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पंजाब कैबिनेट ने भूमि मालिकों को नदियों से गाद निकालने की अनुमति दी, बाढ़ नियंत्रण पर ध्यान

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पंजाब कैबिनेट ने भूमि मालिकों को नदियों से गाद निकालने की अनुमति दी, बाढ़ नियंत्रण पर ध्यान

सारांश

पंजाब कैबिनेट ने भूमि मालिकों को नदियों से गाद निकालने की अनुमति दी है। यह निर्णय बाढ़ नियंत्रण की तैयारियों को मजबूत करने के लिए लिया गया है। जानें इस नीति के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभाव।

मुख्य बातें

भूमि मालिकों को नदियों से गाद निकालने की अनुमति दी गई है।
यह निर्णय बाढ़ नियंत्रण की तैयारियों को बढ़ाने के लिए लिया गया है।
नदियों के जल प्रवाह में सुधार होगा।
सतलुज, ब्यास, और सिसवां नदियों को शामिल किया गया है।
खुदाई से निकले मटीरियल का नि:शुल्क उपयोग संभव है।

चंडीगढ़, १७ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट ने शुक्रवार को एक जन-केंद्रित नीति को स्वीकृति दी।

इस नीति के अंतर्गत भूमि मालिकों को अपने खर्च पर नदियों, नालों और ड्रेनों से गाद निकालने की अनुमति दी गई है। साथ ही, उन्हें खुदाई से प्राप्त मटीरियल का नि:शुल्क उपयोग करने का अधिकार भी दिया गया है।

इस निर्णय का उद्देश्य मॉनसून से पूर्व बाढ़ नियंत्रण की तैयारियों को सुदृढ़ करना और नदियों के प्रमुख हिस्सों में पानी के प्रवाह में सुधार लाना है।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया, "पंजाब कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण नागरिक-केंद्रित निर्णय लेते हुए भूमि मालिकों को नदियों, नालों और ड्रेनों से गाद निकालने की अनुमति देने का निर्णय लिया है। इनमें सतलुज, ब्यास और सिसवां नदियां भी शामिल हैं।"

कैबिनेट ने एक ऐसी नीति को स्वीकृति दी है जो भूमि मालिकों को अपने खर्च पर गाद निकालने और खुदाई से निकले मटीरियल का अपने उपयोग के लिए मुफ्त में प्रयोग करने की अनुमति देती है।

एक प्रवक्ता ने कहा कि इस पहल से नदियों के महत्वपूर्ण हिस्सों से जल्दी गाद निकालने में सहायता मिलेगी, जिससे नदियों और नालों के पानी ढोने की क्षमता में वृद्धि होगी, और बाढ़ का खतरा काफी हद तक कम होगा, जिससे सार्वजनिक और निजी संपत्ति सुरक्षित रहेगी।

सरकार ने पानी के प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए नौ महत्वपूर्ण स्थानों की पहचान की है जहां गाद निकालने की आवश्यकता है। इन स्थानों पर गाद का न निकाला जाना गाद के जमा होने का कारण बन सकता है, नदियों और नालों के पानी ढोने की क्षमता को कम कर सकता है, और मॉनसून के दौरान बाढ़ के खतरे को बढ़ा सकता है। इसके साथ ही, खुदाई से निकले मटीरियल का उपयोग भी नहीं हो सकेगा।

कैबिनेट ने एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में 'ग्राम पंचायतों के सरपंचों, पंचायत समितियों, तथा जिला परिषदों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के पदों के लिए पंजाब आरक्षण नियम, १९९४' के नियम ६ में संशोधन को भी स्वीकृति दी। इस संशोधन का उद्देश्य विभिन्न श्रेणियों के बीच प्रतिनिधित्व को तर्कसंगत बनाना है।

इस कदम का मकसद आरक्षण के लिए प्रत्येक श्रेणी—अनुसूचित जाति, अनुसूचित जाति की महिलाएं, महिलाएं, और सामान्य श्रेणी के भीतर प्रतिनिधित्व को तर्कसंगत बनाना है। इसमें यह प्रावधान है कि यदि कुल जिला परिषदों में से १० प्रतिशत या उससे अधिक प्रभावित होते हैं तो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जाति की महिलाओं और सामान्य श्रेणियों के लिए रोटेशन (बारी) का रोस्टर नए सिरे से तैयार किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भूमि मालिकों को अपने संसाधनों का उचित उपयोग करने का अवसर भी प्रदान करता है। इससे नदियों की जलधारा में सुधार होगा और बाढ़ के खतरे में कमी आएगी।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूमि मालिकों को नदियों से गाद निकालने की अनुमति क्यों दी गई?
यह निर्णय बाढ़ नियंत्रण की तैयारियों को मजबूत करने और नदियों के जल प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए लिया गया है।
गाद निकालने के लिए कौन-सी नदियां शामिल हैं?
इसमें सतलुज, ब्यास और सिसवां नदियां शामिल हैं।
भूमि मालिकों को गाद निकालने का खर्च कौन उठाएगा?
गाद निकालने का खर्च भूमि मालिकों को स्वयं उठाना होगा।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस नीति का मुख्य उद्देश्य बाढ़ रोकने की तैयारी को मजबूत करना और नदियों के जल प्रवाह को सुधारना है।
क्या भूमि मालिक खुदाई से निकले मटीरियल का उपयोग कर सकते हैं?
जी हाँ, भूमि मालिक खुदाई से निकले मटीरियल का नि:शुल्क उपयोग कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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