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बांग्लादेश में बच्चों पर बढ़ता खतरा: 10 में से 9 मामलों में आरोपी परिचित, रिपोर्ट में चौंकाने वाले आँकड़े

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बांग्लादेश में बच्चों पर बढ़ता खतरा: 10 में से 9 मामलों में आरोपी परिचित, रिपोर्ट में चौंकाने वाले आँकड़े

सारांश

बांग्लादेश में बच्चों के खिलाफ हिंसा का सबसे बड़ा खतरा अजनबियों से नहीं, बल्कि घर और मोहल्ले से आता है। शिशुराई शोब की रिपोर्ट बताती है कि 10 में से 9 आरोपी परिचित हैं — और 2025 में 10 फीसदी मामलों में पीड़ित बच्चों को सबूत मिटाने के लिए मार दिया गया।

मुख्य बातें

शिशुराई शोब की रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश में बच्चों के खिलाफ 10 में से 9 अपराध परिचित लोगों द्वारा किए जाते हैं।
दर्ज बलात्कार मामलों में 40.58% के लिए करीबी पड़ोसी जिम्मेदार — 308 में से 125 घटनाएँ ।
ढाका के पल्लबी में 8 साल की बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या; नेत्रोकोना में 11 साल की बच्ची 7 महीने की गर्भवती।
ASK की रिपोर्ट: जनवरी–अप्रैल में 81 बलात्कार पीड़ितों में से 56 (करीब 70% ) 0–12 साल के बच्चे।
2025 में बाल बलात्कार के लगभग 10% मामलों में पीड़ितों को सबूत मिटाने के लिए मारा गया; ASK ने 11 ऐसे मामले दर्ज किए।
विशेषज्ञों के अनुसार सजा की अनिश्चितता और सामाजिक वस्तुकरण इस हिंसा को बनाए रखने वाले प्रमुख कारण हैं।

बांग्लादेश में बच्चों के खिलाफ हिंसा के मामलों में परिचित लोगों की भूमिका चिंताजनक रूप से सामने आई है — बाल अधिकार संगठन शिशुराई शोब की रिपोर्ट के अनुसार, 10 में से 9 मामलों में आरोपी पीड़ित बच्चे के जाने-पहचाने दायरे से ही होते हैं। ढाका के पल्लबी इलाके और नेत्रोकोना जिले में हाल ही में सामने आई दो क्रूर घटनाओं ने इस संकट को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

हाल की घटनाएँ जिन्होंने झकझोरा

19 मई को ढाका के पल्लबी इलाके में आठ साल की एक बच्ची की सिर कटी लाश एक पड़ोसी के घर से बरामद हुई। बच्ची के साथ बलात्कार के बाद हत्या की गई थी। इसी दौरान नेत्रोकोना जिले में 11 साल की एक बच्ची के यौन शोषण का मामला सामने आया, जिसके परिणामस्वरूप वह सात महीने की गर्भवती हो गई।

बांग्लादेशी अखबार 'द डेली स्टार' के अनुसार, ये घटनाएँ अकेली नहीं हैं, बल्कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा के एक व्यापक और गहरे पैटर्न का हिस्सा हैं।

रिपोर्ट के चौंकाने वाले आँकड़े

शिशुराई शोब ने मार्च 2025 में जारी अपनी रिपोर्ट में — जो 2025 में प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के विश्लेषण पर आधारित थी — यह स्थापित किया कि 'अजनबी से खतरे' की प्रचलित धारणा तथ्यों से मेल नहीं खाती। रिपोर्ट के अनुसार दर्ज बलात्कार मामलों में से 40.58 फीसदी के लिए करीबी पड़ोसी जिम्मेदार थे — 308 में से 125 घटनाएँ उन्हीं से जुड़ी थीं।

इसके बाद 21.43 फीसदी जान-पहचान वाले, 14.61 फीसदी शिक्षक या धार्मिक गुरु और 13.64 फीसदी करीबी रिश्तेदार आरोपी पाए गए। इसके विपरीत, केवल 9.74 फीसदी मामलों में आरोपी अजनबी थे।

घर ही बना सबसे असुरक्षित जगह

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बच्चों के खिलाफ हिंसा की अधिकांश घटनाएँ घरेलू या पारिवारिक माहौल में होती हैं। 124 बाल हत्याओं में से लगभग 66.12 फीसदी और यौन शोषण के 308 मामलों में से 59.09 फीसदी घर या परिवार के परिवेश में हुए।

ढाका की संस्था ऐन ओ सलीश केंद्र (ASK) की जनवरी से अप्रैल तक की रिपोर्ट के मुताबिक, 81 बलात्कार पीड़ितों में से 56 — यानी लगभग 70 फीसदी0 से 12 साल के बच्चे थे। इसी अवधि में मारे गए 115 बच्चों में से 63 की उम्र 0 से 12 साल के बीच थी।

