चुनाव आयोग का खुलासा: राहुल गांधी की मुलाकात पूर्व-निर्धारित नहीं थी, शाम 4 बजे पुलिस से मिली जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने 6 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों के मार्च और धरने वाले दिन शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल या उसके प्रतिनिधि ने आयोग से बैठक के लिए समय नहीं माँगा था। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, चुनाव आयोग को राहुल गांधी या अन्य सांसदों द्वारा ज्ञापन सौंपने की इच्छा के बारे में कोई प्रत्यक्ष या पूर्व सूचना नहीं मिली थी।
दिल्ली पुलिस से मिली जानकारी
चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि शाम 4 बजे दिल्ली पुलिस ने आयोग को सूचित किया कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक दल ज्ञापन सौंपना चाहता है। इससे पहले, न तो कोई औपचारिक अनुरोध आया था और न ही किसी प्रतिनिधि ने संपर्क किया था।
बाद में पुलिस ने यह भी सूचित किया कि 240 सांसद संसद भवन के संलग्नक में चुनाव आयोग के साथ बैठक करना चाहते हैं। आयोग ने इस सुझाव को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि प्रोटोकॉल के अनुसार इस तरह की बैठक निर्वाचन सदन के अतिरिक्त किसी अन्य स्थान पर नहीं हो सकती।
चुनाव आयोग का प्रस्ताव और सांसदों का इनकार
आयोग ने सांसदों से ज्ञापन प्राप्त करने के लिए प्रस्तावित बैठक स्थल पर अपने सबसे वरिष्ठ अधिकारी को भेजने की पेशकश की। हालाँकि, सांसदों ने इस विकल्प को भी अस्वीकार कर दिया।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने 2025 में राजनीतिक दलों के साथ बैठकों के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया स्थापित की है और सभी राजनीतिक दलों को इसकी जानकारी दी जा चुकी है। आयोग के अनुसार, यह प्रक्रिया स्वाभाविक और पारदर्शी है — कोई भी दल अपने विधिवत अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से समय माँग सकता है और बैठक आपसी सहमति से तय होती है।
धरना और हिरासत का घटनाक्रम
इससे पहले, राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और इंडिया ब्लॉक के अन्य नेताओं ने संसद स्ट्रीट स्थित आकाशवाणी भवन परिसर में धरना दिया, जो नौ घंटे से अधिक समय तक चला। रात 8 बजे के आसपास दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी सहित अन्य नेताओं को हिरासत में लिया।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष चुनाव आयोग पर विभिन्न मुद्दों को लेकर सवाल उठाता रहा है। यह घटनाक्रम संसदीय लोकतंत्र में विपक्ष और संवैधानिक संस्थाओं के बीच संवाद की प्रक्रिया को लेकर बहस को नए सिरे से जन्म देता है।
चुनाव आयोग की स्थिति
चुनाव आयोग ने अपने बयान में दोहराया कि वह देश की संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करता है और अपने प्रोटोकॉल व परंपराओं का भी पालन करता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि बैठक के लिए कोई भी दल किसी भी समय अनुरोध कर सकता है।
आगे देखना होगा कि विपक्षी दल इस प्रक्रिया के माध्यम से आयोग से औपचारिक संवाद स्थापित करते हैं या नहीं, और यह घटनाक्रम आने वाले चुनावी दौर में राजनीतिक विमर्श को किस दिशा में ले जाता है।