचाव कैसे हुआ।

मुख्य बातें

प्रियांक खड़गे की टिप्पणी ने असम में राजनीतिक हलचल पैदा की।
मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने खड़गे की टिप्पणी को अपमानजनक बताया।
भाजपा ने खड़गे पर तीखा हमला किया।
असम के युवाओं की प्रतिभा पर सवाल उठाना विवाद का कारण बना।
कई संगठनों ने खड़गे से माफी मांगने की मांग की।

गुवाहाटी, 27 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक के ग्रामीण विकास मंत्री और कांग्रेस के नेता प्रियांक खड़गे द्वारा भारत के तेजी से बढ़ते सेमीकंडक्टर उद्योग के संदर्भ में असम के युवाओं की क्षमता और प्रतिभा पर उठाए गए सवालों के कारण असम में राजनीतिक तूफान उत्पन्न हो गया है।

खड़गे की टिप्पणी ने राज्य में आक्रोश फैला दिया है, जिसे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और सत्तारूढ़ भाजपा ने कड़ी आलोचना की है।

मुख्यमंत्री ने खड़गे पर तीखा हमला करते हुए उनके बयान को “असम के युवाओं की गरिमा और मेहनत का अपमान” कहा।

मुख्यमंत्री सरमा ने संवाददाताओं से कहा, "प्रियांक खड़गे ने अपने आप को एक अव्वल दर्जे के मूर्ख के रूप में उजागर किया है। उनकी टिप्पणी एक गहरी पूर्वाग्रहित मानसिकता को दर्शाती है जो असम के युवाओं को नीची नजर से देखती है। उन्होंने हमारे राज्य के हर युवा पेशेवर का अपमान किया है। कांग्रेस ने उनके शब्दों की निंदा नहीं की है, जिससे स्पष्ट होता है कि वे पूर्वोत्तर को किस दृष्टिकोण से देखते हैं। हम उनकी विभाजनकारी और अपमानजनक टिप्पणी के लिए कानूनी विकल्प तलाश रहे हैं।"

असम भाजपा ने भी सोशल मीडिया पर एक तीखी पोस्ट के माध्यम से खड़गे को उनके “अहंकारी प्रकोप” के लिए उपहास किया।

पार्टी ने कहा, "अगर 'प्रतिभा' का मतलब बॉस की चाटुकारिता और राहुल गांधी के पालतू जानवरों के लिए बिस्कुट छीनना है, तो शुक्र है कि असम के लोग प्रतिभाहीन हैं। श्रीमान जूनियर खड़गे, क्या आपके पास कोई वास्तविक कौशल है? इस पिता-पुत्र की पार्टी ने असम का अपमान करने की आदत बना ली है।"

भाजपा ने राज्य कांग्रेस इकाई पर चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए कहा, "एक बार फिर, उनके स्थानीय ब्रिगेड, जिनमें उनके पैजान भी शामिल हैं, फेविकोल से उनके होंठ सील कर देंगे।"

महत्वपूर्ण है कि खड़गे ने केंद्र सरकार की सेमीकंडक्टर निवेश योजनाओं पर मीडिया से बात करते हुए कर्नाटक के बजाय गुजरात और असम के लिए परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने पर नाराजगी व्यक्त की।

उन्होंने कहा, "सेमीकंडक्टर उद्योग गुजरात और असम क्यों जा रहे हैं, जबकि उन्हें बेंगलुरु में होना चाहिए? कर्नाटक के लिए निर्धारित निवेश को दूसरी जगह भेजा जा रहा है। इन दोनों राज्यों में क्या है? क्या असम और गुजरात में कोई प्रतिभा है?"

इस टिप्पणी को कई लोगों ने अपमानजनक और अभिजात्यवादी माना है, और असम के राजनीतिक स्पेक्ट्रम और नागरिक समाज में इसकी व्यापक आलोचना की गई है। कई संगठनों ने कांग्रेस नेता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है, जिसे उन्होंने "पूर्वोत्तर के लोगों का अपमान" बताया है।

विवाद बढ़ता जा रहा है, छात्र संघ, नागरिक समाज समूह और पेशेवर लोग खड़गे की टिप्पणी को “अभिजात्यवादी” और “क्षेत्रीय पक्षपाती” बताकर उसकी निंदा कर रहे हैं और असम के लोगों से बिना शर्त माफी मांगने की मांग कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह असम के युवाओं की पहचान और प्रतिभा पर भी सवाल उठाती है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियांक खड़गे ने असम के युवाओं के बारे में क्या कहा?
प्रियांक खड़गे ने असम के युवाओं की प्रतिभा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग क्यों गुजरात और असम जा रहा है।
मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने खड़गे की टिप्पणी पर क्या प्रतिक्रिया दी?
मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने खड़गे को अव्वल दर्जे का मूर्ख करार देते हुए उनकी टिप्पणी को असम के युवाओं का अपमान बताया।
क्या भाजपा ने इस विवाद पर कोई प्रतिक्रिया दी?
भाजपा ने खड़गे की टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और उन्हें उपहास किया।
क्या खड़गे ने सार्वजनिक माफी मांगी है?
अभी तक खड़गे ने सार्वजनिक माफी नहीं मांगी है, लेकिन कई संगठनों ने उनकी माफी की मांग की है।
इस विवाद का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
यह विवाद असम में राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ा सकता है और कांग्रेस की छवि पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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