बांग्लादेश में तीन महीनों में महिला-बाल हिंसा के 5,448 मामले दर्ज, जांच में गंभीर देरी
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध हिंसा के मामलों में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है। पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च से मई 2026 के बीच महज तीन महीनों में महिला-बाल सुरक्षा (निरोध अधिनियम) के तहत 5,448 मामले दर्ज किए गए हैं। स्थानीय मीडिया द्वारा सामने लाए गए ये आंकड़े ढाका सहित पूरे देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
ढाका में मामले और चार्जशीट की स्थिति
बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, ढाका मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में दर्ज 413 मामलों में से केवल 65 मामलों में ही तीन महीनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जा सकी। 10 मामलों को जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट के साथ बंद कर दिया गया, क्योंकि आरोपियों की संलिप्तता प्रमाणित नहीं हो सकी।
ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) के अधीन 50 थानों में इसी अवधि के दौरान 178 बलात्कार के मामले दर्ज हुए, जिनमें 115 पीड़ित महिलाएं और 63 पीड़ित बच्चे शामिल थे।
जांच में देरी की समस्या
रिपोर्टों के अनुसार, बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर मामले महीनों, और कभी-कभी वर्षों तक जांच के चरण में ही अटके रहते हैं। गौरतलब है कि बांग्लादेश के कानून में जांच 15 कार्यदिवसों में पूरी करने का स्पष्ट प्रावधान है, परंतु यह समयसीमा अक्सर पूरी नहीं हो पाती।
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन मामलों को मीडिया उठाता है या जो मानवाधिकार संगठनों की निगरानी में आते हैं, उनकी जांच अपेक्षाकृत तेज़ी से होती है, जबकि बाकी मामले प्रायः धीमे पड़ जाते हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
अवामी लीग ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि देश में सार्वजनिक परिवहन, कार्यस्थलों और सड़कों पर महिलाओं के विरुद्ध उत्पीड़न और हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। पार्टी ने विशेषज्ञों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि जब भी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सत्ता में रही है, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जोखिम बढ़ा है।
अवामी लीग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, यह राज्य की बुनियादी जिम्मेदारी है। हर बेटी को बिना डर के सड़क पर चलने का अधिकार है।'
स्वतंत्र सांसद की चिंता और टीआईबी के आंकड़े
स्वतंत्र सांसद रूमीन फरहाना ने भी देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि हाल के महीनों में हिंसा, अपहरण और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में वृद्धि हुई है। उन्होंने ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (टीआईबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार के शुरुआती 100 दिनों में ही अपराधों में तेज बढ़ोतरी देखी गई।
यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक तनाव से जूझ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक जांच तंत्र को मजबूत नहीं किया जाता और समयसीमा का पालन सुनिश्चित नहीं होता, तब तक आंकड़े और भी विकराल होते रहेंगे।