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शिल्पा शेट्टी कुंद्रा का 17वाँ गणपति उत्सव: पेपर माशे बप्पा के साथ इको-फ्रेंडली परंपरा की नई मिसाल

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शिल्पा शेट्टी कुंद्रा का 17वाँ गणपति उत्सव: पेपर माशे बप्पा के साथ इको-फ्रेंडली परंपरा की नई मिसाल

सारांश

शिल्पा शेट्टी कुंद्रा ने इस साल 17वें गणपति उत्सव में पेपर माशे की इको-फ्रेंडली प्रतिमा घर लाकर एक दशक पुरानी पर्यावरणीय यात्रा को नई ऊँचाई दी — और बच्चों के लिए वर्कशॉप आयोजित कर अगली पीढ़ी में भी यही संस्कार बोने की कोशिश की।

मुख्य बातें

शिल्पा शेट्टी कुंद्रा ने 17वें गणपति उत्सव में पहली बार पेपर माशे से बनी इको-फ्रेंडली प्रतिमा घर लाई।
परिवार ने पिछले 10 वर्षों में प्लास्टर ऑफ पेरिस से मिट्टी और अब पेपर माशे तक का सफर तय किया।
इस वर्ष बच्चों के लिए एक विशेष इको-फ्रेंडली गणपति वर्कशॉप का आयोजन किया गया।
पति राज कुंद्रा और बच्चों के साथ पूरे विधि-विधान से गणपति विसर्जन सम्पन्न हुआ।
शिल्पा ने कहा कि पर्यावरण-अनुकूल उत्सव भगवान और प्रकृति दोनों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा ने इस वर्ष अपने घर में 17वें गणपति उत्सव को एक नई पर्यावरण-सचेत पहल के साथ मनाया — पहली बार पेपर माशे से निर्मित इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा को घर लाकर। मुंबई स्थित उनके आवास पर पति राज कुंद्रा और बच्चों के साथ मिलकर पूरे विधि-विधान से बप्पा का स्वागत किया गया। यह बदलाव उनकी उस सोची-समझी पर्यावरणीय यात्रा का हिस्सा है, जो एक दशक पहले प्लास्टर ऑफ पेरिस से मिट्टी की ओर कदम बढ़ाने से शुरू हुई थी।

17 साल की परंपरा में बड़ा बदलाव

शिल्पा ने अपने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में बताया कि उनका परिवार 17 वर्षों से आस्था, प्रेम और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को घर लाता आया है। उन्होंने लिखा, 'बप्पा को घर लाने का यह हमारा 17वाँ साल है, जिसे हम आस्था, प्यार और भक्ति के साथ मनाते हैं। पिछले 10 सालों में हमने सोच-समझकर प्लास्टर ऑफ पेरिस से मिट्टी की ओर कदम बढ़ाया और इस साल एक और कदम आगे बढ़ाते हुए पेपर माशे से बने बप्पा को घर लाए।' यह क्रमिक बदलाव दर्शाता है कि उनका परिवार धार्मिक आस्था को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ने के प्रति कितना सजग है।

बच्चों के लिए इको-फ्रेंडली वर्कशॉप

इस वर्ष उत्सव में एक विशेष आयोजन जुड़ा — बच्चों के लिए एक इको-फ्रेंडली गणपति वर्कशॉप। वीडियो में बच्चे स्वयं पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएँ बनाते नज़र आए। शिल्पा ने कहा, 'मैं चाहती हूँ कि बच्चे इन मूल्यों को समझें और आगे भी इन्हें अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएँ।' यह पहल बताती है कि वे अगली पीढ़ी में पर्यावरण-चेतना के बीज बोना चाहती हैं।

पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश

अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि इको-फ्रेंडली तरीके से त्योहार मनाना अधिक श्रमसाध्य तो है, लेकिन यह केवल भगवान के प्रति नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति भी हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, 'पर्यावरण के अनुकूल तरीके से त्योहार मनाने में ज्यादा देखभाल और मेहनत लगती है, लेकिन यह सिर्फ भगवान के प्रति ही नहीं, बल्कि उस पर्यावरण के प्रति भी हमारी जिम्मेदारी है, जो हमें प्रकृति ने दिया है।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में गणेश विसर्जन के दौरान जल-प्रदूषण को लेकर चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं।

उत्सव का माहौल और विसर्जन

वीडियो में शिल्पा पारंपरिक परिधान में दिखीं और परिवार के साथ पूरे रीति-रिवाज से गणपति विसर्जन करती नज़र आईं। घर में हुए धार्मिक कार्यक्रमों और पूजा की झलकियाँ भी वीडियो में शामिल थीं। उन्होंने अपनी पोस्ट का समापन करते हुए लिखा, 'बप्पा आपके परिवारों को खुशी, शांति और सफलता का आशीर्वाद दें। गणपति बप्पा मोरया।'

आगे क्या

शिल्पा की यह पहल सोशल मीडिया पर व्यापक सराहना पा रही है और पर्यावरण-अनुकूल गणेश उत्सव मनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को और बल देती है। गौरतलब है कि कई राज्य सरकारें और नगर निकाय भी पीओपी प्रतिमाओं पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, ऐसे में किसी प्रमुख हस्ती का यह कदम जन-जागरूकता में योगदान कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं शिल्पा का एक दशक में क्रमिक बदलाव — पीओपी से मिट्टी, मिट्टी से पेपर माशे — एक सुसंगत प्रतिबद्धता दर्शाता है। बच्चों के लिए वर्कशॉप का आयोजन इसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी संस्कार बनाने की कोशिश बनाता है, जो इसे केवल ट्रेंड से अलग करता है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिल्पा शेट्टी कुंद्रा ने इस साल गणपति उत्सव में क्या खास किया?
शिल्पा शेट्टी कुंद्रा इस साल पेपर माशे से बनी इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा घर लाईं, जो उनके परिवार की 17 साल पुरानी गणपति परंपरा में एक नया पर्यावरण-सचेत कदम है। इससे पहले वे प्लास्टर ऑफ पेरिस से मिट्टी की प्रतिमा की ओर जा चुकी थीं।
शिल्पा शेट्टी कितने सालों से गणपति उत्सव मना रही हैं?
शिल्पा शेट्टी कुंद्रा पिछले 17 वर्षों से अपने घर में गणपति बप्पा का स्वागत करती आ रही हैं। उन्होंने खुद इंस्टाग्राम पर साझा किया कि यह उनके परिवार की एक स्थायी परंपरा बन चुकी है।
इको-फ्रेंडली गणपति प्रतिमा क्यों जरूरी है?
प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाएँ विसर्जन के बाद जल-निकायों में घुलती नहीं और प्रदूषण का कारण बनती हैं। मिट्टी या पेपर माशे की प्रतिमाएँ पानी में आसानी से घुल जाती हैं, जिससे नदियों और झीलों को नुकसान कम होता है।
शिल्पा शेट्टी ने बच्चों के लिए क्या वर्कशॉप आयोजित की?
शिल्पा ने इस वर्ष बच्चों के लिए एक इको-फ्रेंडली गणपति वर्कशॉप आयोजित की, जिसमें बच्चों ने स्वयं पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएँ बनाने का प्रयास किया। उनका उद्देश्य है कि बच्चे ये पर्यावरणीय मूल्य जीवन में आत्मसात करें।
शिल्पा शेट्टी के परिवार ने पिछले 10 सालों में गणपति उत्सव में कैसे बदलाव किया?
शिल्पा के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में उनके परिवार ने सोच-समझकर पहले प्लास्टर ऑफ पेरिस की जगह मिट्टी की प्रतिमा अपनाई और इस साल एक कदम और आगे बढ़ाते हुए पेपर माशे की प्रतिमा घर लाए। यह क्रमिक बदलाव उनकी दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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