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बांग्लादेश में 8 महीनों में 155 बच्चों की मौत, 15,717 लापता — मानवाधिकार रिपोर्ट

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बांग्लादेश में 8 महीनों में 155 बच्चों की मौत, 15,717 लापता — मानवाधिकार रिपोर्ट

सारांश

बांग्लादेश में आठ महीनों में 155 बच्चों की मौत और 15,717 का लापता होना — ये सिर्फ आंकड़े नहीं, एक गहरे सामाजिक संकट की चेतावनी है। मानवाधिकार संस्था आस्क की रिपोर्ट बताती है कि हत्यारे अक्सर परिचित होते हैं और न्यायिक ढिलाई अपराध को बढ़ावा दे रही है।

मुख्य बातें

ढाका की मानवाधिकार संस्था आस्क के अनुसार जनवरी-अगस्त 2026 में बांग्लादेश में 155 बच्चों की मौत हिंसा की विभिन्न घटनाओं में हुई।
68 बच्चों की मौत शारीरिक शोषण से, 49 की पारिवारिक हिंसा में, 26 की दुष्कर्म के बाद हत्या से हुई।
बांग्लादेश पुलिस मुख्यालय के अनुसार जनवरी-जुलाई 2026 में 15,717 बच्चे लापता हुए; 2,038 अभी भी लापता हैं।
पबना में 10 वर्षीय और जमालपुर में 7 वर्षीय बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या, दोनों मामलों में गिरफ्तारियाँ हुईं।
कई मामलों में आरोपी पीड़ित बच्चों के परिचित या पड़ोसी पाए गए।
आस्क ने आत्महत्या और रहस्यमय मौतों के 99 अतिरिक्त मामले भी दर्ज किए।

बांग्लादेश में जनवरी से अगस्त 2026 के बीच महज आठ महीनों में 155 बच्चों की मौत अपहरण के बाद हत्या, यौन शोषण, शारीरिक उत्पीड़न और पारिवारिक हिंसा जैसी जघन्य घटनाओं में हो गई। ढाका की प्रमुख मानवाधिकार संस्था 'एन ओ सालिश केंद्र' (आस्क) ने यह चिंताजनक आंकड़े सार्वजनिक करते हुए देश में बच्चों की सुरक्षा की भयावह तस्वीर उजागर की है।

मौतों का विवरण: किसने, कैसे छीनी मासूमों की जान

आस्क के आंकड़ों के अनुसार, 68 बच्चों की जान शारीरिक शोषण के कारण गई, जबकि 49 की मौत पारिवारिक हिंसा से जुड़ी घटनाओं में दर्ज की गई। 26 बच्चों की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई और 4 मासूमों की जान दुष्कर्म की कोशिश के बाद गई।

लापता हुए 36 बच्चों के शव बाद में बरामद हुए। 3 बच्चों को गोली मारकर मार डाला गया, 2 घरेलू कामगार बच्चों की मौत शारीरिक उत्पीड़न से हुई, 2 को पीछा करने वालों (स्टॉकर) ने मार डाला और 1 की हत्या अपहरण के बाद की गई। संस्था ने इसी अवधि में आत्महत्या, रहस्यमय मौतों और बच्चों के शव मिलने के 99 अतिरिक्त मामले भी रिकॉर्ड किए।

हालिया मामले: पबना और जमालपुर की दर्दनाक घटनाएं

9 सितंबर 2026 को पबना सदर से एक 10 वर्षीय बच्ची लापता हुई। सात दिन बाद उसका शव एक पोखर में मिला। पुलिस के अनुसार बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की गई थी और इस मामले में 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

10 सितंबर को जमालपुर के मदारगंज में स्कूल जाने के बाद एक 7 वर्षीय बच्ची लापता हुई। अगले दिन उसका शव उसके सहपाठी के घर की फर्श के नीचे दबा मिला। पुलिस के अनुसार सहपाठी के पिता ने दुष्कर्म के बाद हत्या की थी। इस मामले में भी 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया। एक विशेष रूप से चिंताजनक पहलू यह है कि कई मामलों में आरोपी पीड़ित बच्चों के परिचित या पड़ोसी निकले।

लापता बच्चों का संकट: 15,717 की संख्या

बांग्लादेश पुलिस मुख्यालय ने इस महीने की शुरुआत में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि वर्ष के पहले सात महीनों (जनवरी-जुलाई) में देशभर में 15,717 बच्चे लापता हुए। इनमें से 13,679 का पता लगा लिया गया, परंतु 2,038 बच्चे अभी भी लापता हैं — जो कुल संख्या का लगभग 13 प्रतिशत है।

यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश राजनीतिक अस्थिरता और संस्थागत कमज़ोरियों के दौर से गुज़र रहा है, जिसके चलते बाल संरक्षण तंत्र पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि ये आंकड़े केवल दर्ज मामलों पर आधारित हैं — वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।

हिंसा का व्यापक पैटर्न

आस्क की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि बच्चों के खिलाफ हिंसा कोई छिटपुट घटना नहीं बल्कि एक संगठित सामाजिक संकट का रूप ले चुकी है। इसमें रेप के बाद हत्या, जानलेवा शारीरिक शोषण और परिवार के साथ बच्चों की सामूहिक हत्या जैसी घटनाएं शामिल हैं। 4 अलग-अलग घटनाओं में परिवार के अन्य सदस्यों के साथ 7 बच्चों की भी हत्या की गई।

मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति और कानून के ढीले क्रियान्वयन ने अपराधियों के मन से कानून का डर कम किया है। बांग्लादेश में बाल संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की माँग तेज़ होती जा रही है।

आगे क्या होगा

आस्क और अन्य नागरिक समाज संगठन बांग्लादेश सरकार से बाल सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने, लापता बच्चों की त्वरित खोज के लिए विशेष दल गठित करने और यौन अपराधियों के खिलाफ त्वरित अदालती सुनवाई सुनिश्चित करने की माँग कर रहे हैं। आने वाले महीनों में यह मुद्दा बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय छवि और मानवाधिकार समीक्षाओं में केंद्रीय स्थान ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

717 बच्चे लापता हुए — यानी प्रतिदिन औसतन 75 से अधिक। यह संख्या किसी आपातकाल से कम नहीं, फिर भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार दोनों की प्रतिक्रिया इस गंभीरता के अनुरूप नहीं रही है। चिंताजनक यह भी है कि अधिकतर मामलों में अपराधी पीड़ित के परिचित हैं — जो यह संकेत देता है कि समस्या केवल कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि सामाजिक जवाबदेही और न्यायिक निवारण की भी है। बिना त्वरित अदालती सुनवाई और मज़बूत बाल संरक्षण ढाँचे के, ये आंकड़े अगले साल और बदतर होने का जोखिम उठाते हैं।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में इस साल कितने बच्चों की मौत हुई और कितने लापता हैं?
मानवाधिकार संस्था आस्क के अनुसार जनवरी से अगस्त 2026 के बीच 155 बच्चों की मौत हिंसा की विभिन्न घटनाओं में हुई। बांग्लादेश पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से जुलाई के बीच 15,717 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 2,038 अभी भी अज्ञात हैं।
'एन ओ सालिश केंद्र' (आस्क) क्या है और इसकी रिपोर्ट क्यों अहम है?
आस्क ढाका स्थित एक स्वतंत्र मानवाधिकार संस्था है जो बांग्लादेश में बाल अधिकार, महिला अधिकार और न्याय-संबंधी मुद्दों पर नज़र रखती है। इसकी रिपोर्ट सरकारी और मीडिया स्रोतों पर आधारित होती है और इसे नीति-निर्माताओं तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा संदर्भ के रूप में उपयोग किया जाता है।
बांग्लादेश के पबना और जमालपुर में हाल में कौन-सी घटनाएं हुईं?
9 सितंबर को पबना सदर से लापता 10 वर्षीय बच्ची का शव सात दिन बाद पोखर में मिला; पुलिस के अनुसार दुष्कर्म के बाद हत्या की गई और 2 गिरफ्तारियाँ हुईं। 10 सितंबर को जमालपुर के मदारगंज में 7 वर्षीय बच्ची का शव सहपाठी के घर की फर्श के नीचे मिला; आरोपी सहपाठी के पिता को गिरफ्तार किया गया।
बांग्लादेश में बच्चों के लापता होने की समस्या इतनी गंभीर क्यों है?
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार जनवरी-जुलाई 2026 के बीच प्रतिदिन औसतन 75 से अधिक बच्चे लापता हुए। कमज़ोर बाल संरक्षण तंत्र, राजनीतिक अस्थिरता और न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति इस संकट को और गहरा बनाती है। कई मामलों में आरोपी परिचित निकले, जो सामाजिक जवाबदेही की गंभीर कमी दर्शाता है।
इन घटनाओं के बाद बांग्लादेश सरकार और नागरिक समाज की क्या माँगें हैं?
आस्क और अन्य नागरिक समाज संगठन बाल सुरक्षा कानूनों के कड़े क्रियान्वयन, लापता बच्चों की तलाश के लिए विशेष दल और यौन अपराधों में त्वरित न्यायिक सुनवाई की माँग कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं द्वारा भी बांग्लादेश सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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