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ABVP ने NLSIU बेंगलुरु में उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग का किया विरोध, सोलंकी बोले — मामला लंबित, प्रदर्शन उचित नहीं

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ABVP ने NLSIU बेंगलुरु में उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग का किया विरोध, सोलंकी बोले — मामला लंबित, प्रदर्शन उचित नहीं

सारांश

एबीवीपी ने बेंगलुरु के प्रतिष्ठित नेशनल लॉ स्कूल में उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग रोकने की माँग की है। राष्ट्रीय महासचिव सोलंकी का तर्क — मामला अदालत में लंबित है, इसलिए यह स्क्रीनिंग न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। कर्नाटक सरकार पर 'नैरेटिव' बनाने का आरोप भी लगाया।

मुख्य बातें

ABVP ने NLSIU, बेंगलुरु में उमर खालिद पर प्रस्तावित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का विरोध किया।
परिषद के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा — जब तक मामला न्यायालय में लंबित है, स्क्रीनिंग उचित नहीं।
एबीवीपी ने बेंगलुरु जिला प्रशासन को लिखित में स्क्रीनिंग रोकने का अनुरोध किया।
सोलंकी ने कर्नाटक सरकार पर विद्यार्थियों के बीच 'विशेष नैरेटिव' बनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा — अदालत से क्लीन चिट मिलने के बाद डॉक्यूमेंट्री दिखाई जा सकती है; दोषी साबित होने पर निर्माताओं पर भी कार्रवाई हो।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने 13 सितंबर 2026 को नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु में प्रस्तावित उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का कड़ा विरोध किया। परिषद के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि जब तक संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब तक ऐसी किसी भी डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है और इसलिए अनुचित है।

एबीवीपी का विरोध और मांग

सोलंकी ने कहा, 'उस स्क्रीनिंग को रोका जाना चाहिए। हमें यह सोचना चाहिए कि हम छात्रों को किस व्यक्ति की डॉक्यूमेंट्री दिखाना चाहते हैं।' उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे व्यक्ति की डॉक्यूमेंट्री — जिन पर कथित तौर पर जेएनयू (JNU) परिसर में देशविरोधी नारे लगाने के आरोप हैं — विद्यार्थियों को दिखाना उचित है या नहीं। परिषद ने बेंगलुरु जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को लिखित रूप में स्क्रीनिंग रोकने का अनुरोध किया है।

न्यायालय और लंबित मामले का हवाला

सोलंकी ने स्पष्ट किया कि एबीवीपी उमर खालिद के दोष या निर्दोषता पर फैसला देने की स्थिति में नहीं है — यह निर्णय अदालत का है। उन्होंने कहा, 'उमर खालिद आरोपी है या नहीं, यह अदालत तय करेगी। लेकिन जब मामला अदालत में विचाराधीन है, तब डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से उस मामले को प्रभावित करना उचित नहीं है।' उन्होंने कहा कि यदि अदालत का फैसला आने के बाद उमर खालिद को पूरी तरह क्लीन चिट मिलती है, तब डॉक्यूमेंट्री बनाकर उसकी स्क्रीनिंग करवाई जा सकती है।

कर्नाटक सरकार पर सवाल

परिषद के राष्ट्रीय महासचिव ने यह भी पूछा कि क्या कर्नाटक सरकार इस स्क्रीनिंग के ज़रिये राज्य के विद्यार्थियों के बीच एक विशेष नैरेटिव स्थापित करने का प्रयास कर रही है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उमर खालिद UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत दर्ज दिल्ली दंगे 2020 के मामले में कथित तौर पर न्यायिक हिरासत में हैं।

विद्यार्थी परिषद का कड़ा रुख

सोलंकी ने कहा कि यदि उमर खालिद दोषी सिद्ध होते हैं और यह प्रमाणित होता है कि देशविरोधी गतिविधियाँ हुईं, तो न केवल कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, बल्कि डॉक्यूमेंट्री बनाने वालों पर भी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, 'यह बिल्कुल भारत के अंदर नहीं चलेगा। देश की छात्र शक्ति इसे स्वीकार नहीं करेगी।'

आगे क्या हो सकता है

गौरतलब है कि एनएलएसआईयू एक प्रमुख राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय है, जहाँ इस तरह की स्क्रीनिंग का राजनीतिक विवाद में खिंचना अकादमिक स्वतंत्रता बनाम न्यायिक लंबितता की बहस को नए सिरे से खोल सकता है। फिलहाल NLSIU प्रशासन और कर्नाटक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय प्रशासन के निर्देश और संस्था के आंतरिक निर्णय यह तय करेंगे कि स्क्रीनिंग होगी या रुकेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कानूनी दृष्टि से एक जटिल प्रश्न उठाता है — क्या किसी आरोपी पर दस्तावेज़ीकरण, जब तक वह अदालत का अनुमोदन न मांगे, न्यायिक प्रक्रिया को 'प्रभावित' करता है? यह बहस अकादमिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी से सीधे टकराती है, जिसे उच्चतम न्यायालय ने बार-बार संरक्षित माना है। दूसरी ओर, एनएलएसआईयू जैसे संस्थान में इस तरह के विवाद का राजनीतिकरण होना चिंताजनक है — यहाँ के छात्र देश के भावी न्यायाधीश और वकील हैं, जिन्हें विविध दृष्टिकोणों से परिचित होना ज़रूरी है। असली सवाल यह है कि क्या प्रशासन बाहरी दबाव में झुकेगा या संवैधानिक मूल्यों पर टिका रहेगा।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एबीवीपी ने उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग का विरोध क्यों किया?
एबीवीपी का तर्क है कि उमर खालिद से जुड़ा मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए स्क्रीनिंग न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। परिषद का यह भी कहना है कि देशविरोधी गतिविधियों के आरोपी व्यक्ति को सकारात्मक रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
यह स्क्रीनिंग कहाँ प्रस्तावित थी?
यह स्क्रीनिंग बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) में प्रस्तावित थी, जो भारत के अग्रणी विधि संस्थानों में से एक है।
वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने क्या शर्त रखी कि डॉक्यूमेंट्री कब दिखाई जा सकती है?
सोलंकी ने कहा कि यदि अदालत का फैसला आने के बाद उमर खालिद को पूरी तरह क्लीन चिट मिल जाए, तभी डॉक्यूमेंट्री बनाकर उसकी स्क्रीनिंग करवाई जाए। यदि वह दोषी साबित हों तो डॉक्यूमेंट्री निर्माताओं पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
एबीवीपी ने इस मामले में प्रशासन को क्या अनुरोध किया?
एबीवीपी ने बेंगलुरु जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को लिखित रूप में सूचित किया है कि इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग रोकी जाए। फिलहाल प्रशासन या NLSIU की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उमर खालिद पर क्या आरोप हैं?
उमर खालिद पर कथित तौर पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत दिल्ली दंगे 2020 से जुड़े मामले में आरोप लगाए गए हैं और वे न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले उन पर JNU परिसर में देशविरोधी नारे लगाने के भी आरोप लगाए गए थे, जो अदालत में विचाराधीन हैं।
राष्ट्र प्रेस
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