बांग्लादेश में बच्चों पर अत्याचार: 2,038 लापता, 155 की मौत — माता-पिता में दहशत
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के बीच बच्चों की हत्या, अपहरण और यौन शोषण की घटनाओं ने अभिभावकों के बीच भय का माहौल पैदा कर दिया है। ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन एन ओ सालिश केंद्र (ASK) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2026 के बीच हत्या, बलात्कार, शारीरिक शोषण और अन्य हिंसक घटनाओं में 155 बच्चों की जान गई है। बांग्लादेशी पुलिस मुख्यालय के आँकड़ों के अनुसार, साल के पहले सात महीनों में 15,717 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 2,038 बच्चे अभी भी लापता हैं।
मुख्य घटनाक्रम: कुमिला और सुनामगंज की दर्दनाक घटनाएँ
18 सितंबर 2026 को कुमिला जिले में 13 वर्षीय इशियत शहरियार ओप्रातिम ने अपनी माँ से कहा कि वह दोस्तों के साथ तस्वीरें लेने जा रहा है — और फिर घर नहीं लौटा। लगभग 24 घंटे बाद विश्वविद्यालय परिसर के पास सनंदा पहाड़ियों से उसका शव बरामद किया गया। उसकी माँ नाहिदा बेगम, जो कुमिला यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर हैं, ने शोक में कहा, 'मेरा एक ही बेटा था। अब मेरे जीने का क्या मकसद है? वे आईफोन ले जा सकते थे, लेकिन उन्होंने मेरे बेटे को क्यों मारा? मुझे इसका जवाब चाहिए।'
उसी दिन सुनामगंज जिले के ताहिरपुर उपजिला में एक अलग त्रासदी सामने आई, जब एक ही परिवार के तीन बच्चों — जिनकी उम्र 10, सात और दो साल थी — के शव मिले। पुलिस के अनुसार, तीनों की हत्या कर दी गई थी।
धार्मिक संस्थानों में यौन शोषण का चिंताजनक पैटर्न
रिपोर्टों में रिहायशी धार्मिक संस्थानों से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामलों पर विशेष चिंता व्यक्त की गई है। ढाका के सावर इलाके में एक सात वर्षीय लड़के का कथित तौर पर उस मदरसे में लगभग छह महीने तक बार-बार यौन शोषण किया गया जहाँ वह रहता और पढ़ता था। रिपोर्ट के अनुसार, जब बच्चे ने एक शिक्षक से मदद माँगी, तो उस शिक्षक ने कथित तौर पर खुद शोषण किया और धमकी दी कि माता-पिता को बताने पर संस्थान से निकाल दिया जाएगा। इसके बाद बच्चे के पिता ने संस्थान के 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया, जिनमें कई शिक्षक भी शामिल हैं।
आँकड़े बताते हैं: 15,000 से अधिक बच्चे लापता
बांग्लादेश पुलिस मुख्यालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जनवरी से जुलाई 2026 के बीच 15,717 बच्चे लापता हुए। इनमें से 13,679 बच्चों का पता लगा लिया गया, लेकिन 2,038 बच्चे — कुल संख्या का लगभग 13 प्रतिशत — अभी भी लापता हैं। बांग्लादेश के प्रमुख अखबार 'द डेली स्टार' ने भी विभिन्न मीडिया स्रोतों के हवाले से इन आँकड़ों की पुष्टि की है।
आम जनता पर असर: अभिभावकों की बेचैनी
ढाका की एक माँ ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'लगभग हर दूसरे दिन हम अपने कीमती बच्चों को खो रहे हैं। यहाँ कोई कानून-व्यवस्था नहीं है। कोई देश इस तरह नहीं चल सकता।' ढाका में नौ वर्षीय बच्चे की माँ शेउली अख्तर ने कहा, 'हम अभी बांग्लादेश में मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। हमारे बच्चे अपने ही देश में सुरक्षित नहीं हैं।'
यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और संस्थागत कमज़ोरी का दौर चल रहा है। कानून-व्यवस्था की खराब होती स्थिति न केवल बच्चों, बल्कि पूरे नागरिक समाज के लिए गहरी चिंता का विषय बन गई है।
क्या होगा आगे
मानवाधिकार संगठनों ने बांग्लादेश सरकार से बाल सुरक्षा कानूनों को सख्त करने और लापता बच्चों की तलाश के लिए विशेष तंत्र स्थापित करने की माँग की है। गौरतलब है कि ASK जैसी संस्थाओं की रिपोर्टें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रही हैं, और विशेषज्ञों का मानना है कि बिना ठोस संस्थागत सुधार के ये आँकड़े और बिगड़ सकते हैं।