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क्या राघव चड्ढा एक दिन के लिए ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय बने?

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क्या राघव चड्ढा एक दिन के लिए ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय बने?

सारांश

राघव चड्ढा ने एक दिन के लिए ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय बनकर गिग इकॉनमी की असलियत को समझा। क्या आपको पता है कि उनके अनुभव ने डिलीवरी एजेंट्स की समस्याओं को कैसे उजागर किया?

मुख्य बातें

राघव चड्ढा ने गिग इकॉनमी की सच्चाई को उजागर किया।
डिलीवरी एजेंट्स की कमाई में भारी कमी है।
गिग वर्कर्स के लिए उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता है।
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे ने बहस को प्रेरित किया।
गिग वर्कर्स की समस्याओं को संसद में उठाया गया।

नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा वर्तमान में जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकइट जैसे ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफार्मों से जुड़े डिलीवरी एजेंट्स की समस्याओं को उजागर करने के लिए चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने एक अनोखा कदम उठाया, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। राघव चड्ढा ने एक दिन के लिए ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय का किरदार निभाया और सड़कों पर उतरकर खुद डिलीवरी एजेंट बने।

सोमवार को उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया और लिखा, "बोर्डरूम से दूर, जमीनी हकीकत में। मैंने उनका एक दिन जिया।" इसके साथ ही उन्होंने "स्टे ट्यून्ड!" लिखकर लोगों की जिज्ञासा और बढ़ा दी।

वीडियो में देखा जा सकता है कि चड्ढा ब्लिंकिट की पीली यूनिफॉर्म पहने हैं, पीठ पर डिलीवरी बैग लटकाए हुए हैं और एक अन्य ब्लिंकिट राइडर के साथ स्कूटर पर निकलते हैं। वीडियो में दोनों डिलीवरी करते हुए दिखाई देते हैं, कभी लिफ्ट से उतरते हुए तो कभी किसी ग्राहक के दरवाजे तक पहुंचते हुए। वीडियो के अंत में वह एक डिलीवरी पूरी करते हुए नजर आते हैं।

यह सब यूं ही नहीं है। लगभग एक महीने पहले, राघव चड्ढा ने गिग इकॉनमी की कड़वी सच्चाई को उजागर करते हुए एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने एक ब्लिंकिट डिलीवरी एजेंट की कमाई का स्क्रीनशॉट साझा किया था। स्क्रीनशॉट में दिखाया गया था कि 28 डिलीवरी करने के बाद उस राइडर को केवल 762.57 रुपए मिले।

उस स्क्रीनशॉट के अनुसार, लगभग 15 घंटे काम करने के बाद डिलीवरी एजेंट की प्रति घंटे की कमाई केवल 52 रुपए थी। इसमें 690.57 रुपए ऑर्डर भुगतान से, 72 रुपए प्रोत्साहन से और बाकी कुछ भी नहीं था। इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर बहस को जन्म दिया।

उस समय, राघव चड्ढा ने लिखा था कि कम मजदूरी, भारी लक्ष्यों, नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं और सम्मान की कमी, यही आज के गिग वर्कर्स की सच्चाई है। उन्होंने कहा था कि भारत डिजिटल इकॉनमी का निर्माण कम वेतन पाने वाले और ज्यादा काम करने वाले लोगों की पीठ पर नहीं कर सकता। उनके अनुसार, गिग वर्कर्स के लिए उचित वेतन, मानव काम के घंटे और सामाजिक सुरक्षा अत्यंत आवश्यक हैं।

कुछ ही दिनों बाद, चड्ढा ने उसी डिलीवरी बॉय हिमांशु के साथ एक और वीडियो साझा किया, जिसमें दोनों साथ लंच करते हुए दिखाई देते हैं। इस 17 मिनट के वीडियो में उन्होंने गिग वर्कर्स की परेशानियों, जोखिम, लंबे कार्यकाल और सुरक्षा के अभाव पर खुलकर बातचीत की।

इसके अलावा, राघव चड्ढा ने सदन में भी जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकइट के राइडर्स और डिलीवरी बॉय को हो रही समस्याओं को उठाया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज में आवश्यक सुधारों की भी जरूरत को उजागर करता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राघव चड्ढा ने क्यों डिलीवरी बॉय का काम किया?
उन्होंने गिग इकॉनमी की असली तस्वीर को उजागर करने के लिए यह कदम उठाया।
डिलीवरी एजेंट की कमाई कितनी होती है?
एक डिलीवरी एजेंट को 28 डिलीवरी के बाद केवल 762.57 रुपए मिले।
गिग वर्कर्स की समस्याएं क्या हैं?
कम मजदूरी, नौकरी की सुरक्षा का अभाव और भारी लक्ष्यों की समस्याएं गिग वर्कर्स का सामना करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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