NLSIU में उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग पर ABVP का विरोध, VHP ने दी कड़ी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) में उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर 13 सितंबर 2026 को तीखा विवाद उभर आया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इस स्क्रीनिंग पर कड़ा ऐतराज जताते हुए एक औपचारिक प्रेस स्टेटमेंट जारी किया, जबकि विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इससे जुड़े तत्वों को चेतावनी दी।
ABVP का रुख: असहमति की सीमा तय हो
ABVP के बेंगलुरु सिटी सेक्रेटरी अभिनंदन मिर्जी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थान विचार विमर्श और बहस के केंद्र होने चाहिए। उन्होंने कहा, "बोलने की आजादी में असहमति भी शामिल है, लेकिन उस असहमति की एक सीमा होनी चाहिए। असहमति के नाम पर आप देश की एकता और संप्रभुता पर सवाल नहीं उठा सकते या देश विरोधी चीजों का समर्थन नहीं कर सकते।"
मिर्जी ने आगे कहा कि उमर खालिद पर आतंकवाद का आरोप है और उन्होंने कथित तौर पर आतंकवादी अफजल गुरु के प्रति हमदर्दी व्यक्त करते हुए भाषण दिए हैं। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि यह स्क्रीनिंग कैंपस के बाहर आयोजित होती, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होती।
भाजपा नेता राम कदम का बयान
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता राम कदम ने ABVP के विरोध का समर्थन करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय विचारों का मंच तो हो सकता है, किंतु वह किसी विशेष विचारधारा को बढ़ावा देने का माध्यम नहीं बन सकता। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई विचार प्रस्तुत करना है, तो उसके साथ तथ्य, चर्चा और संवाद भी अनिवार्य रूप से होने चाहिए।
कदम ने कहा, "'भारत तेरे टुकड़े होंगे' जैसे नारों और कथित 'टुकड़े टुकड़े गैंग' की विचारधारा से देश की प्रगति संभव नहीं है।" उन्होंने किसी भी शैक्षणिक संस्था के बिना संवाद के प्रोपेगैंडा का मंच बनने पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई।
VHP की चेतावनी
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "कथित 'टुकड़े टुकड़े' गैंग से जुड़े राष्ट्र विरोधी तत्वों के पतन का समय आ गया है। यह एक नया भारत है और देशद्रोह, धार्मिक विश्वासघात व बगावत अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी, वरना इसके गंभीर नतीजे होंगे।"
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर के विश्वविद्यालय परिसरों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच की सीमा रेखा पर बहस तेज हो रही है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने ABVP के विरोध को खारिज करते हुए कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भाजपा के इशारे पर राजनीति करती है और इसे अधिक तवज्जो नहीं दी जानी चाहिए। विपक्ष का मानना है कि इस तरह के विरोध अकादमिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने की कोशिश हैं।
आगे क्या
NLSIU प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह विवाद उस व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है जो पिछले कई वर्षों से भारतीय विश्वविद्यालयों में अभिव्यक्ति की आजादी, राष्ट्रवाद और छात्र संगठनों की भूमिका को लेकर जारी है। यह देखना बाकी है कि NLSIU प्रशासन स्क्रीनिंग को अनुमति देता है या नहीं।