9 अक्टूबर 2026
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महाकाल मंदिर उज्जैन: राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, पंचामृत अभिषेक व भस्म आरती से गूंजा परिसर

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महाकाल मंदिर उज्जैन: राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, पंचामृत अभिषेक व भस्म आरती से गूंजा परिसर

सारांश

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी पर बाबा महाकाल राजा स्वरूप में सजे। पंचामृत अभिषेक और महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म आरती के इस दिव्य दृश्य के लिए हजारों श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध थे।

मुख्य बातें

श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में 9 अक्टूबर 2026 को आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी पर भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया; दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से पंचामृत अभिषेक किया गया।
परंपरानुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म आरती अर्पित की गई।
भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद तड़के ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर के कपाट खोले गए।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुधवार की रात से ही कतार में लग गए थे।

श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के पावन अवसर पर शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को भगवान बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। बाबा को राजा स्वरूप में दिव्य श्रृंगार से सजाया गया और पंचामृत अभिषेक के साथ परंपरागत पूजन विधि से आरती अर्पित की गई। इस अलौकिक दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुधवार की रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे।

मुख्य घटनाक्रम

शुक्रवार की तड़के सुबह भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की मधुर ध्वनि के बीच बाबा महाकाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक किया गया और इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से भगवान का अभिषेक संपन्न हुआ। यह पवित्र पूजन विधि मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।

भस्म आरती की विशेष विधि

पूजा के क्रम में प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल ने मुकुट धारण किया। इसके उपरांत झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की गूँज के बीच भव्य भस्म आरती आयोजित हुई। परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

दिव्य दर्शन और भस्म आरती के समापन के बाद समूचा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के गगनभेदी उद्घोष, घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा। यह ऐसे समय में आया है जब आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में उज्जैन की पावन नगरी में आस्था का विशेष प्रवाह देखने को मिलता है। इस आरती में सम्मिलित होने के लिए देश के विभिन्न कोनों से श्रद्धालु उज्जैन पहुँचते हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

श्री महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी भस्म आरती भारतीय धर्म-संस्कृति की अनूठी परंपरा मानी जाती है। गौरतलब है कि यह आरती हर दिन तड़के अर्ध-रात्रि के बाद से आरंभ होती है और इसके दर्शन के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से श्रद्धालु पंजीकरण करवाते हैं। आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी का यह विशेष अवसर भक्तों के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। आगे भी विभिन्न धार्मिक पर्वों पर इसी प्रकार के भव्य आयोजन मंदिर परिसर में संपन्न होते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है — लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय पर्यटन और व्यापार को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है। गौरतलब है कि महाकाल लोक परियोजना के विस्तार के बाद से यहाँ दर्शनार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे धार्मिक आयोजन भारत की 'धार्मिक पर्यटन अर्थव्यवस्था' को मज़बूत करते हैं, जिस पर नीति-निर्माताओं का ध्यान अभी भी अपेक्षा से कम है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकाल भस्म आरती क्या है और यह क्यों खास है?
महाकाल भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला वह अनुष्ठान है जिसमें भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस भस्म के अर्पण के बाद बाबा निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं, जो इसे भारत की दुर्लभ धार्मिक परंपराओं में से एक बनाता है।
भस्म आरती में पंचामृत अभिषेक की क्या विधि है?
भस्म आरती से पूर्व भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया जाता है, इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक होता है। यह पंचामृत पूजन शास्त्रों में वर्णित परंपरागत विधि के अनुसार संपन्न किया जाता है।
भस्म आरती में भाग लेने के लिए श्रद्धालु क्या करें?
श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दर्शन हेतु ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। आश्विन कृष्ण पक्ष जैसे विशेष अवसरों पर भीड़ अधिक होती है, इसलिए श्रद्धालु पहले से पंजीकरण करवाएँ और समय से पहले मंदिर पहुँचें।
महानिर्वाणी अखाड़े का भस्म आरती में क्या योगदान है?
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसे मंदिर की धार्मिक विरासत का अभिन्न अंग माना जाता है।
आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी का क्या महत्व है?
आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी तिथि माना जाता है। इस दिन शिव मंदिरों में विशेष पूजन और आरती का आयोजन होता है तथा श्रद्धालुओं की मान्यता है कि इस तिथि पर महाकाल के दर्शन से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
राष्ट्र प्रेस
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