उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' बताने पर कर्नाटक में सियासी घमासान, BJP कांग्रेस आमने सामने
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद द्वारा उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' बताए जाने के बाद बेंगलुरु में तीखा राजनीतिक विवाद उठ खड़ा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बयान की कड़ी निंदा की है, जबकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने उमर खालिद के मामले में न्यायिक प्रक्रिया की सुस्त रफ़्तार पर सवाल उठाए हैं।
विवाद की जड़: डॉक्यूमेंट्री और हरिप्रसाद का बयान
नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) की लॉ एंड सोसाइटी कमेटी ने उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन 14 सितंबर को प्रस्तावित किया था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इसका विरोध किया, जिसके बाद कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए हरिप्रसाद ने कहा, "उमर खालिद एक राष्ट्रवादी हैं। ABVP को उनके बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं है।"
गौरतलब है कि यह बयान उस समय आया है जब उमर खालिद छह वर्षों से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं और उनके विरुद्ध चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद मुकदमे की सुनवाई अभी तक आगे नहीं बढ़ी है।
BJP की कड़ी प्रतिक्रिया
कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने हरिप्रसाद के बयान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि कांग्रेस उन लोगों के साथ खड़ी है जो भारत को बांटने और टुकड़े टुकड़े करने की बात करते हैं और बीके हरिप्रसाद भी उनके साथ खड़े हैं। यही वजह है कि वह उन्हें राष्ट्रवादी कहते हैं।"
BJP ने इस बयान को कांग्रेस की विचारधारा का प्रमाण बताते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्न से जोड़ने की कोशिश की।
कांग्रेस और सपा का पलटवार
कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियंक खड़गे ने सवाल उठाया कि उमर खालिद को 'राष्ट्रविरोधी' कहने का आधार क्या है। उन्होंने कहा, "उमर खालिद को राष्ट्रविरोधी कौन कह रहा है? क्या अदालत ने ऐसा कहा है? भाजपा उन्हें राष्ट्रविरोधी बता रही है। उनके मामले में सुनवाई क्यों नहीं हो रही? वह कई वर्षों से जेल में हैं और उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की गई है। फिर मुकदमे की सुनवाई आगे क्यों नहीं बढ़ रही? आखिर मुकदमा चलाने से डर किस बात का है?"
समाजवादी पार्टी (SP) के नेता एसटी हसन ने भी उमर खालिद का बचाव करते हुए कहा, "उमर खालिद हमेशा राष्ट्रीय एकता की बात करते रहे हैं। उन्होंने हमेशा सांप्रदायिक सद्भाव और उत्पीड़न से मुक्ति की बात की है। हमें समझ नहीं आता कि उन्हें राष्ट्रविरोधी कैसे कहा जा रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह छह साल से जेल में हैं और अभी तक उनका मुकदमा शुरू नहीं हुआ है। इसे रोक कौन रहा है, यह सभी जानते हैं।"
व्यापक संदर्भ: उमर खालिद का मामला
उमर खालिद पर 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप हैं। वह कथित तौर पर छह वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में UAPA के तहत बंद विचाराधीन कैदियों और लंबित मुकदमों को लेकर बहस तेज है। विपक्षी दलों का तर्क है कि मुकदमे की सुस्त रफ़्तार स्वयं एक सज़ा बन जाती है।
क्या होगा आगे
यह विवाद आगामी कर्नाटक राजनीति में गूँजता रहेगा, क्योंकि राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस और BJP के बीच वैचारिक संघर्ष पहले से चला आ रहा है। NLSIU में डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन अभी स्थगित है और इसके भविष्य पर स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। उमर खालिद के मामले में अदालती सुनवाई की तारीख पर सभी की निगाहें टिकी हैं।