16 सितंबर 2026
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शिल्पा शेट्टी कुंद्रा का 17वाँ गणपति उत्सव: पेपर माशे बप्पा के साथ इको-फ्रेंडली परंपरा की नई मिसाल

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शिल्पा शेट्टी कुंद्रा का 17वाँ गणपति उत्सव: पेपर माशे बप्पा के साथ इको-फ्रेंडली परंपरा की नई मिसाल

सारांश

17 साल की आस्था और इस बार एक और सार्थक कदम — शिल्पा शेट्टी कुंद्रा ने POP से मिट्टी और फिर पेपर माशे तक की यात्रा तय की है। बच्चों के लिए वर्कशॉप और पर्यावरण-जिम्मेदारी का संदेश, यह गणपति उत्सव सिर्फ उत्सव नहीं, एक सीख है।

मुख्य बातें

शिल्पा शेट्टी कुंद्रा ने 16 सितंबर 2026 को 17वाँ गणपति उत्सव मुंबई में पति राज कुंद्रा और बच्चों के साथ मनाया।
इस वर्ष प्लास्टर ऑफ पेरिस और मिट्टी के बाद अब पेपर माशे से बनी इको-फ्रेंडली प्रतिमा घर लाई गई।
पिछले 10 वर्षों से परिवार लगातार पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।
बच्चों के लिए विशेष इको-फ्रेंडली गणपति वर्कशॉप आयोजित की गई, जिसमें बच्चों ने खुद मूर्तियाँ बनाईं।
शिल्पा ने इंस्टाग्राम पर वीडियो साझा कर पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदारी का संदेश दिया।

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा ने 16 सितंबर 2026 को मुंबई स्थित अपने घर में 17वें गणपति उत्सव की शुरुआत की — और इस बार उन्होंने पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक कदम और आगे ले जाते हुए पेपर माशे से निर्मित इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा घर लाई। पति राज कुंद्रा और बच्चों के साथ पूरे विधि-विधान से मनाए गए इस उत्सव में शिल्पा ने न केवल पूजा-अर्चना की, बल्कि बच्चों के लिए एक विशेष इको-फ्रेंडली गणपति वर्कशॉप भी आयोजित की।

17 साल की परंपरा में बड़ा बदलाव

शिल्पा ने अपने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में बताया कि उनका परिवार पिछले 17 वर्षों से गणपति बप्पा को घर लाने की परंपरा निभाता आ रहा है। उन्होंने लिखा, 'बप्पा को घर लाने का यह हमारा 17वाँ साल है, जिसे हम आस्था, प्यार और भक्ति के साथ मनाते हैं। पिछले 10 सालों में हमने सोच-समझकर प्लास्टर ऑफ पेरिस से मिट्टी की ओर कदम बढ़ाया और इस साल एक और कदम आगे बढ़ाते हुए पेपर माशे से बने बप्पा को घर लाए।' यह बदलाव महज़ उत्सव की औपचारिकता नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति उनके परिवार की सोची-समझी यात्रा का हिस्सा है।

पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदारी का संदेश

शिल्पा ने स्पष्ट किया कि प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की प्रतिमाओं के बजाय पहले मिट्टी और अब पेपर माशे को चुनने के पीछे गहरी सोच है। उन्होंने कहा, 'पर्यावरण के अनुकूल तरीके से त्योहार मनाने में ज़्यादा देखभाल और मेहनत लगती है, लेकिन यह सिर्फ भगवान के प्रति ही नहीं, बल्कि उस पर्यावरण के प्रति भी हमारी ज़िम्मेदारी है, जो हमें प्रकृति ने दिया है।' गौरतलब है कि POP की मूर्तियाँ विसर्जन के दौरान जलाशयों को दूषित करती हैं, जो देशभर में एक बड़ी पर्यावरणीय चिंता बन चुकी है।

