21 अक्टूबर 2026
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राहुल गांधी अभी अपरिपक्व, आरएसएस पर बहुत कुछ सीखना बाकी: दिलीप घोष का तीखा हमला

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राहुल गांधी अभी अपरिपक्व, आरएसएस पर बहुत कुछ सीखना बाकी: दिलीप घोष का तीखा हमला

सारांश

भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल मंत्री दिलीप घोष ने राहुल गांधी को 'अपरिपक्व' करार देते हुए कहा कि 50-55 साल में भी वह आरएसएस और भारत को नहीं समझते। साथ ही दिल्ली में कॉकरोच के पुतले के विवाद को बेबुनियाद बताया और रूस से तेल खरीद को राष्ट्रीय हितों पर आधारित नीति कहा।

मुख्य बातें

दिलीप घोष ने 21 अक्टूबर 2026 को न्यूटाउन में राहुल गांधी को 'अपरिपक्व' बताया और कहा कि उन्हें आरएसएस के बारे में अभी बहुत कुछ सीखना है।
घोष के अनुसार 50-55 साल की उम्र में भी राहुल गांधी स्वतंत्र रूप से नहीं सोच सकते।
दिल्ली में कॉकरोच का पुतला जलाने के विवाद को उन्होंने बंगाल की दुर्गा पूजा और अल्मोड़ा के दशहरे की परंपरा से तुलना कर खारिज किया।
कोलकाता सहित देशभर में विदेशी फंडिंग और अव्यवस्था फैलाने की कोशिशों पर घोष ने चेतावनी दी।
रूस से तेल खरीद को भारत का आंतरिक मामला बताया; कहा — 'नेशन फर्स्ट' ही सरकार की प्राथमिकता है।

पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने 21 अक्टूबर 2026 को न्यूटाउन में कई राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को 'अपरिपक्व' करार देते हुए कहा कि उन्हें भारत और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बारे में अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है। इसके अलावा घोष ने दिल्ली में कॉकरोच का पुतला जलाने के विवाद और रूस से तेल खरीद की नीति पर भी अपना पक्ष स्पष्ट किया।

राहुल गांधी पर तीखी प्रतिक्रिया

दिलीप घोष ने राहुल गांधी के आरएसएस पर दिए बयान को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी क्या मानते हैं, इससे जनता को कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्हें अभी भारत और आरएसएस के बारे में बहुत कुछ सीखना बाकी है।' घोष ने आगे कहा, 'अभी तो सिर्फ 50-55 साल के हुए हैं और वह अभी भी अपरिपक्व हैं। वह स्वतंत्र रूप से सोच नहीं सकते, इसीलिए उनके बयानों का कोई असर नहीं होता।'

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच आरएसएस की भूमिका और उसकी विचारधारा को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो चुकी है।

दिल्ली में कॉकरोच के पुतले पर दिया स्पष्टीकरण

दिल्ली में कॉकरोच का पुतला जलाने के विवाद पर घोष ने कहा, 'कॉकरोच को जलाना ही चाहिए और राक्षसों के अलग-अलग रूपों को दर्शाने वाले अन्य पुतलों को भी जलाना चाहिए।' उन्होंने बंगाल की दुर्गा पूजा का उदाहरण देते हुए कहा कि हर पंडाल में राक्षस का अलग रूप होता है और ऐसे पुतले जलाए जाते हैं।

घोष ने उत्तराखंड के अल्मोड़ा का भी संदर्भ दिया, जहाँ दशहरे पर रावण समेत उसके पूरे परिवार के 11 पुतले जलाए जाते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि दिल्ली में एक अतिरिक्त पुतला जलाने पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए।

विदेशी फंडिंग और अव्यवस्था पर चेतावनी

घोष ने देशभर में सरकार और जनता को गुमराह करने की कोशिशों का ज़िक्र करते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली और मुंबई सहित अनेक शहरों में विदेशी फंडिंग और बाहरी स्रोतों के ज़रिए लोगों को प्रभावित करने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोलकाता में भी इसी तरह की गतिविधियाँ हो रही हैं और सरकार को इसकी जानकारी है। उनके अनुसार, जनता को एकजुट होकर ऐसी गतिविधियों को रोकना चाहिए।

रूस से तेल खरीद: भारत का आंतरिक मामला

भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के फैसले का बचाव करते हुए घोष ने कहा, 'हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने बार-बार कहा है कि भारत किससे तेल खरीदता है और किसे बेचता है, यह आंतरिक मामला है।' उन्होंने कहा कि बाहरी दबाव के बावजूद प्रधानमंत्री ने 'नेशन फर्स्ट' के एजेंडे पर कोई समझौता नहीं किया।

गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद से भारत की तेल खरीद नीति पश्चिमी देशों की आलोचना का केंद्र रही है, लेकिन नई दिल्ली ने रणनीतिक स्वायत्तता के अपने रुख पर कायम रहते हुए ऊर्जा आयात जारी रखा है।

आने वाले दिनों में भाजपा और कांग्रेस के बीच आरएसएस, विदेशी फंडिंग और तेल नीति जैसे मुद्दों पर राजनीतिक घमासान और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक संदेश ज़्यादा है। कॉकरोच के पुतले और विदेशी फंडिंग के आरोप जैसे मुद्दों को एक साथ उठाना बताता है कि भाजपा विरोधी आख्यान को 'बाहरी षड्यंत्र' के फ्रेम में रखना चाहती है। रूस-तेल मुद्दे पर 'नेशन फर्स्ट' का नारा पश्चिमी दबाव के सामने आत्मविश्वास दिखाने की कोशिश है, लेकिन जब तक इन दावों के साथ ठोस नीतिगत ब्यौरा नहीं आता, ये बयान महज चुनावी बयानबाज़ी की श्रेणी में ही रहेंगे।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलीप घोष ने राहुल गांधी को 'अपरिपक्व' क्यों कहा?
दिलीप घोष ने कहा कि राहुल गांधी आरएसएस पर जो बयान देते हैं उससे जनता पर कोई असर नहीं पड़ता क्योंकि वे स्वतंत्र रूप से सोचने में असमर्थ हैं। उन्होंने 50-55 साल की उम्र में भी उनकी राजनीतिक समझ को अधूरा बताया।
दिल्ली में कॉकरोच का पुतला जलाने का विवाद क्या है?
दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कॉकरोच का पुतला जलाने पर विवाद खड़ा हो गया था। दिलीप घोष ने इसे बेबुनियाद बताते हुए बंगाल की दुर्गा पूजा और उत्तराखंड के अल्मोड़ा में 11 पुतले जलाने की परंपरा का हवाला दिया।
भारत रूस से तेल क्यों खरीदता है और क्या यह सही नीति है?
दिलीप घोष के अनुसार यह भारत का आंतरिक मामला है जो राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होता है। उन्होंने कहा कि बाहरी दबाव के बावजूद प्रधानमंत्री ने 'नेशन फर्स्ट' की नीति पर कोई समझौता नहीं किया।
दिलीप घोष ने विदेशी फंडिंग पर क्या आरोप लगाए?
घोष ने आरोप लगाया कि दिल्ली, मुंबई और कोलकाता समेत देशभर में विदेशी फंडिंग के ज़रिए सरकार और जनता को गुमराह करने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इसकी जानकारी है और जनता को एकजुट होकर इसे रोकना चाहिए।
दिलीप घोष कौन हैं और उनका राजनीतिक कद क्या है?
दिलीप घोष भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री हैं। वे पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं और अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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