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क्या राहुल गांधी 'भारत बदनामी ब्रिगेड' के मुखिया बन चुके हैं? चीन वाली टिप्पणी पर भाजपा का पलटवार

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क्या राहुल गांधी 'भारत बदनामी ब्रिगेड' के मुखिया बन चुके हैं? चीन वाली टिप्पणी पर भाजपा का पलटवार

सारांश

राहुल गांधी के भारत-चीन तुलना वाले बयान से सियासी घमासान मच गया है। भाजपा ने उन्हें 'भारत बदनामी ब्रिगेड' का मुखिया बताया, जबकि उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। जानिए इस सियासी विवाद के पीछे की सच्चाई।

मुख्य बातें

राहुल गांधी का बयान सियासी विवाद को जन्म देता है।
भाजपा ने उन्हें 'भारत बदनामी ब्रिगेड' का मुखिया कहा।
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर प्रश्न उठाना गलत है।
भारतीय संस्कृति और परंपरा का सम्मान होना चाहिए।
सियासी बयानबाजी का उद्देश्य सत्ता में बने रहना है।

नई दिल्ली, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में विपक्षी नेता राहुल गांधी के भारत-चीन की तुलना वाले बयान पर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल गांधी अब 'भारत बदनामी ब्रिगेड' के नेता बन चुके हैं, इसलिए वह लगातार देश के खिलाफ दुष्प्रचार करते रहते हैं।

भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी का एलओपी का मतलब 'लीडर ऑफ अपोजिशन' नहीं, बल्कि 'लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा' है। वह कभी भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था तो कभी देश की संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ बयान देते हैं।

शहजाद पूनावाला ने कहा, "राहुल गांधी भारतीय अर्थव्यवस्था को 'डेड इकोनमी' कहते हैं। वह देश की मैन्युफैक्चरिंग के खिलाफ बयान देते हैं। आज जब भारत की अर्थव्यवस्था 11वें स्थान से चौथे स्थान पर आ गई है और मैन्युफैक्चरिंग लगातार बढ़ रही है, तो राहुल गांधी ने फिर से भारत के खिलाफ दुष्प्रचार किया है।" भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को चीन से चंदा मिलता है, इसलिए वे चीन का प्रचार करते हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने राहुल गांधी को जवाब देते हुए कहा, "प्रधानमंत्री लगातार तमिल भाषा, संस्कृति और विरासत को बढ़ावा देने पर जोर देते हैं। उन्होंने तमिल संगम जैसे कार्यक्रमों की शुरूआत की है और इन कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। अपने भाषणों में, वह लगातार तमिल भाषा और इसकी पुरानी परंपराओं के बारे में बात करते हैं। प्रधानमंत्री का कहना है कि शिक्षा में भी तमिल भाषा का उपयोग होना चाहिए, इसीलिए राहुल गांधी को परेशानी हो रही है, क्योंकि कांग्रेस पार्टी की सरकार ने यह सब नहीं किया था।"

बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा, "राहुल गांधी, सबसे पहले खुद को भारतीय समझें, भारतीय बनें और खुद को भारतीय संस्कृति और परंपरा से जोड़ें। आज भी उन्हें केवल ननिहाल और विदेश ही आकर्षित करते हैं। जब वह इस मानसिकता से उबरेंगे, तब भारत का हर काम अच्छा लगेगा, और भारत विश्व के नेतृत्वकर्ता के रूप में दिखाई देगा।"

विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि भारत ने इतिहास में भी पूरे विश्व का नेतृत्व किया। अब वह अवसर फिर से आया है, इसलिए राहुल गांधी को पहले भारतीय बनना चाहिए। उन्हें यहाँ के लोगों को जानना-पहचानना चाहिए और देश के गर्व पर अभिमान करना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद पर भी सवाल उठाता है। यह जरूरी है कि हम इस विवाद को समझें और इसके पीछे की सच्चाई जानें।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी का बयान किस संदर्भ में था?
राहुल गांधी ने भारत-चीन की तुलना करते हुए कुछ विवादास्पद बयानों का हवाला दिया, जिससे सियासी हलचल मची।
भाजपा ने राहुल गांधी के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
भाजपा ने राहुल गांधी को 'भारत बदनामी ब्रिगेड' का मुखिया बताया और उन पर देश के खिलाफ दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया।
क्या राहुल गांधी की बातें भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर डालती हैं?
राहुल गांधी के बयानों का असर राजनीतिक माहौल पर पड़ता है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था वास्तविकता में मजबूत हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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