नालसार लॉ यूनिवर्सिटी में उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग पर भाजपा का विरोध, 'हनुमान अंश' दिखाने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
हैदराबाद के नालसार लॉ विश्वविद्यालय में 26 सितंबर 2026 को जेएनयू के पूर्व छात्र और विचाराधीन कैदी उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की गई, जिसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने विरोध दर्ज कराया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इस आयोजन के लिए संस्थान के डीन से कोई अनुमति नहीं ली गई थी।
आयोजन का विवरण और विवाद
बताया गया है कि इस स्क्रीनिंग की सूचना छात्रों को ईमेल के माध्यम से दी गई थी। इसे 'आर्ट डॉक्यूमेंट्री' के नाम पर आयोजित किया गया था। विश्वविद्यालय के डीन की ओर से स्पष्ट किया गया कि इस कार्यक्रम के लिए आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी। उमर खालिद फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं और उन पर 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोप हैं, जिसमें 50 से अधिक लोगों की जान गई थी।
भाजपा नेता मनमीत सिंह की प्रतिक्रिया
भाजपा नेता मनमीत सिंह ने कहा, 'जेएनयू के पूर्व छात्र और तिहाड़ जेल में बंद उमर खालिद ने 2016 में जेएनयू में दंगे कराने की कोशिश की। नालसार लॉ विश्वविद्यालय में 'आर्ट डॉक्यूमेंट्री' प्ले करने के नाम पर एक इवेंट ऑर्गनाइज किया गया था, जबकि विश्वविद्यालय के डीन की ओर से कहा गया कि इसकी अनुमति नहीं ली गई थी।' उन्होंने यह भी माँग की कि उस परिसर में 'हनुमान अंश' फिल्म दिखाई जाए और कहा कि तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ऐसे आयोजन हो रहे हैं।
भाजपा नेता विनूषा की कड़ी आपत्ति
भाजपा नेता विनूषा ने सवाल उठाया कि क्या आयोजन करने वाले छात्रों को पता है कि उमर खालिद ने कथित तौर पर अफज़ल गुरु का समर्थन किया था, जिन्हें संसद हमले के मामले में दोषी ठहराया गया था। उन्होंने कहा, 'देश में 3.7 लाख से अधिक विचाराधीन कैदी हैं — इन छात्रों ने उमर खालिद पर ही डॉक्यूमेंट्री दिखाने का फैसला क्यों किया?'
विनूषा ने इस संदर्भ में इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायणन के मामले का भी उल्लेख किया, जिन पर कथित तौर पर झूठे आरोप लगाए गए थे और उन्हें जेल भेजा गया था, जिसका भारत के क्रायोजेनिक इंजन कार्यक्रम पर असर पड़ा था। उन्होंने कर्नल पुरोहित का भी हवाला दिया, जिन्होंने नौ वर्ष से अधिक कारावास भोगने के बाद न्यायालय से राहत पाई।
विश्वविद्यालयों की भूमिका पर बहस
विनूषा ने कहा, 'विश्वविद्यालय ऐसी जगहें होनी चाहिए जहाँ युवा दिमाग नए विचार विकसित करें और राष्ट्र-निर्माण में योगदान दें — इन्हें राजनीतिक मंच नहीं बनना चाहिए।' उन्होंने लॉ के छात्रों से अपील की कि वे कानूनी व्यवस्था को समझें और उसे सुदृढ़ करने में सहयोग करें। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर के विश्वविद्यालय परिसरों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थागत अनुशासन के बीच की सीमा रेखा को लेकर बहसें तेज़ हैं।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि उमर खालिद का मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और उन्हें अदालत से अभी तक किसी भी आरोप में दोषी नहीं ठहराया गया है। भाजपा और एबीवीपी की माँग के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस आयोजन की जाँच किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। तेलंगाना में कांग्रेस सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।