अभिषेक बनर्जी की 'स्कार' इंस्टाग्राम पोस्ट से सियासी हलचल, अमेरिका में इलाज के बीच राजनीतिक अटकलें तेज
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अमेरिका में आँख के इलाज के दौरान इंस्टाग्राम पर साझा की गई एक भावनात्मक तस्वीर से पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक ने अपने चेहरे की एक क्लोज़-अप तस्वीर साझा की जिसमें उनकी आँख के पास का निशान (स्कार) स्पष्ट दिखाई देता है, और साथ में लिखा — 'यह निशान बताता है कि मैं बहुत कुछ झेल चुका हूँ, लेकिन मेरी आँखें बताती हैं कि मैं अभी खत्म नहीं हुआ हूँ।'
पोस्ट की पृष्ठभूमि
अभिषेक बनर्जी की बाईं आँख 2016 में एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से वे भारत और विदेश में कई सर्जरी और विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श ले चुके हैं। उनका वर्तमान अमेरिका दौरा भी उसी आँख के उपचार और मेडिकल कंसल्टेशन से जुड़ा है।
गौरतलब है कि यह यात्रा सहज नहीं रही। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पहले विदेश यात्रा की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद अभिषेक सर्वोच्च न्यायालय पहुँचे। सर्वोच्च न्यायालय ने सितंबर में उन्हें तीन सप्ताह के लिए इलाज हेतु विदेश यात्रा की अनुमति दी, साथ ही निर्देश दिया कि डॉक्टर, अस्पताल, ठहरने का पता, उड़ान और यात्रा कार्यक्रम की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले से उपलब्ध कराई जाए।
राजनीतिक अटकलें क्यों
पोस्ट सामने आते ही राजनीतिक हलकों में इसके भिन्न-भिन्न अर्थ निकाले जाने लगे। एक वर्ग इसे उनकी शारीरिक पीड़ा और लंबे इलाज की भावनात्मक अभिव्यक्ति मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे उनके राजनीतिक सफर में निरंतर सक्रियता के संकेत के रूप में देख रहा है। हालाँकि, अभिषेक बनर्जी ने स्वयं कहीं भी यह नहीं कहा है कि उनकी पोस्ट किसी राजनीतिक संदेश के रूप में की गई थी।
यह ऐसे समय में आया है जब TMC की आंतरिक राजनीति और अभिषेक की पार्टी में भूमिका को लेकर चर्चाएँ पहले से ही जारी हैं। पोस्ट ने इन अटकलों को और हवा दी है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने इस मौके पर तंज कसा। उन्होंने कहा, 'सुनने में आ रहा है कि अभिषेक बनर्जी न्यू जर्सी में एक आलीशान जगह पर विला किराये पर लेकर रह रहे हैं। आँख के इलाज के लिए विला की क्या ज़रूरत है?' हालाँकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
कानूनी शर्तें और वापसी की समयसीमा
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, इलाज पूरा होने के बाद अभिषेक बनर्जी को निर्धारित तीन सप्ताह की अवधि के भीतर भारत लौटना अनिवार्य है। कोर्ट की शर्तों का पालन उनके लिए बाध्यकारी है।
आगे क्या
फिलहाल अभिषेक बनर्जी का ध्यान चिकित्सा पर है, लेकिन उनकी सोशल मीडिया गतिविधि पश्चिम बंगाल की राजनीति में उनकी उपस्थिति को जीवित रखे हुए है। वापसी के बाद पार्टी और राजनीतिक मोर्चे पर उनकी भूमिका को लेकर सभी की नज़रें उन पर टिकी रहेंगी।