26 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नालसार लॉ यूनिवर्सिटी में उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग पर भाजपा का विरोध, 'हनुमान अंश' दिखाने की माँग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नालसार लॉ यूनिवर्सिटी में उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग पर भाजपा का विरोध, 'हनुमान अंश' दिखाने की माँग

सारांश

हैदराबाद के नालसार लॉ विश्वविद्यालय में बिना अनुमति के उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। एबीवीपी के विरोध के बाद भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी और 'हनुमान अंश' फिल्म दिखाने की माँग उठाई — विश्वविद्यालय परिसरों में अभिव्यक्ति और अनुशासन की बहस एक बार फिर केंद्र में आ गई।

मुख्य बातें

नालसार लॉ विश्वविद्यालय, हैदराबाद में 26 सितंबर 2026 को उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की गई।
विश्वविद्यालय के डीन ने स्पष्ट किया कि इस आयोजन के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी।
एबीवीपी (ABVP) ने स्क्रीनिंग का विरोध किया; भाजपा नेता मनमीत सिंह ने 'हनुमान अंश' फिल्म दिखाने की माँग उठाई।
भाजपा नेता विनूषा ने कहा कि देश में 3.7 लाख से अधिक विचाराधीन कैदी हैं, फिर भी उमर खालिद को चुना गया।
उमर खालिद पर 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के आरोप हैं जिनमें 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी; मामला अदालत में विचाराधीन है।

हैदराबाद के नालसार लॉ विश्वविद्यालय में 26 सितंबर 2026 को जेएनयू के पूर्व छात्र और विचाराधीन कैदी उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की गई, जिसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने विरोध दर्ज कराया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इस आयोजन के लिए संस्थान के डीन से कोई अनुमति नहीं ली गई थी।

आयोजन का विवरण और विवाद

बताया गया है कि इस स्क्रीनिंग की सूचना छात्रों को ईमेल के माध्यम से दी गई थी। इसे 'आर्ट डॉक्यूमेंट्री' के नाम पर आयोजित किया गया था। विश्वविद्यालय के डीन की ओर से स्पष्ट किया गया कि इस कार्यक्रम के लिए आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी। उमर खालिद फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं और उन पर 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोप हैं, जिसमें 50 से अधिक लोगों की जान गई थी।

भाजपा नेता मनमीत सिंह की प्रतिक्रिया

भाजपा नेता मनमीत सिंह ने कहा, 'जेएनयू के पूर्व छात्र और तिहाड़ जेल में बंद उमर खालिद ने 2016 में जेएनयू में दंगे कराने की कोशिश की। नालसार लॉ विश्वविद्यालय में 'आर्ट डॉक्यूमेंट्री' प्ले करने के नाम पर एक इवेंट ऑर्गनाइज किया गया था, जबकि विश्वविद्यालय के डीन की ओर से कहा गया कि इसकी अनुमति नहीं ली गई थी।' उन्होंने यह भी माँग की कि उस परिसर में 'हनुमान अंश' फिल्म दिखाई जाए और कहा कि तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ऐसे आयोजन हो रहे हैं।

भाजपा नेता विनूषा की कड़ी आपत्ति

भाजपा नेता विनूषा ने सवाल उठाया कि क्या आयोजन करने वाले छात्रों को पता है कि उमर खालिद ने कथित तौर पर अफज़ल गुरु का समर्थन किया था, जिन्हें संसद हमले के मामले में दोषी ठहराया गया था। उन्होंने कहा, 'देश में 3.7 लाख से अधिक विचाराधीन कैदी हैं — इन छात्रों ने उमर खालिद पर ही डॉक्यूमेंट्री दिखाने का फैसला क्यों किया?'

विनूषा ने इस संदर्भ में इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायणन के मामले का भी उल्लेख किया, जिन पर कथित तौर पर झूठे आरोप लगाए गए थे और उन्हें जेल भेजा गया था, जिसका भारत के क्रायोजेनिक इंजन कार्यक्रम पर असर पड़ा था। उन्होंने कर्नल पुरोहित का भी हवाला दिया, जिन्होंने नौ वर्ष से अधिक कारावास भोगने के बाद न्यायालय से राहत पाई।

विश्वविद्यालयों की भूमिका पर बहस

विनूषा ने कहा, 'विश्वविद्यालय ऐसी जगहें होनी चाहिए जहाँ युवा दिमाग नए विचार विकसित करें और राष्ट्र-निर्माण में योगदान दें — इन्हें राजनीतिक मंच नहीं बनना चाहिए।' उन्होंने लॉ के छात्रों से अपील की कि वे कानूनी व्यवस्था को समझें और उसे सुदृढ़ करने में सहयोग करें। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर के विश्वविद्यालय परिसरों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थागत अनुशासन के बीच की सीमा रेखा को लेकर बहसें तेज़ हैं।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि उमर खालिद का मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और उन्हें अदालत से अभी तक किसी भी आरोप में दोषी नहीं ठहराया गया है। भाजपा और एबीवीपी की माँग के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस आयोजन की जाँच किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। तेलंगाना में कांग्रेस सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोषी नहीं; ऐसे में किसी पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग और उस पर राजनीतिक हस्तक्षेप, दोनों के निहितार्थ गहरे हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस तथ्य को नज़रअंदाज़ करती है कि लॉ स्कूलों में न्यायिक प्रक्रियाओं पर बहस करना अकादमिक स्वतंत्रता का हिस्सा है — लेकिन प्रशासनिक प्रक्रियाओं की अनदेखी किसी भी संस्था में स्वीकार्य नहीं।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नालसार लॉ यूनिवर्सिटी में उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री का विवाद क्या है?
हैदराबाद के नालसार लॉ विश्वविद्यालय में 26 सितंबर 2026 को कुछ छात्रों ने उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की, जिसके लिए विश्वविद्यालय के डीन से अनुमति नहीं ली गई थी। एबीवीपी ने इसका विरोध किया और भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई।
उमर खालिद कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
उमर खालिद जेएनयू के पूर्व छात्र हैं जो फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन पर 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोप हैं जिनमें 50 से अधिक लोगों की जान गई थी; यह मामला अदालत में विचाराधीन है और उन्हें अभी तक दोषी नहीं ठहराया गया है।
भाजपा ने 'हनुमान अंश' दिखाने की माँग क्यों की?
भाजपा नेता मनमीत सिंह ने 'हनुमान अंश' फिल्म नालसार परिसर में दिखाने की माँग रखी, जिसे उन्होंने उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग के विरोध में प्रतीकात्मक जवाब के रूप में पेश किया।
क्या इस स्क्रीनिंग के लिए विश्वविद्यालय की अनुमति ली गई थी?
नहीं। विश्वविद्यालय के डीन की ओर से स्पष्ट किया गया कि इस आयोजन के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी। छात्रों को केवल ईमेल के माध्यम से इसकी सूचना दी गई थी।
तेलंगाना सरकार की इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया है?
भाजपा नेताओं ने तेलंगाना की कांग्रेस सरकार पर ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। अभी तक राज्य सरकार की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 5 महीने पहले