7 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

इंडिया ब्लॉक मार्च: राहुल-प्रियंका की हिरासत पर गहलोत बोले, चुनाव आयोग से मिलने का अधिकार मिलना चाहिए था

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
इंडिया ब्लॉक मार्च: राहुल-प्रियंका की हिरासत पर गहलोत बोले, चुनाव आयोग से मिलने का अधिकार मिलना चाहिए था

सारांश

इंडिया ब्लॉक का संसद से निर्वाचन सदन तक मार्च रास्ते में ही रोक दिया गया और राहुल गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं पर सवाल बताते हुए माँग की कि विपक्ष को चुनाव आयोग से मिलने का अधिकार मिलना चाहिए था।

मुख्य बातें

इंडिया ब्लॉक ने 6 अक्टूबर 2026 को संसद से निर्वाचन सदन तक मार्च का आयोजन किया, जिसे पुलिस ने बीच रास्ते में रोक दिया।
राहुल गांधी , प्रियंका गांधी वाड्रा और कई सांसदों को निर्वाचन सदन पहुँचने से पहले हिरासत में लिया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने माँग की कि विपक्ष को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने की अनुमति मिलनी चाहिए थी।
मार्च का मुख्य उद्देश्य वोट चोरी के आरोपों और एसआईआर से जुड़े सवाल आयोग के सामने रखना था।
गहलोत ने पारदर्शिता और संस्थागत संवाद की माँग करते हुए प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह से मामले में हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार, 6 अक्टूबर 2026 को संसद से निर्वाचन सदन तक आयोजित इंडिया ब्लॉक के मार्च के दौरान विपक्षी नेताओं की हिरासत को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि विपक्ष को चुनाव आयोग के समक्ष अपनी चिंताएं सीधे रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था।

मार्च का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

गहलोत के अनुसार, इंडिया ब्लॉक ने यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करने और वोट चोरी के आरोपों तथा एसआईआर (SIR) से जुड़े सवालों को आयोग के सामने रखने के इरादे से आयोजित किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मार्च किसी टकराव के लिए नहीं, बल्कि एक संवैधानिक संस्था के साथ संवाद स्थापित करने की कोशिश थी।

हिरासत पर उठे सवाल

गहलोत ने बताया कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई सांसदों को निर्वाचन सदन पहुँचने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया और मार्च को बलपूर्वक रोक दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस ने नेताओं को एक संवैधानिक संस्था की ओर बढ़ने से क्यों रोका।

गहलोत ने कहा, 'आयोग से मिलने से पहले ही मार्च रोकना और नेताओं को हिरासत में लेना लोकतंत्र की परंपराओं पर प्रश्नचिह्न लगाता है।' उन्होंने जोर दिया कि राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं के साथ संवाद करने का अधिकार होना चाहिए।

चुनाव आयोग पर जवाबदेही की माँग

गहलोत ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सभी राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए मुद्दों को सुनना चाहिए। उनका तर्क था कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता इसी में है कि वह हितधारकों के प्रश्नों और अभ्यावेदनों का पारदर्शी तरीके से जवाब दे।

उन्होंने कहा कि वोट चोरी के आरोपों और एसआईआर से जुड़े सवालों का समाधान पारदर्शिता, उचित प्रक्रिया और संस्थागत संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए — न कि नेताओं को रोककर।

मोदी-शाह का संदर्भ और विपक्ष की माँग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा कि सरकार को विपक्ष की चिंताओं को दबाने की बजाय स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं और संवाद के माध्यम से उनका समाधान करना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष चुनावी पारदर्शिता को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि इंडिया ब्लॉक के नेताओं की हिरासत के बाद यह विवाद और गहरा होने की संभावना है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह उठाने की तैयारी में हैं। विपक्ष का अगला कदम क्या होगा, यह आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न केवल सत्ता पक्ष के लिए। मुख्यधारा की कवरेज हिरासत की नाटकीयता पर टिकी है, लेकिन असली सवाल यह है कि एसआईआर और वोट चोरी के आरोपों पर आयोग की चुप्पी ने इस मार्च की जमीन तैयार की। जब तक चुनाव आयोग विपक्ष की मूल चिंताओं का पारदर्शी जवाब नहीं देता, यह टकराव और गहरा होता जाएगा।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया ब्लॉक का निर्वाचन सदन मार्च क्यों आयोजित किया गया था?
इंडिया ब्लॉक ने यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलकर वोट चोरी के आरोपों और एसआईआर से जुड़े सवाल सीधे चुनाव आयोग के सामने रखने के लिए आयोजित किया था। विपक्ष का कहना था कि यह संवैधानिक संस्था के साथ संवाद की कोशिश थी, न कि टकराव।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को क्यों हिरासत में लिया गया?
पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई सांसदों को संसद से निर्वाचन सदन की ओर बढ़ते मार्च के दौरान रोककर हिरासत में लिया। अशोक गहलोत के अनुसार, यह कार्रवाई नेताओं के निर्वाचन सदन पहुँचने से पहले ही की गई।
गहलोत ने चुनाव आयोग से क्या माँग की है?
गहलोत ने माँग की है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सभी राजनीतिक दलों के अभ्यावेदनों को सुनें और उनका पारदर्शी जवाब दें। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं के साथ बातचीत करने का अवसर मिलना चाहिए।
एसआईआर विवाद क्या है जिसे विपक्ष उठा रहा है?
विपक्ष एसआईआर (SIR) से जुड़े सवाल उठा रहा है, जिन्हें वह मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता से जोड़कर देख रहा है। गहलोत का कहना है कि इन सवालों का समाधान पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए।
इस हिरासत का राजनीतिक असर क्या होगा?
कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के सहयोगी दल इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह उठाने की तैयारी में हैं। यह घटना चुनावी पारदर्शिता और विपक्ष के संवैधानिक संस्थाओं तक पहुँच के अधिकार को लेकर बहस को और तेज करेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 1 घंटा पहले
  3. 6 घंटे पहले
  4. 1 साल पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले