25 अक्टूबर 2026
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उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर में भांग से सजे बाबा महाकाल, आश्विन चतुर्दशी पर भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु

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उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर में भांग से सजे बाबा महाकाल, आश्विन चतुर्दशी पर भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन चतुर्दशी पर भांग से सुसज्जित और रजत मुकुट धारण किए बाबा महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार आयोजित इस दिव्य अनुष्ठान के दर्शन के लिए रात से ही हजारों श्रद्धालु कतारबद्ध थे।

मुख्य बातें

25 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का भांग से विशेष शृंगार किया गया और रजत मुकुट धारण कराया गया।
परंपरानुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म आरती अर्पित की गई।
भगवान महाकाल का पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस — से अभिषेक किया गया।
रात से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु कतारबद्ध होकर दर्शन के लिए मंदिर परिसर में मौजूद रहे।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 25 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई। भांग से सुसज्जित और रजत मुकुट धारण किए बाबा महाकाल के दर्शन के लिए रात से ही श्रद्धालु कतारबद्ध होकर मंदिर परिसर में एकत्रित हो गए थे।

कपाट खुलने का दृश्य

रविवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के उपरांत ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के पट खोले गए। मंदिर का पूरा परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा। कपाट खुलते ही भक्तगण 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से मंदिर परिसर को भर देते हैं — यह दृश्य प्रति आयोजन हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

पंचामृत अभिषेक और शृंगार

मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। परंपरानुसार प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर की आरती के पश्चात बाबा महाकाल ने रजत मुकुट धारण किया और भांग से विशेष शृंगार किया गया — जो शिव की साधना-परंपरा का अभिन्न प्रतीक माना जाता है।

भस्म आरती की परंपरा

परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की त्रिवेणी के बीच यह आरती संपन्न हुई। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यह आस्था ही लाखों श्रद्धालुओं को प्रतिवर्ष उज्जैन की पावन नगरी की ओर खींचती है।

श्रद्धालुओं की आस्था और उपस्थिति

इस अलौकिक अनुष्ठान के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध होकर प्रतीक्षारत थे। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के पश्चात जब श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दर्शन हुए, तो अपने आराध्य के सम्मुख होकर भक्त खुद को धन्य महसूस कर रहे थे। गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, और यहाँ की भस्म आरती देश की सर्वाधिक दर्शनीय धार्मिक परंपराओं में गिनी जाती है।

आगे का कार्यक्रम

महाकालेश्वर मंदिर में पर्व-तिथियों पर नित्य की तुलना में अधिक श्रद्धालु आते हैं। मंदिर प्रशासन द्वारा दर्शन व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं। आने वाले पर्वों पर भी इसी प्रकार की भव्य आरतियों का आयोजन अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का केंद्र बिंदु है। पर्व-तिथियों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती उपस्थिति यह दर्शाती है कि आस्था-पर्यटन एक महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक धारा बन चुकी है। मंदिर प्रशासन के लिए असली चुनौती इस आस्था की लहर को सुव्यवस्थित दर्शन-प्रबंधन में बदलना है ताकि भीड़ के बीच परंपरा की गरिमा बनी रहे।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर का अनूठा और सर्वाधिक प्रतिष्ठित अनुष्ठान है, जिसमें भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यह आरती परंपरानुसार महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा संपन्न कराई जाती है।
बाबा महाकाल का भांग से शृंगार क्यों किया जाता है?
भांग को शिव की उपासना परंपरा में पवित्र माना जाता है और यह भगवान शिव की साधना-संस्कृति का प्रतीक है। पर्व-तिथियों पर विशेष शृंगार में भांग का उपयोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा महाकाल को प्रिय माना जाता है।
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती कब होती है?
भस्म आरती प्रतिदिन तड़के होती है और पर्व-तिथियों पर इसका आयोजन विशेष भव्यता के साथ किया जाता है। 25 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर आयोजित भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
महाकालेश्वर मंदिर का धार्मिक महत्व क्या है?
महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग होने के कारण विशेष महत्व प्राप्त है। यह मंदिर उज्जैन, मध्य प्रदेश में स्थित है और देशभर के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख तीर्थस्थल है।
उज्जैन महाकाल दर्शन के लिए कैसे पहुँचें?
उज्जैन मध्य प्रदेश का प्रमुख नगर है और रेल, सड़क तथा वायु मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। निकटतम हवाई अड्डा इंदौर है, जो उज्जैन से लगभग 55 किलोमीटर दूर है। भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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