सबूत मिटाने के लिए हत्या का खतरनाक चलन

2025 में बच्चों के बलात्कार के लगभग 10 फीसदी मामलों में पीड़ितों को सबूत मिटाने की कोशिश में मार दिया गया। ASK ने अकेले जनवरी से अप्रैल के बीच बलात्कार के बाद हत्या के 11 मामले दर्ज किए।

ढाका विश्वविद्यालय में अपराध विज्ञान की सहायक प्रोफेसर सुमैया इकबाल ने इसे 'गवाह को खत्म करना' कहा। उन्होंने कहा, 'वे सबूत छिपाने की कोशिश करते हैं और ऐसा करते हुए, कई पीड़ितों को मार दिया जाता है क्योंकि वे मुख्य गवाह होते हैं।'

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

शिशुराई शोब की संयोजक लैला खोंडकर के अनुसार, 'बच्चों के साथ ज्यादातर जाने-पहचाने लोग — परिवार, शिक्षक, कोच या पड़ोसी — गलत काम करते हैं, जो बच्चों के बिना देखरेख के आसानी से मिलने का फायदा उठाते हैं। हमें अपराधियों के मनोविज्ञान को समझने और इन अपराधों के पीछे बढ़ती सामाजिक क्रूरता को समझने के लिए तुरंत शोध की जरूरत है। बांग्लादेश में वह विश्लेषण अभी भी नहीं हुआ है।'

प्रोफेसर सुमैया इकबाल ने चेताया, 'अगर सजा एक जैसी और पक्की नहीं है, तो रोकथाम नाकाम हो जाती है। सजा से छूट के साथ-साथ और भी गहरे सामाजिक मुद्दे हैं: समाज महिलाओं और बच्चियों को कैसे देखता है और यौन वस्तुकरण कैसे सामान्य हो जाता है — ये ऐसा माहौल बनाते हैं जहाँ हिंसा बनी रह सकती है।' यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में बाल सुरक्षा तंत्र की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की उस सामाजिक विफलता को उजागर करते हैं जहाँ बाल सुरक्षा की बात होती है, लेकिन जवाबदेही तंत्र खोखला रहता है। गौरतलब है कि 'अजनबी खतरनाक होते हैं' की रूढ़ धारणा न केवल भ्रामक है, बल्कि यह असली खतरे — घर और मोहल्ले के भीतर — से ध्यान भटकाती है। बांग्लादेश में 10 फीसदी पीड़ितों की सबूत मिटाने के लिए हत्या यह दर्शाती है कि दंड से छूट की संस्कृति कितनी गहरी जड़ें जमा चुकी है। जब तक अपराध विज्ञान-आधारित शोध और सत्यापन-योग्य सजा ढाँचा नहीं बनता, ये आँकड़े हर साल बढ़ते ही रहेंगे।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में बच्चों के खिलाफ हिंसा के मामलों में परिचितों की भूमिका कितनी है?
शिशुराई शोब की रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश में बच्चों के खिलाफ होने वाले 10 में से 9 अपराधों में आरोपी पीड़ित के परिचित दायरे से होते हैं। दर्ज बलात्कार मामलों में 40.58% के लिए करीबी पड़ोसी जिम्मेदार पाए गए, जबकि अजनबियों की हिस्सेदारी केवल 9.74% रही।
ढाका पल्लबी और नेत्रोकोना में हाल में क्या घटनाएँ हुईं?
19 मई को ढाका के पल्लबी इलाके में 8 साल की बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई और उसकी सिर कटी लाश एक पड़ोसी के घर से मिली। नेत्रोकोना जिले में 11 साल की बच्ची के यौन शोषण का मामला सामने आया, जिसके कारण वह 7 महीने की गर्भवती हो गई।
बांग्लादेश में बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा कहाँ से है?
रिपोर्ट के अनुसार बच्चों की 124 हत्याओं में से 66.12% और यौन शोषण के 308 मामलों में से 59.09% घर या पारिवारिक माहौल में हुए। ASK की रिपोर्ट बताती है कि जनवरी–अप्रैल 2025 में 81 बलात्कार पीड़ितों में से करीब 70% 0 से 12 साल के बच्चे थे।
बांग्लादेश में बाल पीड़ितों की हत्या का क्या कारण बताया गया है?
ढाका विश्वविद्यालय की अपराध विज्ञान की सहायक प्रोफेसर सुमैया इकबाल के अनुसार अपराधी सबूत मिटाने के लिए पीड़ित बच्चों को मार देते हैं, क्योंकि वे मुख्य गवाह होते हैं। 2025 में बाल बलात्कार के करीब 10% मामलों में पीड़ितों की इसी कारण हत्या की गई।
बांग्लादेश में बाल सुरक्षा के लिए विशेषज्ञ क्या सुझाव दे रहे हैं?
शिशुराई शोब की संयोजक लैला खोंडकर ने अपराधियों के मनोविज्ञान और सामाजिक क्रूरता पर तत्काल शोध की माँग की है। प्रोफेसर सुमैया इकबाल ने कहा कि सजा की निश्चितता और सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव के बिना रोकथाम संभव नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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