उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री विवाद: प्रियांक खड़गे बोले — एबीवीपी की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं होगी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के कलबुर्गी में उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर 16 सितंबर को राजनीतिक विवाद तेज़ हो गया, जब राज्य सरकार के मंत्री प्रियांक खड़गे ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) पर सीधा हमला बोला। स्क्रीनिंग का विरोध कर रहे एबीवीपी को खड़गे ने 'गुंडागर्दी' करने वाला बताया और चेतावनी दी कि ऐसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह विवाद तब और गहरा गया जब कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' करार दिया, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एबीवीपी ने कांग्रेस पर हमले तेज़ कर दिए।
मंत्री प्रियांक खड़गे का एबीवीपी पर पलटवार
मंत्री प्रियांक खड़गे ने एबीवीपी की आलोचना करते हुए कहा, 'एबीवीपी को ज़्यादा रचनात्मक कामों में लगना चाहिए। केंद्र में आपकी सरकार है। उन शिक्षा सुधारों पर बात करें जिनकी युवा और जेन-सी बात कर रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'उस केपीएससी घोटाले पर बात करें जिसमें आपके नेता शामिल हैं। आप उस उमर खालिद के पीछे क्यों पड़े हैं? वह जेल में है, है ना? वह आपको कैसे नुकसान पहुँचा रहा है? उसे दोषी ठहराइए, कौन मना कर रहा है? लेकिन एबीवीपी इन सब चीज़ों में क्यों पड़ रहा है कि कौन-सी डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाए और कौन-सी नहीं? इस तरह की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।'
खड़गे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी BJP के बीच उमर खालिद के मुद्दे पर तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि उमर खालिद 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में कथित तौर पर कई वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं और उनका मुकदमा अभी तक शुरू नहीं हुआ है।
केंद्र सरकार पर उठाए सवाल
मंत्री खड़गे ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर भी तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'कौन कह रहा है कि उमर खालिद देश-विरोधी हैं? क्या कोर्ट ने ऐसा कहा है? बीजेपी कह रही है कि वह देश-विरोधी हैं। वे ट्रायल क्यों शुरू नहीं कर रहे हैं? उन्हें जेल में कई साल हो चुके हैं और जाहिर है कि उन पर कुछ चार्जशीट भी हैं। ट्रायल क्यों नहीं चल रहा है? वे ट्रायल करने से इतना क्यों डर रहे हैं?' यह सवाल न्यायिक प्रक्रिया की गति पर एक गंभीर राजनीतिक बहस को जन्म देता है।
सपा नेता का बयान — मुरादाबाद से समर्थन
मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता एस.टी. हसन ने भी उमर खालिद के पक्ष में बयान दिया। उन्होंने कहा, 'जहाँ तक हम समझते हैं, उमर खालिद ने हमेशा राष्ट्रीय एकता की बात की है। उन्होंने हमेशा सांप्रदायिक सद्भाव और उत्पीड़न से आज़ादी की बात की है। अब, जालिम कौन है और मजलूम कौन — यह बात आज हर कोई जानता है। हमें समझ नहीं आता कि वह देश-विरोधी कैसे हो गए। यह भी दुखद है कि वह छह साल से जेल में हैं और उनका ट्रायल अभी तक शुरू भी नहीं हुआ है।' हसन ने यह भी इशारा किया कि ट्रायल रोकने के पीछे राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है।
विवाद की पृष्ठभूमि
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद द्वारा उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' कहे जाने के बाद BJP और एबीवीपी ने इसे राष्ट्र-विरोधी बयान बताते हुए कांग्रेस पर हमला तेज़ कर दिया। एबीवीपी ने डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का विरोध किया, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक रूप से और संवेदनशील हो गया। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के बाद से ही कांग्रेस और BJP के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता तीव्र बनी हुई है।
आगे क्या होगा
इस पूरे प्रकरण ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, न्यायिक प्रक्रिया की गति और छात्र संगठनों की भूमिका पर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। राजनीतिक दलों के परस्पर विरोधी बयानों के बीच यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि उमर खालिद के मुकदमे की प्रगति किस दिशा में जाती है और क्या कर्नाटक सरकार डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग विवाद पर कोई आधिकारिक रुख अपनाती है।