राहुल गांधी ने मोदी को लिखा पत्र, 2018 के मुकदमे वापस लेने की मांग की
सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिखा।
- 2018 में एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ हुए प्रदर्शन का जिक्र।
- निर्दोष युवाओं के मुकदमे वापस लेने की मांग।
- 14 दलित युवाओं की मृत्यु का उल्लेख।
- कानूनी प्रक्रियाओं के बोझ से मुक्ति की अपील।
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र के साथ साझा करते हुए कहा कि 8 साल पहले एससी/एसटी एक्ट को कमजोर करने के खिलाफ लाखों दलित-आदिवासी युवाओं ने आंदोलन किया, जिसमें कई को गिरफ्तार किया गया। संसद ने कानून को मजबूत किया है, लेकिन आज भी निर्दोष युवा मुकदमे का बोझ झेल रहे हैं।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में अनुरोध किया है कि 2 अप्रैल, 2018 को एससी/एसटी अधिनियम को कमजोर करने के खिलाफ देशभर में हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान दर्ज सभी मामलों को वापस लिया जाए। उस दिन 14 दलित युवाओं की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हुई थी। यह विरोध प्रदर्शन एक न्यायिक फैसले के कारण प्रारंभ हुए थे, जिसने एससी/एसटी एक्ट को कमजोर किया था।
उन्होंने आगे लिखा कि यह कानून लाखों दलित और आदिवासी लोगों को न्याय और सुरक्षा का अधिकार प्रदान करता है और हिंसा और भेदभाव के खिलाफ उनकी रक्षा करता है। यह कानून एक लंबे समय तक चले आंदोलन का फल है, जिसने अपराधियों की छूट को समाप्त किया और पीड़ितों को न्याय की मांग करने का साहस दिया।
2 अप्रैल के विरोध में यह भी देखा गया कि दलित और आदिवासी लोगों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव में वृद्धि हो रही थी। युवा प्रदर्शनकारी अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग कर न्याय, समानता और सम्मान की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के बाद कई निर्दोष युवाओं को गिरफ्तार किया गया और आज भी वे आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने सरकार से अनुरोध किया है कि 2 अप्रैल, 2018 के विरोध से संबंधित एससी/एसटी एक्ट युवाओं के खिलाफ दर्ज सभी मामलों की समीक्षा की जाए। सभी मामलों को वापस लें या रद्द करें, ताकि निर्दोष युवाओं को लंबी कानूनी प्रक्रियाओं के बोझ से मुक्त किया जा सके।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पत्र साझा करते हुए लिखा कि 8 साल पहले एससी/एसटी एक्ट को कमजोर करने के खिलाफ लाखों दलित-आदिवासी युवाओं ने आंदोलन किया, जिसमें कई को गिरफ्तार किया गया। संसद ने कानून को मजबूत किया, लेकिन आज भी निर्दोष युवा मुकदमे का बोझ उठा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मजबूत एससी/एसटी एक्ट उनका अधिकार है और शांतिपूर्ण आंदोलन का उनका हक। आज उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि संवेदनशील और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण से इन सभी मामलों को वापस लिया जाए।