तमिलनाडु चुनाव: राहुल गांधी की भागीदारी पर अनिश्चितता से डीएमके की चिंता बढ़ी
सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी की भागीदारी पर अनिश्चितता ने डीएमके को चिंतित किया है।
- डीएमके 15 अप्रैल को एक जनसभा आयोजित कर रही है।
- राहुल गांधी की उपस्थिति से पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरेगा।
- डीएमके और कांग्रेस के बीच तालमेल की कमी पर सवाल उठ रहे हैं।
- मतदान का दिन नजदीक है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
चेन्नई, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने वाले हैं, और अब केवल नौ दिन शेष रह गए हैं। पूरे राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भागीदारी को लेकर चल रही अनिश्चितता, डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए लगातार चिंता का कारण बन रही है।
सत्तारूढ़ डीएमके 'सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस' के तहत 15 अप्रैल को सेलम में एक बड़ी जनसभा का आयोजन कर रही है।
पार्टी के नेता चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में अपनी एकता और ताकत दर्शाने के लिए बेहद उत्सुक हैं, किन्तु राहुल गांधी की भागीदारी पर अभी तक कोई पुष्टि न मिलने से डीएमके नेतृत्व में बेचैनी बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी के चुनावी कार्यक्रम के बारे में स्पष्टता की कमी ने डीएमके और उसके प्रमुख सहयोगी दल कांग्रेस के बीच तालमेल को लेकर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
यह समस्या तब उभरी जब गठबंधन को लेकर हुई पहले की बातचीत में कुछ मतभेद सामने आए थे, जिसने दोनों दलों के बीच चुनावी साझेदारी को अंतिम रूप देने से पहले उनके संबंधों में तनाव पैदा कर दिया था।
हाल के दिनों में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ राहुल गांधी की सीमित संयुक्त उपस्थिति ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है। हालांकि, दोनों नेताओं ने इससे पहले पुडुचेरी में एक ही दिन चुनाव प्रचार किया था, लेकिन वे एक मंच पर नहीं दिखे।
इसी प्रकार, चेन्नई और कोयंबटूर के दौरों पर भी दोनों नेताओं की कोई संयुक्त चुनावी सभा आयोजित नहीं की गई, जिससे दोनों दलों के बीच तालमेल की कमी को लेकर चल रही अटकलें और भी बढ़ गईं।
कांग्रेस पार्टी के भीतर भी राहुल गांधी की योजनाओं को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जहां तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ प्रभारी गिरीश चोडनकर ने उम्मीद जताई है कि राहुल गांधी जल्द ही चुनाव प्रचार में शामिल होंगे, वहीं पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, डीएमके का नेतृत्व चुनाव प्रचार के इस महत्वपूर्ण अंतिम चरण में राहुल गांधी की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है, क्योंकि वे इस कड़े मुकाबले वाले चुनाव में एकजुट होने के महत्व को भली-भांति समझते हैं।
पार्टी के भीतर के सूत्रों का मानना है कि राहुल गांधी की उपस्थिति पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरेगी और मतदाताओं के बीच गठबंधन के संदेश को मजबूत करेगी।
जैसे-जैसे मतदान का दिन करीब आ रहा है, डीएमके और कांग्रेस के बीच बदलते समीकरण विशेष रूप से राहुल गांधी की भागीदारी से जुड़े प्रश्न को तमिलनाडु की राजनीतिक दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।