बच्चों के लिए इको-फ्रेंडली वर्कशॉप

इस वर्ष के उत्सव की सबसे खास बात रही बच्चों के लिए आयोजित इको-फ्रेंडली गणपति वर्कशॉप, जिसमें बच्चों ने खुद पर्यावरण के अनुकूल गणेश प्रतिमाएँ बनाने का प्रयास किया। वीडियो में बच्चे उत्साहपूर्वक मूर्तियाँ बनाते नजर आए। शिल्पा ने कहा, 'मैं चाहती हूँ कि बच्चे इन मूल्यों को समझें और आगे भी इन्हें अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पर्यावरण-अनुकूल गणपति उत्सव को लेकर जागरूकता तेज़ी से बढ़ रही है।

उत्सव की झलक और परिवार का उत्साह

इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में शिल्पा पारंपरिक परिधान में दिखीं और राज कुंद्रा तथा बच्चों के साथ पूरे विधि-विधान से गणपति विसर्जन करती नजर आईं। वीडियो में गणपति की पूजा और घर में आयोजित अन्य धार्मिक कार्यक्रमों की झलकियाँ भी शामिल हैं। शिल्पा ने अंत में लिखा, 'बप्पा आपके परिवारों को खुशी, शांति और सफलता का आशीर्वाद दें। गणपति बप्पा मोरया।'

आगे क्या संदेश देती है यह पहल

शिल्पा की यह पहल महज़ एक सेलिब्रिटी के उत्सव तक सीमित नहीं है — यह उस व्यापक बदलाव का प्रतीक है जो भारतीय त्योहारों में धीरे-धीरे आ रहा है। यदि सार्वजनिक हस्तियाँ इस तरह के पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाती हैं, तो इसका असर लाखों अनुयायियों की आदतों पर पड़ सकता है। आने वाले वर्षों में शिल्पा की यह परंपरा और किस दिशा में जाएगी, यह देखने वाली बात होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली बदलाव तब आएगा जब यह विकल्प आम परिवारों के लिए भी सुलभ और किफायती हो — जो अभी पूरी तरह नहीं है। बच्चों के लिए वर्कशॉप जैसी पहल इस दिशा में अगली पीढ़ी को तैयार करने का प्रयास है, जो दीर्घकालिक नज़रिए से सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिल्पा शेट्टी कुंद्रा ने इस साल गणपति उत्सव में क्या खास बदलाव किया?
शिल्पा शेट्टी कुंद्रा इस साल प्लास्टर ऑफ पेरिस या मिट्टी की जगह पेपर माशे से बनी इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा घर लाईं। यह उनके 17 साल पुराने गणपति उत्सव में पर्यावरण के प्रति उनकी बढ़ती प्रतिबद्धता का नया पड़ाव है।
शिल्पा शेट्टी के परिवार ने पेपर माशे गणपति क्यों चुना?
शिल्पा के अनुसार, त्योहार को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाना भगवान और प्रकृति दोनों के प्रति ज़िम्मेदारी है। पिछले 10 वर्षों में परिवार ने POP से मिट्टी और अब पेपर माशे की ओर क्रमिक रूप से बदलाव किया है।
शिल्पा शेट्टी ने बच्चों के लिए कौन-सी वर्कशॉप आयोजित की?
शिल्पा ने इस वर्ष बच्चों के लिए एक इको-फ्रेंडली गणपति वर्कशॉप आयोजित की, जिसमें बच्चों ने खुद पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएँ बनाने की कोशिश की। शिल्पा का कहना है कि वह चाहती हैं कि बच्चे इन मूल्यों को जीवन का हिस्सा बनाएँ।
शिल्पा शेट्टी कुंद्रा कितने सालों से गणपति उत्सव मनाती हैं?
शिल्पा शेट्टी कुंद्रा पिछले 17 वर्षों से अपने घर में गणपति बप्पा को लाने की परंपरा निभाती आ रही हैं। इस परंपरा में पति राज कुंद्रा और उनके बच्चे भी पूरे उत्साह से भाग लेते हैं।
इको-फ्रेंडली गणपति प्रतिमा पर्यावरण के लिए क्यों बेहतर है?
प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाएँ विसर्जन के दौरान जलाशयों को प्रदूषित करती हैं क्योंकि वे पानी में घुलती नहीं। पेपर माशे और मिट्टी की प्रतिमाएँ पानी में आसानी से घुल जाती हैं, जिससे जल प्रदूषण काफी हद तक कम होता है।
राष्ट्र प्रेस
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