क्या राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के गठबंधन से कोई फर्क पड़ेगा?
सारांश
Key Takeaways
- योगेश कदम ने गठबंधन को असफल बताया।
- राज और उद्धव का इतिहास मुंबई के लिए नकारात्मक रहा है।
- कांग्रेस की राजनीतिक नीतियों की आलोचना की गई।
- बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुद्दे पर कदम का बयान।
- मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत राजनीति पर सवाल उठाए गए।
मुंबई, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने कहा है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के गठबंधन का कोई असर नहीं होने वाला है। उनके अनुसार, जनता का मानना है कि इतने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद दोनों भाइयों ने मुंबई के लोगों के लिए कुछ नहीं किया।
योगेश कदम ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक से स्पष्ट है कि राज और उद्धव का गठबंधन चुनाव पर कोई प्रभाव नहीं डाल रहा है। ढाई साल मुख्यमंत्री रहने के दौरान भी उन्होंने मुंबई के लिए कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया।
उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे के निधन के बाद से माहौल पहले जैसा नहीं रहा। उनके समय में हर नेता और कार्यकर्ता के साथ एक मजबूत रिश्ता था, लेकिन अब नेताओं को दबाने की राजनीति शुरू हो गई है, जिससे मातोश्री की महत्ता कम हुई है। जब उन्होंने कांग्रेस से हाथ मिलाया, तो मातोश्री की स्थिति पहले जैसी नहीं रही।
बांग्लादेशी और रोहिंग्या के मुद्दे पर योगेश कदम ने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब अवैध राशन कार्ड बनाए जाते थे। फर्जी नामों के जरिए वोट बैंक में लोग शामिल होते थे। कांग्रेस ने अपने वोट बैंक को बढ़ाने के लिए ये सब किया। यही कारण है कि आज हमें इनकी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले राशन कार्ड बनाना आसान था जिससे वोटर कार्ड बन जाते थे। लोग खुद को भारतीय नागरिक बताने लगे थे। यह सब कांग्रेस के समय में क्यों नहीं रोका गया, जब उद्धव ठाकरे सत्ता में थे?
पश्चिम बंगाल में ईडी की कार्रवाई पर उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का वहां जाना दर्शाता है कि वह इसे व्यक्तिगत रूप से ले रही हैं। अगर कुछ गलत नहीं हुआ है, तो कोई कार्रवाई नहीं होगी। इस प्रकार वह खुद को गिरा रही हैं।