4 अगस्त 2026
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बांग्लादेश में तीन महीनों में महिला-बाल हिंसा के 5,448 मामले दर्ज, जांच में गंभीर देरी

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बांग्लादेश में तीन महीनों में महिला-बाल हिंसा के 5,448 मामले दर्ज, जांच में गंभीर देरी

सारांश

बांग्लादेश में सिर्फ तीन महीनों में महिला-बाल हिंसा के 5,448 मामले — और ढाका में 413 में से केवल 65 में चार्जशीट। कानून 15 दिन की जांच कहता है, ज़मीनी हकीकत महीनों-सालों की देरी। आंकड़े सिस्टम की विफलता की कहानी कह रहे हैं।

मुख्य बातें

पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार मार्च से मई 2026 के बीच महिला-बाल सुरक्षा अधिनियम के तहत 5,448 मामले दर्ज किए गए।
ढाका मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में 413 मामलों में से केवल 65 में तीन महीनों के भीतर चार्जशीट दाखिल हुई।
डीएमपी के 50 थानों में 178 बलात्कार के मामले दर्ज — 115 महिलाएं और 63 बच्चे पीड़ित।
बांग्लादेश कानून में जांच 15 कार्यदिवसों में पूरी करने का प्रावधान, लेकिन अक्सर महीनों-वर्षों की देरी।
स्वतंत्र सांसद रूमीन फरहाना ने टीआईबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार के पहले 100 दिनों में अपराध वृद्धि की बात कही।

बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध हिंसा के मामलों में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है। पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च से मई 2026 के बीच महज तीन महीनों में महिला-बाल सुरक्षा (निरोध अधिनियम) के तहत 5,448 मामले दर्ज किए गए हैं। स्थानीय मीडिया द्वारा सामने लाए गए ये आंकड़े ढाका सहित पूरे देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

ढाका में मामले और चार्जशीट की स्थिति

बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, ढाका मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में दर्ज 413 मामलों में से केवल 65 मामलों में ही तीन महीनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जा सकी। 10 मामलों को जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट के साथ बंद कर दिया गया, क्योंकि आरोपियों की संलिप्तता प्रमाणित नहीं हो सकी।

ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) के अधीन 50 थानों में इसी अवधि के दौरान 178 बलात्कार के मामले दर्ज हुए, जिनमें 115 पीड़ित महिलाएं और 63 पीड़ित बच्चे शामिल थे।

जांच में देरी की समस्या

रिपोर्टों के अनुसार, बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर मामले महीनों, और कभी-कभी वर्षों तक जांच के चरण में ही अटके रहते हैं। गौरतलब है कि बांग्लादेश के कानून में जांच 15 कार्यदिवसों में पूरी करने का स्पष्ट प्रावधान है, परंतु यह समयसीमा अक्सर पूरी नहीं हो पाती।

विशेषज्ञों का कहना है कि जिन मामलों को मीडिया उठाता है या जो मानवाधिकार संगठनों की निगरानी में आते हैं, उनकी जांच अपेक्षाकृत तेज़ी से होती है, जबकि बाकी मामले प्रायः धीमे पड़ जाते हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

अवामी लीग ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि देश में सार्वजनिक परिवहन, कार्यस्थलों और सड़कों पर महिलाओं के विरुद्ध उत्पीड़न और हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। पार्टी ने विशेषज्ञों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि जब भी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सत्ता में रही है, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जोखिम बढ़ा है।

अवामी लीग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, यह राज्य की बुनियादी जिम्मेदारी है। हर बेटी को बिना डर के सड़क पर चलने का अधिकार है।'

स्वतंत्र सांसद की चिंता और टीआईबी के आंकड़े

स्वतंत्र सांसद रूमीन फरहाना ने भी देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि हाल के महीनों में हिंसा, अपहरण और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में वृद्धि हुई है। उन्होंने ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (टीआईबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार के शुरुआती 100 दिनों में ही अपराधों में तेज बढ़ोतरी देखी गई।

यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक तनाव से जूझ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक जांच तंत्र को मजबूत नहीं किया जाता और समयसीमा का पालन सुनिश्चित नहीं होता, तब तक आंकड़े और भी विकराल होते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

448 मामले तीन महीनों में — यह आंकड़ा अकेले ही बांग्लादेश के महिला सुरक्षा तंत्र की पोल खोलता है। लेकिन असली समस्या संख्या नहीं, जवाबदेही का अभाव है: 413 में से केवल 65 चार्जशीट यह बताती हैं कि दर्ज होना और न्याय मिलना दो अलग-अलग दुनियाएं हैं। विशेषज्ञों की यह टिप्पणी कि मीडिया-कवर मामलों में जांच तेज होती है, एक खतरनाक असमानता को उजागर करती है — जहाँ न्याय की रफ्तार पीड़ित की सामाजिक दृश्यता पर निर्भर हो। जब तक जांच की समयसीमा कानूनी बाध्यता नहीं बनती और उल्लंघन पर जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक ये आंकड़े हर तिमाही बढ़ते ही रहेंगे।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में तीन महीनों में महिला-बाल हिंसा के कितने मामले दर्ज हुए?
पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च से मई 2026 के बीच महिला-बाल सुरक्षा (निरोध अधिनियम) के तहत 5,448 मामले दर्ज किए गए। इनमें ढाका मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के 413 मामले भी शामिल हैं।
ढाका में बलात्कार के कितने मामले दर्ज हुए और पीड़ित कौन थे?
डीएमपी के 50 थानों में इस अवधि में 178 बलात्कार के मामले दर्ज हुए, जिनमें 115 पीड़ित महिलाएं और 63 पीड़ित बच्चे थे। ढाका के 413 मामलों में से केवल 65 में तीन महीनों के भीतर चार्जशीट दाखिल हो सकी।
बांग्लादेश में महिला हिंसा मामलों की जांच में देरी क्यों होती है?
बांग्लादेश कानून में जांच 15 कार्यदिवसों में पूरी करने का प्रावधान है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार यह समयसीमा अक्सर पूरी नहीं हो पाती। विशेषज्ञों के अनुसार, मीडिया या मानवाधिकार संगठनों की नजर में आए मामलों में जांच तेज होती है, बाकी मामले धीमे पड़ जाते हैं।
रूमीन फरहाना ने बांग्लादेश में महिला सुरक्षा पर क्या कहा?
स्वतंत्र सांसद रूमीन फरहाना ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि हाल के महीनों में हिंसा, अपहरण और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में वृद्धि हुई है। उन्होंने ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (टीआईबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार के पहले 100 दिनों में अपराध वृद्धि की बात उठाई।
अवामी लीग ने बांग्लादेश में महिला हिंसा पर क्या रुख अपनाया?
अवामी लीग ने महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई और आरोप लगाया कि बीएनपी के सत्ता में रहने के दौरान महिलाओं के लिए जोखिम बढ़ता है। पार्टी ने एक्स पर लिखा कि महिला सुरक्षा राज्य की बुनियादी जिम्मेदारी है, न कि राजनीतिक मुद्दा।
राष्ट्र प्रेस
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