बांग्लादेश में 8 महीनों में 155 बच्चों की मौत, 15,717 लापता — मानवाधिकार रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में जनवरी से अगस्त 2026 के बीच महज आठ महीनों में 155 बच्चों की मौत अपहरण के बाद हत्या, यौन शोषण, शारीरिक उत्पीड़न और पारिवारिक हिंसा जैसी जघन्य घटनाओं में हो गई। ढाका की प्रमुख मानवाधिकार संस्था 'एन ओ सालिश केंद्र' (आस्क) ने यह चिंताजनक आंकड़े सार्वजनिक करते हुए देश में बच्चों की सुरक्षा की भयावह तस्वीर उजागर की है।
मौतों का विवरण: किसने, कैसे छीनी मासूमों की जान
आस्क के आंकड़ों के अनुसार, 68 बच्चों की जान शारीरिक शोषण के कारण गई, जबकि 49 की मौत पारिवारिक हिंसा से जुड़ी घटनाओं में दर्ज की गई। 26 बच्चों की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई और 4 मासूमों की जान दुष्कर्म की कोशिश के बाद गई।
लापता हुए 36 बच्चों के शव बाद में बरामद हुए। 3 बच्चों को गोली मारकर मार डाला गया, 2 घरेलू कामगार बच्चों की मौत शारीरिक उत्पीड़न से हुई, 2 को पीछा करने वालों (स्टॉकर) ने मार डाला और 1 की हत्या अपहरण के बाद की गई। संस्था ने इसी अवधि में आत्महत्या, रहस्यमय मौतों और बच्चों के शव मिलने के 99 अतिरिक्त मामले भी रिकॉर्ड किए।
हालिया मामले: पबना और जमालपुर की दर्दनाक घटनाएं
9 सितंबर 2026 को पबना सदर से एक 10 वर्षीय बच्ची लापता हुई। सात दिन बाद उसका शव एक पोखर में मिला। पुलिस के अनुसार बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की गई थी और इस मामले में 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
10 सितंबर को जमालपुर के मदारगंज में स्कूल जाने के बाद एक 7 वर्षीय बच्ची लापता हुई। अगले दिन उसका शव उसके सहपाठी के घर की फर्श के नीचे दबा मिला। पुलिस के अनुसार सहपाठी के पिता ने दुष्कर्म के बाद हत्या की थी। इस मामले में भी 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया। एक विशेष रूप से चिंताजनक पहलू यह है कि कई मामलों में आरोपी पीड़ित बच्चों के परिचित या पड़ोसी निकले।
लापता बच्चों का संकट: 15,717 की संख्या
बांग्लादेश पुलिस मुख्यालय ने इस महीने की शुरुआत में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि वर्ष के पहले सात महीनों (जनवरी-जुलाई) में देशभर में 15,717 बच्चे लापता हुए। इनमें से 13,679 का पता लगा लिया गया, परंतु 2,038 बच्चे अभी भी लापता हैं — जो कुल संख्या का लगभग 13 प्रतिशत है।
यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश राजनीतिक अस्थिरता और संस्थागत कमज़ोरियों के दौर से गुज़र रहा है, जिसके चलते बाल संरक्षण तंत्र पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि ये आंकड़े केवल दर्ज मामलों पर आधारित हैं — वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।
हिंसा का व्यापक पैटर्न
आस्क की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि बच्चों के खिलाफ हिंसा कोई छिटपुट घटना नहीं बल्कि एक संगठित सामाजिक संकट का रूप ले चुकी है। इसमें रेप के बाद हत्या, जानलेवा शारीरिक शोषण और परिवार के साथ बच्चों की सामूहिक हत्या जैसी घटनाएं शामिल हैं। 4 अलग-अलग घटनाओं में परिवार के अन्य सदस्यों के साथ 7 बच्चों की भी हत्या की गई।
मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति और कानून के ढीले क्रियान्वयन ने अपराधियों के मन से कानून का डर कम किया है। बांग्लादेश में बाल संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की माँग तेज़ होती जा रही है।
आगे क्या होगा
आस्क और अन्य नागरिक समाज संगठन बांग्लादेश सरकार से बाल सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने, लापता बच्चों की त्वरित खोज के लिए विशेष दल गठित करने और यौन अपराधियों के खिलाफ त्वरित अदालती सुनवाई सुनिश्चित करने की माँग कर रहे हैं। आने वाले महीनों में यह मुद्दा बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय छवि और मानवाधिकार समीक्षाओं में केंद्रीय स्थान ले सकता है।