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उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' बताने पर सियासी तूफान, भाजपा ने कर्नाटक कांग्रेस से माफी माँगी

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उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' बताने पर सियासी तूफान, भाजपा ने कर्नाटक कांग्रेस से माफी माँगी

सारांश

कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी. के. हरिप्रसाद के उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' बताने वाले बयान ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया। भाजपा ने तेलंगाना, कर्नाटक और झारखंड — तीन मोर्चों पर एक साथ हमला बोला और माफी माँगी। यह विवाद राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर दोनों दलों की गहरी वैचारिक खाई को उजागर करता है।

मुख्य बातें

कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी.
हरिप्रसाद द्वारा उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' बताने पर 16 सितंबर को राजनीतिक विवाद तेज हो गया।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार से सार्वजनिक माफी की माँग की।
तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन.
रामचंद्र राव ने हैदराबाद में, चलवाडी नारायणस्वामी ने बेंगलुरु में और प्रतुल शाहदेव ने झारखंड में एक साथ कांग्रेस पर हमला बोला।
उमर खालिद 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में छह साल से विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में हैं।
एबीवीपी के सिटी सेक्रेटरी अभिनंदन मिर्जी ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने उमर खालिद को जमानत देने से इनकार किया है।

कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी. के. हरिप्रसाद द्वारा जेल में बंद छात्र नेता उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' बताए जाने के बाद 16 सितंबर को राजनीतिक विवाद और गहरा हो गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सार्वजनिक माफी की माँग की। कई राज्यों में भाजपा नेताओं ने एक साथ मोर्चा खोलते हुए इस बयान को देश-विरोधी करार दिया।

तेलंगाना भाजपा की कड़ी प्रतिक्रिया

तेलंगाना भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने हैदराबाद में कर्नाटक सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कर्नाटक सरकार और कर्नाटक के नेताओं ने उमर खालिद को राष्ट्रवादी होने का प्रमाण पत्र दिया है। हम ऐसे लोगों को प्रमाण पत्र दिए जाने की निंदा करते हैं जो भारत को तोड़ने की बात करते हैं, जो कश्मीर की 'आजादी' और 'भारत के टुकड़े-टुकड़े करने' की बात करते हैं।" उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) को 'एकमात्र राष्ट्रवादी शक्ति' बताते हुए कहा कि वही संगठन ऐसे तत्वों का खुलकर विरोध करता है।

कर्नाटक में विपक्ष का मोर्चा

कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने बेंगलुरु में कहा, "हमें इस बात पर सोचना चाहिए कि कांग्रेस उन लोगों के साथ खड़ी है जो भारत को बांटना और उसके टुकड़े करना चाहते हैं, और बी. के. हरिप्रसाद भी उनके साथ खड़े हैं। इसीलिए वे उसे राष्ट्रवादी कहते हैं।" यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से ही कई विवादों के घेरे में है।

झारखंड भाजपा ने उठाए पुराने मामले

झारखंड में भाजपा नेता प्रतुल शाहदेव ने कहा, "यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि कांग्रेस आतंकवादियों के साथ है। अगर उमर खालिद जैसा व्यक्ति, जिसकी सोच अलगाववादी और आतंकवादी है, उनके लिए राष्ट्रवादी है, तो उन्हें राष्ट्रवाद की परिभाषा ही बदलनी होगी।" शाहदेव ने उमर खालिद के पुराने मामलों का जिक्र करते हुए कहा, "उमर खालिद वही व्यक्ति था जिसका नाम जेएनयू विरोध प्रदर्शन के दौरान सामने आया था, जहाँ 'भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाल्लाह इंशाल्लाह' जैसे नारे लगाए गए थे। वह अफजल गुरु को फाँसी दिए जाने का विरोध कर रहा था।"

