दिलीप घोष का पलटवार: 'मीडिया में बोलने का अधिकार खड़गे को BJP ने दिया, इमरजेंसी याद करें'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने 12 अक्टूबर 2026 को न्यूटाउन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें खड़गे ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लोकतंत्र को समाप्त करना चाहते हैं। घोष ने कहा कि मीडिया में बयान देने का अधिकार खुद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सुनिश्चित किया है और कांग्रेस को अपने इतिहास को नहीं भूलना चाहिए।
खड़गे के बयान पर घोष का पलटवार
घोष ने कहा, 'मीडिया में वे जो भी बयान दे रहे हैं, उसका अधिकार उन्हें BJP ने ही दिया है। उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके समय में क्या हुआ था। इमरजेंसी को 50 साल हो चुके हैं।' उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने संविधान, न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं का ऐतिहासिक रूप से अपमान किया है।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब इंडी गठबंधन दिल्ली सहित कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है।
राहुल गांधी के विरोध-मार्च पर टिप्पणी
कांग्रेस के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शनों पर घोष ने कहा कि राहुल गांधी ने पहले भी लंबा मार्च किया था, लेकिन देश में कुछ नहीं बदला। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में सभी नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है।
दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के पास प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर घोष ने कहा, 'वे राष्ट्रपति के बुलाने पर भी नहीं आएंगे, बात नहीं करेंगे, चर्चा में शामिल नहीं होंगे। अब वे सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं छोड़ेंगे — यह डराने-धमकाने की कोशिश है। इस देश में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।'
यूट्यूबर ध्रुव राठी के आरोपों पर प्रतिक्रिया
यूट्यूबर ध्रुव राठी ने दावा किया था कि उनके साथ ज़बरदस्ती की जा रही है और उन्हें घर से निकलने नहीं दिया जा रहा। घोष ने इस पर कहा कि पिछले आंदोलन में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया और जनजीवन बाधित हुआ था, इसलिए सरकार अग्रिम रूप से सतर्क और सख्त है।
उन्होंने जोड़ा, 'देश में लोगों को शांतिपूर्वक आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन उपद्रव बर्दाश्त नहीं होगा।'
नेपाल-श्रीलंका जैसी अस्थिरता का आरोप
घोष ने यह भी आरोप लगाया कि 'भारत में नेपाल और श्रीलंका जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश बहुत दिनों से हो रही है।' उन्होंने कहा कि जिस तरह इन देशों में तख्तापलट में सहयोग किया गया, उसी तरह भारत को भी अस्थिर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इसके खिलाफ कानून बनाने की तैयारी में है।
आलोचकों का कहना है कि घोष के इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया है। विपक्षी खेमे में इन बयानों को विरोध-प्रदर्शन से ध्यान भटकाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक तनाव और गहरा हो सकता है।