13 सितंबर 2026
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NLSIU में उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग पर ABVP का विरोध, VHP ने दी कड़ी चेतावनी

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NLSIU में उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग पर ABVP का विरोध, VHP ने दी कड़ी चेतावनी

सारांश

बेंगलुरु के NLSIU में उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग ने राष्ट्रीय विवाद को जन्म दिया। ABVP ने कैंपस को 'प्रोपेगैंडा का मंच' बनाने का विरोध किया, VHP ने कड़ी चेतावनी दी, और कांग्रेस ने इसे अकादमिक स्वतंत्रता पर हमला बताया — यह टकराव उस पुरानी बहस की नई कड़ी है।

मुख्य बातें

NLSIU बेंगलुरु में उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर 13 सितंबर 2026 को विवाद उभरा।
ABVP के सिटी सेक्रेटरी अभिनंदन मिर्जी ने कहा कि असहमति की आजादी की एक सीमा होनी चाहिए; कैंपस के बाहर स्क्रीनिंग पर कोई आपत्ति नहीं।
BJP नेता राम कदम ने तर्क और संवाद के बिना विशेष विचारधारा को बढ़ावा देने का विरोध किया।
VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के 'गंभीर नतीजों' की चेतावनी दी।
कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने ABVP के विरोध को भाजपा प्रेरित राजनीति बताया और इसे खारिज किया।
NLSIU प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) में उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर 13 सितंबर 2026 को तीखा विवाद उभर आया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इस स्क्रीनिंग पर कड़ा ऐतराज जताते हुए एक औपचारिक प्रेस स्टेटमेंट जारी किया, जबकि विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इससे जुड़े तत्वों को चेतावनी दी।

ABVP का रुख: असहमति की सीमा तय हो

ABVP के बेंगलुरु सिटी सेक्रेटरी अभिनंदन मिर्जी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थान विचार विमर्श और बहस के केंद्र होने चाहिए। उन्होंने कहा, "बोलने की आजादी में असहमति भी शामिल है, लेकिन उस असहमति की एक सीमा होनी चाहिए। असहमति के नाम पर आप देश की एकता और संप्रभुता पर सवाल नहीं उठा सकते या देश विरोधी चीजों का समर्थन नहीं कर सकते।"

मिर्जी ने आगे कहा कि उमर खालिद पर आतंकवाद का आरोप है और उन्होंने कथित तौर पर आतंकवादी अफजल गुरु के प्रति हमदर्दी व्यक्त करते हुए भाषण दिए हैं। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि यह स्क्रीनिंग कैंपस के बाहर आयोजित होती, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होती।

भाजपा नेता राम कदम का बयान

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता राम कदम ने ABVP के विरोध का समर्थन करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय विचारों का मंच तो हो सकता है, किंतु वह किसी विशेष विचारधारा को बढ़ावा देने का माध्यम नहीं बन सकता। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई विचार प्रस्तुत करना है, तो उसके साथ तथ्य, चर्चा और संवाद भी अनिवार्य रूप से होने चाहिए।

कदम ने कहा, "'भारत तेरे टुकड़े होंगे' जैसे नारों और कथित 'टुकड़े टुकड़े गैंग' की विचारधारा से देश की प्रगति संभव नहीं है।" उन्होंने किसी भी शैक्षणिक संस्था के बिना संवाद के प्रोपेगैंडा का मंच बनने पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई।

VHP की चेतावनी

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "कथित 'टुकड़े टुकड़े' गैंग से जुड़े राष्ट्र विरोधी तत्वों के पतन का समय आ गया है। यह एक नया भारत है और देशद्रोह, धार्मिक विश्वासघात व बगावत अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी, वरना इसके गंभीर नतीजे होंगे।"

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर के विश्वविद्यालय परिसरों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच की सीमा रेखा पर बहस तेज हो रही है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने ABVP के विरोध को खारिज करते हुए कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भाजपा के इशारे पर राजनीति करती है और इसे अधिक तवज्जो नहीं दी जानी चाहिए। विपक्ष का मानना है कि इस तरह के विरोध अकादमिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने की कोशिश हैं।

आगे क्या

NLSIU प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह विवाद उस व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है जो पिछले कई वर्षों से भारतीय विश्वविद्यालयों में अभिव्यक्ति की आजादी, राष्ट्रवाद और छात्र संगठनों की भूमिका को लेकर जारी है। यह देखना बाकी है कि NLSIU प्रशासन स्क्रीनिंग को अनुमति देता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

हर कुछ वर्षों में एक कैंपस इसी तरह की राष्ट्रीय बहस का अखाड़ा बनता है। असली सवाल यह है कि क्या 'प्रोपेगैंडा' और 'असहमति' की परिभाषा तय करने का अधिकार छात्र संगठनों या विश्वविद्यालय प्रशासन का है — और क्या यह निर्णय राजनीतिक दबाव से मुक्त हो सकता है। ABVP और VHP का विरोध संगठित है और वैचारिक स्पष्टता के साथ आया है, किंतु कांग्रेस की प्रतिक्रिया केवल खारिज करने तक सीमित रही — इससे वह शैक्षणिक स्वतंत्रता की रक्षक की भूमिका में विश्वसनीय नहीं दिखती। NLSIU प्रशासन की चुप्पी सबसे महत्वपूर्ण संकेत है — जब तक संस्था खुद नीतिगत स्पष्टता नहीं देती, बाहरी दबाव ही परिणाम तय करेगा।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NLSIU में उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री विवाद क्या है?
बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) में उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की योजना बनाई गई, जिसका ABVP ने यह कहते हुए विरोध किया कि कैंपस को प्रोपेगैंडा का मंच नहीं बनना चाहिए। इस विरोध के बाद VHP और BJP नेताओं ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी।
ABVP ने स्क्रीनिंग का विरोध क्यों किया?
ABVP का कहना है कि उमर खालिद पर आतंकवाद का आरोप है और उन्होंने कथित तौर पर आतंकवादी अफजल गुरु के प्रति हमदर्दी जताई है। संगठन का तर्क है कि असहमति की आजादी की एक सीमा होनी चाहिए और देश की एकता व संप्रभुता पर सवाल उठाने वाले विचारों को कैंपस में बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।
VHP ने इस मामले में क्या चेतावनी दी?
VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि 'टुकड़े टुकड़े गैंग' से जुड़े राष्ट्र विरोधी तत्वों के लिए अब समय समाप्त हो रहा है और देशद्रोह व बगावत अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने इसके 'गंभीर नतीजों' की चेतावनी दी।
कांग्रेस ने इस विवाद पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने ABVP के विरोध को भाजपा के इशारे पर की जाने वाली राजनीति बताया और कहा कि इसे अधिक तवज्जो नहीं दी जानी चाहिए। विपक्ष का मानना है कि इस तरह का विरोध अकादमिक स्वतंत्रता को दबाने की कोशिश है।
NLSIU प्रशासन ने इस पर क्या रुख अपनाया?
13 सितंबर 2026 तक NLSIU प्रशासन की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह स्पष्ट नहीं है कि स्क्रीनिंग को अनुमति दी जाएगी या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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