एबीवीपी ने न्यायपालिका का दिया हवाला

कर्नाटक में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सिटी सेक्रेटरी अभिनंदन मिर्जी ने कहा, "यह वाकई शर्मनाक है कि कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने ऐसा बयान दिया है। जिस व्यक्ति को वे राष्ट्रवादी कह रहे हैं, उस पर गैर-कानूनी गतिविधियों का आरोप है और वह छह साल से जेल में बंद है।" उन्होंने यह भी कहा, "उसे जेल में डालने वाली केंद्रीय एजेंसियाँ नहीं हैं — यह भारतीय न्यायपालिका है जिसने उसे जमानत देने से इनकार किया है। तो क्या इसका मतलब यह है कि कांग्रेस पार्टी भारतीय न्यायपालिका की वैधता को भी चुनौती दे रही है?" गौरतलब है कि उमर खालिद 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में यूएपीए के तहत विचाराधीन कैदी के रूप में बंद हैं और अदालत ने अब तक जमानत नहीं दी है।

आगे क्या होगा

कांग्रेस की ओर से अभी तक भाजपा के आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बी. के. हरिप्रसाद के बयान पर उठा यह विवाद कर्नाटक विधानसभा सत्र और आगामी स्थानीय चुनावों की पृष्ठभूमि में और अधिक राजनीतिक तीखापन ले सकता है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच की खाई को और चौड़ा करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भाजपा की प्रतिक्रिया की तीव्रता यह भी बताती है कि 'राष्ट्रवाद बनाम देशद्रोह' का यह फ्रेम चुनावी दृष्टि से कितना उपयोगी है। असली सवाल यह है कि क्या उमर खालिद के मामले में न्यायिक प्रक्रिया — जो अब तक जमानत देने में विफल रही है — को राजनीतिक वैधता के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जाना उचित है। दोनों पक्ष तथ्यों को अपने-अपने आख्यान में फिट कर रहे हैं, जबकि उमर खालिद का मुकदमा अदालत में अभी भी लंबित है। मुख्यधारा की कवरेज इस विवाद के केंद्र में मौजूद विचाराधीन कैदियों के अधिकार और यूएपीए के दुरुपयोग के व्यापक प्रश्न को प्रायः नजरअंदाज कर देती है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' बताने का विवाद क्या है?
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी. के. हरिप्रसाद ने उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' बताया, जिस पर भाजपा ने तीखी आपत्ति जताते हुए कर्नाटक की कांग्रेस सरकार से सार्वजनिक माफी की माँग की। उमर खालिद 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में छह साल से जेल में हैं।
उमर खालिद कौन हैं और वे जेल में क्यों हैं?
उमर खालिद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र नेता हैं, जिनका नाम 2016 के जेएनयू विरोध प्रदर्शन के दौरान सामने आया था। वे 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े गैर-कानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत विचाराधीन कैदी के रूप में छह साल से जेल में बंद हैं और अदालत ने अब तक उन्हें जमानत नहीं दी है।
भाजपा ने इस मामले में क्या माँग की है?
भाजपा ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार से सार्वजनिक माफी की माँग की है। तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव, कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी और झारखंड भाजपा नेता प्रतुल शाहदेव ने अलग-अलग स्थानों पर कांग्रेस पर हमला बोला।
एबीवीपी ने इस विवाद पर क्या कहा?
एबीवीपी के कर्नाटक सिटी सेक्रेटरी अभिनंदन मिर्जी ने कहा कि उमर खालिद को जेल में रखने वाली केंद्रीय एजेंसियाँ नहीं, बल्कि भारतीय न्यायपालिका है जिसने उन्हें जमानत देने से इनकार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस का यह बयान न्यायपालिका की वैधता को चुनौती देता है।
इस विवाद का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह विवाद कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के लिए राजनीतिक दबाव बढ़ा सकता है, खासकर आगामी स्थानीय चुनावों की पृष्ठभूमि में। आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर यह बहस दोनों प्रमुख दलों के बीच वैचारिक ध्रुवीकरण को और गहरा कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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