दिलीप घोष का राहुल गांधी पर सीधा वार: 'झारखंड क्यों नहीं गए, पीछे से नहीं लड़ी जाती लड़ाई'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने 12 अगस्त 2026 को उत्तर 24 परगना में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। घोष ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कठिन परिस्थितियों में मैदान में उतरने की बजाय दिल्ली में बैठकर बयानबाज़ी करते हैं।
मुख्य आरोप: झारखंड न जाने पर सवाल
घोष ने राहुल गांधी के झारखंड न पहुँचने को लेकर सीधे निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी कभी किसी का सामना नहीं करते और न ही आगे आते हैं। उनमें हिम्मत की कमी है। अगर उनमें हिम्मत होती, तो वे सिर्फ दिल्ली में जेन जी के पास नहीं जाते बल्कि झारखंड भी जाते।' घोष का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष की भूमिका और उपस्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है।
विपक्ष की ज़िम्मेदारी पर घोष का रुख
घोष ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में विपक्ष के नेता को बोलने का पूरा अधिकार है, लेकिन उनकी ज़िम्मेदारी केवल बयान देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता को संसद में आगे आकर सरकार से सवाल पूछने, अपनी बात रखने और मुद्दों पर बहस करने की ज़रूरत है। उनका सीधा संदेश था — 'लड़ाई पीछे से नहीं लड़ी जाती।'
ममता बनर्जी पर भी निशाना
घोष ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में हज़ारों करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार और आरजी कर अस्पताल की घटना को लेकर मुख्यमंत्री को जनता और विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ा है। घोष ने कहा कि ममता बनर्जी को यह नहीं मान लेना चाहिए कि वे हमेशा चुनाव जीतती रहेंगी, क्योंकि राज्य की जनता के बीच बदलाव की भावना दिखाई दे रही है।
तिरंगा यात्रा और राजनीतिक गतिविधि
घोष ने उत्तर 24 परगना में पश्चिम बंगाल के शहरों, गाँवों और अन्य इलाकों में उत्साह के साथ निकाली जा रही तिरंगा यात्राओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में सरकार की ओर से भी क्षेत्र में बड़ी रैलियों का आयोजन किया गया। गौरतलब है कि स्वतंत्रता दिवस से पहले राज्य में राजनीतिक सक्रियता तेज़ हो गई है।
आगे की राजनीतिक तस्वीर
दिलीप घोष के इस हमले को पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बढ़ती आक्रामकता के संदर्भ में देखा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि आरजी कर प्रकरण और कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए राजनीतिक चुनौती बनते जा रहे हैं।