12 अक्टूबर 2026
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दिलीप घोष का पलटवार: 'मीडिया में बोलने का अधिकार खड़गे को BJP ने दिया, इमरजेंसी याद करें'

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दिलीप घोष का पलटवार: 'मीडिया में बोलने का अधिकार खड़गे को BJP ने दिया, इमरजेंसी याद करें'

सारांश

दिलीप घोष ने खड़गे के लोकतंत्र-खतरे वाले बयान पर करारा जवाब दिया — इमरजेंसी की याद दिलाई, राहुल के मार्च को बेनतीजा बताया, और ध्रुव राठी के आरोपों को पिछले आंदोलन की हिंसा के संदर्भ में खारिज किया।

मुख्य बातें

दिलीप घोष ने 12 अक्टूबर 2026 को न्यूटाउन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर पलटवार किया।
घोष ने कहा कि मीडिया में बोलने का अधिकार खड़गे को BJP ने दिया है; इमरजेंसी के 50 साल याद दिलाए।
राहुल गांधी के विरोध-मार्च को घोष ने बेनतीजा बताया, लेकिन शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को स्वीकार किया।
यूट्यूबर ध्रुव राठी के सरकारी ज़बरदस्ती के आरोपों को घोष ने पिछले आंदोलन में सरकारी संपत्ति के नुकसान के हवाले से खारिज किया।
घोष ने आरोप लगाया कि भारत में नेपाल और श्रीलंका जैसी अस्थिरता फैलाने की कोशिश हो रही है; सरकार नया कानून लाने की तैयारी में।

पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने 12 अक्टूबर 2026 को न्यूटाउन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें खड़गे ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लोकतंत्र को समाप्त करना चाहते हैं। घोष ने कहा कि मीडिया में बयान देने का अधिकार खुद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सुनिश्चित किया है और कांग्रेस को अपने इतिहास को नहीं भूलना चाहिए।

खड़गे के बयान पर घोष का पलटवार

घोष ने कहा, 'मीडिया में वे जो भी बयान दे रहे हैं, उसका अधिकार उन्हें BJP ने ही दिया है। उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके समय में क्या हुआ था। इमरजेंसी को 50 साल हो चुके हैं।' उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने संविधान, न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं का ऐतिहासिक रूप से अपमान किया है।

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब इंडी गठबंधन दिल्ली सहित कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है।

राहुल गांधी के विरोध-मार्च पर टिप्पणी

कांग्रेस के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शनों पर घोष ने कहा कि राहुल गांधी ने पहले भी लंबा मार्च किया था, लेकिन देश में कुछ नहीं बदला। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में सभी नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है।

दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के पास प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर घोष ने कहा, 'वे राष्ट्रपति के बुलाने पर भी नहीं आएंगे, बात नहीं करेंगे, चर्चा में शामिल नहीं होंगे। अब वे सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं छोड़ेंगे — यह डराने-धमकाने की कोशिश है। इस देश में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।'

यूट्यूबर ध्रुव राठी के आरोपों पर प्रतिक्रिया

यूट्यूबर ध्रुव राठी ने दावा किया था कि उनके साथ ज़बरदस्ती की जा रही है और उन्हें घर से निकलने नहीं दिया जा रहा। घोष ने इस पर कहा कि पिछले आंदोलन में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया और जनजीवन बाधित हुआ था, इसलिए सरकार अग्रिम रूप से सतर्क और सख्त है।

उन्होंने जोड़ा, 'देश में लोगों को शांतिपूर्वक आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन उपद्रव बर्दाश्त नहीं होगा।'

नेपाल-श्रीलंका जैसी अस्थिरता का आरोप

घोष ने यह भी आरोप लगाया कि 'भारत में नेपाल और श्रीलंका जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश बहुत दिनों से हो रही है।' उन्होंने कहा कि जिस तरह इन देशों में तख्तापलट में सहयोग किया गया, उसी तरह भारत को भी अस्थिर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इसके खिलाफ कानून बनाने की तैयारी में है।

आलोचकों का कहना है कि घोष के इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया है। विपक्षी खेमे में इन बयानों को विरोध-प्रदर्शन से ध्यान भटकाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक तनाव और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके भीतर एक बड़ी रणनीति है — इमरजेंसी का हवाला देकर कांग्रेस की लोकतंत्र-रक्षक छवि को ऐतिहासिक रूप से चुनौती देना। विरोध-प्रदर्शनों को 'डराने-धमकाने' और 'तख्तापलट की कोशिश' से जोड़ना एक गंभीर आरोप है, जिसके लिए कोई सार्वजनिक साक्ष्य नहीं दिया गया। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस पहलू को चूक जाती है कि ऐसे बयान विपक्षी प्रदर्शनों के ठीक पहले क्यों आते हैं — यह आकस्मिक नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक संवाद है। जवाबदेही का तकाजा है कि घोष के नेपाल-श्रीलंका वाले आरोप को तथ्यात्मक जाँच की कसौटी पर परखा जाए, न कि केवल उद्धृत किया जाए।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलीप घोष ने मल्लिकार्जुन खड़गे पर क्या पलटवार किया?
घोष ने कहा कि मीडिया में बयान देने का अधिकार खड़गे को BJP ने ही दिया है और कांग्रेस को इमरजेंसी जैसे अपने इतिहास को याद करना चाहिए। उन्होंने खड़गे के 'लोकतंत्र खत्म करने' वाले बयान को कांग्रेस के खुद के संवैधानिक संस्थाओं के अपमान के इतिहास के संदर्भ में खारिज किया।
इंडी गठबंधन के दिल्ली विरोध पर घोष की क्या प्रतिक्रिया रही?
घोष ने कहा कि विपक्ष राष्ट्रपति के बुलाने पर नहीं आता, बातचीत से दूर रहता है, और अब सुप्रीम कोर्ट के पास भी प्रदर्शन करना चाहता है। उन्होंने इसे डराने-धमकाने की कोशिश करार दिया और कहा कि देश में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
ध्रुव राठी के आरोपों पर दिलीप घोष ने क्या कहा?
घोष ने कहा कि पिछले आंदोलन में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया था और जनजीवन बाधित हुआ था, इसलिए सरकार पहले से सतर्क और सख्त है। उन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार को स्वीकार किया, लेकिन उपद्रव बर्दाश्त न करने की बात कही।
घोष ने नेपाल और श्रीलंका का उल्लेख क्यों किया?
घोष ने आरोप लगाया कि भारत में नेपाल और श्रीलंका जैसी राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश लंबे समय से हो रही है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इस खतरे से निपटने के लिए नया कानून लाने पर विचार कर रही है, हालाँकि कोई ठोस विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।
यह विवाद किस राजनीतिक पृष्ठभूमि में आया है?
यह बयान ऐसे समय आया है जब इंडी गठबंधन देशभर में विरोध-प्रदर्शनों की तैयारी कर रहा है और खड़गे ने मोदी-शाह पर लोकतंत्र को खत्म करने का आरोप लगाया है। इमरजेंसी के 50 वर्ष पूरे होने के मौके पर BJP इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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